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हवा का हाल : सवा सौ क्विंटल बारूद उगलेगा धुआं तो सांस लेना हो जाएगा दूभर
Sat, 11 Nov 2023 01:08 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sat, 11 Nov 2023 01:08 AM IST
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जिले में स्थायी और अस्थायी 252 लाइसेंसी दुकानें, हर दुकान पर करीब 50 किलो बारूद मौजूद
10 करोड़ रुपये के पटाखे तीन दिन में हो जाएंगे हवा
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। प्रदूषण पर अंकुश की लाख कवायदों के बीच एक चिंता वाली खबर है। दिवाली पर जिले भर में करीब सवा सौ क्विंटल बारूद से पटाखे तैयार हो चुके हैं। जाहिर है पटाखे का शोर और धुआं वशिष्ठ नगरी में वायु प्रदूषण के हालात और बदतर करेगा। ऐसे में शहरवासियों को सजग रहने की जरूरत है। कोशिश यही हो कि दिवाली और अन्य त्योहारों पर उन्हीं पटाखों का इस्तेमाल हो, जिससे प्रदूषण कम से कम हो।
प्रशासन की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक जिले में पटाखे बेचने के लिए 22 स्थायी लाइसेंसी पंजीकृत हैं। इसके अलावा 250 अस्थायी लाइसेंस जारी किए गए हैं। इसमें सदर तहसील में 95, रुधौली में 40, भानपुर में 60 और हर्रैया तहसील क्षेत्र के 55 अस्थायी लाइसेंसी शामिल हैं। स्थायी लाइसेंसियों को 45 किलो बारूद और अस्थायी लाइसेंसियों को 15 किलोग्राम बारूद रखने की अनुमति है। मगर, सभी ने मनमाने ढंग से अनुमति से ज्यादा स्टॉक जमा कर रखा है।
औसतन 50 किलो बारूद प्रत्येक दुकानदार के पास मौजूद है। इस तरह से बाजार में सवा सौ क्विंटल बारूद के पटाखे बिकने के लिए रखे गए हैं। जानकारों के अनुसार इससे भी ज्यादा बारूद शहर के कई इलाकों में मौजूद अवैध दुकानों में है। इसके अलावा गोदाम भी हैं, जहां से पटाखे बेचे जाते हैं। अब बारूद की कुल खरीद कीमत देखें तो ढाई से तीन करोड़ रुपये है। व्यापारी बताते हैं कि तीन से चार गुना की बचत है, यानी पटाखों की कीमत 10 करोड़ रुपये पहुंच जाएगी। अगर सभी पटाखे बिके तो एक दिन में 10 करोड़ रुपये हवा में धुआं बनकर उड़ जाएंगे और शोर के साथ वायुमंडल में प्रदूषण का स्तर भी बढ़ना तय है।
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पटाखों की दुकानों पर इन नियमों का रखना होगा ध्यान
- चिह्नत स्थलों पर लगने वाली दुकानों के बीच में नौ वर्गमीटर की दूरी होनी चाहिए।
- दुकानें टिनशेड की होंगी, किसी तरह का कोई कपड़ा या टेंट नहीं लगाना है।
- दो दुकानों के बीच में 200 लीटर पानी, 100 फीट बालू और फायर सिस्टम रखना अनिवार्य है।
- कोई भी दुकानदार पटाखे का टेस्ट नहीं करेगा।
- अग्निशमन विभाग की तरफ से दुकान लगने वाले स्थानों पर 18 छोटे-बड़े वाहनों के साथ दमकल कर्मियों की ड्यूटी लगाई जाएगी।
- फायर कर्मचारी लगातार गश्त पर रहेंगे और कहीं भी आग लगने की घटना को काबू करने में मदद करेंगे।
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10 करोड़ रुपये के पटाखे तीन दिन में हो जाएंगे हवा
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। प्रदूषण पर अंकुश की लाख कवायदों के बीच एक चिंता वाली खबर है। दिवाली पर जिले भर में करीब सवा सौ क्विंटल बारूद से पटाखे तैयार हो चुके हैं। जाहिर है पटाखे का शोर और धुआं वशिष्ठ नगरी में वायु प्रदूषण के हालात और बदतर करेगा। ऐसे में शहरवासियों को सजग रहने की जरूरत है। कोशिश यही हो कि दिवाली और अन्य त्योहारों पर उन्हीं पटाखों का इस्तेमाल हो, जिससे प्रदूषण कम से कम हो।
प्रशासन की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक जिले में पटाखे बेचने के लिए 22 स्थायी लाइसेंसी पंजीकृत हैं। इसके अलावा 250 अस्थायी लाइसेंस जारी किए गए हैं। इसमें सदर तहसील में 95, रुधौली में 40, भानपुर में 60 और हर्रैया तहसील क्षेत्र के 55 अस्थायी लाइसेंसी शामिल हैं। स्थायी लाइसेंसियों को 45 किलो बारूद और अस्थायी लाइसेंसियों को 15 किलोग्राम बारूद रखने की अनुमति है। मगर, सभी ने मनमाने ढंग से अनुमति से ज्यादा स्टॉक जमा कर रखा है।
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औसतन 50 किलो बारूद प्रत्येक दुकानदार के पास मौजूद है। इस तरह से बाजार में सवा सौ क्विंटल बारूद के पटाखे बिकने के लिए रखे गए हैं। जानकारों के अनुसार इससे भी ज्यादा बारूद शहर के कई इलाकों में मौजूद अवैध दुकानों में है। इसके अलावा गोदाम भी हैं, जहां से पटाखे बेचे जाते हैं। अब बारूद की कुल खरीद कीमत देखें तो ढाई से तीन करोड़ रुपये है। व्यापारी बताते हैं कि तीन से चार गुना की बचत है, यानी पटाखों की कीमत 10 करोड़ रुपये पहुंच जाएगी। अगर सभी पटाखे बिके तो एक दिन में 10 करोड़ रुपये हवा में धुआं बनकर उड़ जाएंगे और शोर के साथ वायुमंडल में प्रदूषण का स्तर भी बढ़ना तय है।
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पटाखों की दुकानों पर इन नियमों का रखना होगा ध्यान
- चिह्नत स्थलों पर लगने वाली दुकानों के बीच में नौ वर्गमीटर की दूरी होनी चाहिए।
- दुकानें टिनशेड की होंगी, किसी तरह का कोई कपड़ा या टेंट नहीं लगाना है।
- दो दुकानों के बीच में 200 लीटर पानी, 100 फीट बालू और फायर सिस्टम रखना अनिवार्य है।
- कोई भी दुकानदार पटाखे का टेस्ट नहीं करेगा।
- अग्निशमन विभाग की तरफ से दुकान लगने वाले स्थानों पर 18 छोटे-बड़े वाहनों के साथ दमकल कर्मियों की ड्यूटी लगाई जाएगी।
- फायर कर्मचारी लगातार गश्त पर रहेंगे और कहीं भी आग लगने की घटना को काबू करने में मदद करेंगे।