गेहूं के दाम में उछाल, सरकारी केंद्राें पर खरीद धड़ाम
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जिले में गेहूं के सर्वाधिक क्रय केंद्र पीसीएफ के हैं। शुरूआती दौर में खरीद को आंदोलनों ने झटका दिया था। बाद में शासन स्तर से बातचीत के बाद जैसे-तैसे खरीद शुरू हुई। इसी बीच मौसम ने करवट ली और गेहूं की कटाई मड़ाई बाधित हो गई। इससे अप्रैल माह निकल गया।
मई में पांचों एजेंसियों ने खरीद के लिए पूरी ताकत लगाई तो केंद्रों पर किसानों की आमद हुई। ताबड़तोड़ खरीद के बीच अचानक बाजार भाव चढ़ने लगा और तमाम बाहर के प्रदेशों के व्यापारी भी जिले के ग्रामीण इलाकों में मनमानी कीमत पर घर से गेहूं उठाने लगे। यह गेहूं हरियाणा व अन्य प्रदेशों को भेजा रहा था।
जिला प्रशासन ने शिकंजा कसा तो बाहर के व्यापारियों ने हाथ खींच लिए। मई के अंत तक क्रय केंद्रों पर गेहूं की आमद कम हो गई। हर दिन 1500 एमटी की खरीद लुढ़क कर 400 एमटी पर आ गई। इसका परिणाम यह रहा कि लक्ष्य 84500 एमटी के सापेक्ष अब मात्र 54225 एमटी की खरीद पर अटक गई है। इसमें यूपी एग्रो ने सबसे कम 66 एमटी की जबकि सर्वाधिक पीसीएफ ने 22830 एमटी व खरीद खाद्य रसद विभाग ने 22759 एमटी की खरीद बृहस्पतिवार तक की है।
जिला विपणन अधिकारी गोरखनाथ त्रिपाठी ने कहा कि खरीद का लक्ष्य पूरा होना संभव नहीं है। क्योंकि बाजार में गेहूं की कीमत बढ़ गई है। सरकार की न्यूनतम मूल्य समर्थन योजना का उद्देश्य भी यही है कि किसानों को उनके उत्पाद की वाजिब कीमत मिले। खरीद में पारदर्शिता के चलते गेहूं का बाजार मूल्य चढ़ा है। वैसे अभी आठ दिन में दस से 12 हजार एमटी की खरीद खाद्य रसद विभाग के क्रय केंद्र करेंगे।