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यहां दलालों के चंगुल में फंस लुट रहे मरीज
Updated Thu, 27 Sep 2018 12:22 AM IST
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सेटिंग के खेल में लुट रहे मरीज
महिला अस्पताल में दवा व जांच के नाम पर भी शोषण
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। हर माह सरकारी खजाने से स्वास्थ्य सेवाओं पर करोड़ों रुपये का व्यय हो रहा है, बावजूद इसके लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसके पीछे का कारण यह है कि बिचौलिए शासन के मंसूबों को पूरा होने ही नहीं दे रहे हैं, जिसके चलते लोग खुद को ठगा महसूस कर शासन को कोसते हैं।
बता दें कि शहर का महिला अस्पताल इन दिनों दलालों की पनाहगाह बना हुआ है, इनके चंगुल में फंसकर मरीज लुट रहे हैं। ये दलाल इतने शातिर होते हैं कि आसानी से इन्हें कोई पहचान भी नहीं सकता है। तीमारदारों से ये इस तरह बर्ताव करते हैं, जैसे उनके सगे संबंधी हो। और विश्वास में लेकर ये इनसे मोटी रकम वसूल लेते हैं। सूत्रों की मानें तो अस्पताल के बाहर पैथालॉजी व मेडिकल स्टोरों की भरमार है। इन्होंने महिला व पुरुष दलालों को सेट कर रखा है, जो दिन व रात अस्पताल परिसर में चक्कर लगाते रहते हैं। यहां तक तो ठीक है, लेकिन इनकी पहुंच डॉक्टरों के केबिन तक भी होती है। ये मरीजों को ताड़ते रहते हैं, जैसे ही कोई मरीज डॉक्टर को दिखाकर बाहर निकलता है, ये उसका पर्चा ले लेते हैं। और उसे गुमराह करते हैं कि अस्पताल की दवाएं फायदा कहां करती हैं, बाहर से ले लो। जैसे ही कोई इनके जाल में फंसा, ये उसे संबंधित मेडिकल स्टोर व पैथालॉजी पर ले जाते हैं। मरीज यहां से जितने की दवा खरीदेगा या जांच कराएगा, उसका दस प्रतिशत इन्हें तुरंत कमीशन दे दिया जाता है। जबकि जिले का स्वास्थ्य महकमा कहता है अस्पताल में दवाओं की कोई कमी नहीं हैं, जांच भी यहां निशुल्क होती है। यही नहीं ये दलाल प्रसव पीड़ितों के परिजनों से नार्मल डिलिवरी व बेहतर ऑपरेशन का दावा कर सेटिंग वाले नर्सिंग होमों पर लेकर पहुंच जाते हैं। इसके बदले इन दलालों को नार्मल डिलिवरी पर 2500 रुपये तथा सीजर आपरेशन पर पांच हजार रुपये तुरंत मिल जाते हैं। सवाल यह उठता है कि यह सब जिम्मेदारों की नाक के नीचे ही हो रहा है जिसकी इन्हें भनक तक नहीं है।
क्या कहते हैं जिम्मेंदार
सीएमएस डॉ एके सिंह ने कहा कि मैं अस्पताल का निरीक्षण करता रहता हूं, दलालों पर शिकंजा कसने के लिए तैयारी चल रही है। जल्द ही इनसे अस्पताल मुक्त होगा।
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महिला अस्पताल में दवा व जांच के नाम पर भी शोषण
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। हर माह सरकारी खजाने से स्वास्थ्य सेवाओं पर करोड़ों रुपये का व्यय हो रहा है, बावजूद इसके लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसके पीछे का कारण यह है कि बिचौलिए शासन के मंसूबों को पूरा होने ही नहीं दे रहे हैं, जिसके चलते लोग खुद को ठगा महसूस कर शासन को कोसते हैं।
बता दें कि शहर का महिला अस्पताल इन दिनों दलालों की पनाहगाह बना हुआ है, इनके चंगुल में फंसकर मरीज लुट रहे हैं। ये दलाल इतने शातिर होते हैं कि आसानी से इन्हें कोई पहचान भी नहीं सकता है। तीमारदारों से ये इस तरह बर्ताव करते हैं, जैसे उनके सगे संबंधी हो। और विश्वास में लेकर ये इनसे मोटी रकम वसूल लेते हैं। सूत्रों की मानें तो अस्पताल के बाहर पैथालॉजी व मेडिकल स्टोरों की भरमार है। इन्होंने महिला व पुरुष दलालों को सेट कर रखा है, जो दिन व रात अस्पताल परिसर में चक्कर लगाते रहते हैं। यहां तक तो ठीक है, लेकिन इनकी पहुंच डॉक्टरों के केबिन तक भी होती है। ये मरीजों को ताड़ते रहते हैं, जैसे ही कोई मरीज डॉक्टर को दिखाकर बाहर निकलता है, ये उसका पर्चा ले लेते हैं। और उसे गुमराह करते हैं कि अस्पताल की दवाएं फायदा कहां करती हैं, बाहर से ले लो। जैसे ही कोई इनके जाल में फंसा, ये उसे संबंधित मेडिकल स्टोर व पैथालॉजी पर ले जाते हैं। मरीज यहां से जितने की दवा खरीदेगा या जांच कराएगा, उसका दस प्रतिशत इन्हें तुरंत कमीशन दे दिया जाता है। जबकि जिले का स्वास्थ्य महकमा कहता है अस्पताल में दवाओं की कोई कमी नहीं हैं, जांच भी यहां निशुल्क होती है। यही नहीं ये दलाल प्रसव पीड़ितों के परिजनों से नार्मल डिलिवरी व बेहतर ऑपरेशन का दावा कर सेटिंग वाले नर्सिंग होमों पर लेकर पहुंच जाते हैं। इसके बदले इन दलालों को नार्मल डिलिवरी पर 2500 रुपये तथा सीजर आपरेशन पर पांच हजार रुपये तुरंत मिल जाते हैं। सवाल यह उठता है कि यह सब जिम्मेदारों की नाक के नीचे ही हो रहा है जिसकी इन्हें भनक तक नहीं है।
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क्या कहते हैं जिम्मेंदार
सीएमएस डॉ एके सिंह ने कहा कि मैं अस्पताल का निरीक्षण करता रहता हूं, दलालों पर शिकंजा कसने के लिए तैयारी चल रही है। जल्द ही इनसे अस्पताल मुक्त होगा।