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धान खरीद: कोर्ट की शरण में राइस मिलर्स
ब्यूरो/अमर उजाला बस्ती
Updated Sun, 25 Nov 2018 11:12 PM IST
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धान
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बस्ती। धान खरीद पर प्रशासन की सख्ती के चलते पखवाड़े भर में ग्राफ 1500 एमटी पहुंच गया है। जिले के सभी 60 केंद्रों में से सर्वाधिक खरीद मंडी व सांऊघाट केंद्रों ने की है। खरीद को और तेज करने के लिए शासन के निर्देश पर पीसीएफ ने आठ और केंद्र खोलने को मंजूरी देेते हुए सूची डिप्टी आरएमओ को भेज दी है। इधर राइस मिलर्स एसोसिएशन ने प्रशासनिक दबाव को देखते हुए एक पक्षीय अनुबंध का आरोप लगाते हुए कोर्ट की शरण ली है। इसके चलते केंद्रों पर धान डंप होने लगा है, जिससे प्रभारी परेशान हैं।
धान खरीद की शुरुआत यूं तो पहली नवंबर से होनी थी, मगर हड़ताल के चलते खरीद 10 दिन देरी से शुरू हुई। पहले सहकारी समितियों के सचिव फिर विपणन निरीक्षक हड़ताल पर चले गए थे। मान-मनौवल के बाद दोनों मान गए और खरीद शुरू हुई। इनके बीच की एक कड़ी राइस मिलर्स अभी भी खरीद में सहयोग को तैयार नहीं हैं। क्योंकि वे अनुबंध को एक पक्षीय मानते हैं। इसी के चलते वे कोर्ट में शरण लिए हैं। हालांकि जिले में प्रशासनिक दबाव के चलते 22 संबद्ध मिलों में से 12 ने प्रशासन के सामने घुटने टेक दिए और अनुबंध कर लिया है, मगर वे तय नीति के अनुसार केंद्र से धान नहीं उठा रहे हैं। ऐसे में केंद्रों पर धीरे-धीरे धान डंप होने लगा है। इन स्थितियों को देखते हुए केंद्र प्रभारी भी परेशान हैं, क्योंकि यदि राइस मिलर कुटाई को तैयार नहीं हुए तो धान रखने का संकट पैदा हो जाएगा।
राइस मिलर्स फेडरेशन के चेयरमैन जयेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि प्रशासन एक पक्षीय अनुबंध को दबाव बना रहा है। ऐसे में मजबूरन संगठन को कोर्ट की शरण लेनी पड़ी अब 27 नवंबर को सुनवाई के बाद यह तय होगा कि मिलर अनुबंध करेगा या नहीं। वैसे एक पक्षीय अनुबंध को कोर्ट ने संज्ञान लिया है। डिप्टी आरएमओ गोरखनाथ त्रिपाठी ने कहा कि मिलर्स से बातचीत चल रही है। 12 ने अनुबंध कर लिया है, मगर वे अभी धान नहीं उठाए हैं। मंगलवार को सरकार से वार्ता की तिथि तय है उसके बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। वैसे तय है कि मिलर्स धान की उठान कर सहयोग करेंगे।
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धान खरीद की शुरुआत यूं तो पहली नवंबर से होनी थी, मगर हड़ताल के चलते खरीद 10 दिन देरी से शुरू हुई। पहले सहकारी समितियों के सचिव फिर विपणन निरीक्षक हड़ताल पर चले गए थे। मान-मनौवल के बाद दोनों मान गए और खरीद शुरू हुई। इनके बीच की एक कड़ी राइस मिलर्स अभी भी खरीद में सहयोग को तैयार नहीं हैं। क्योंकि वे अनुबंध को एक पक्षीय मानते हैं। इसी के चलते वे कोर्ट में शरण लिए हैं। हालांकि जिले में प्रशासनिक दबाव के चलते 22 संबद्ध मिलों में से 12 ने प्रशासन के सामने घुटने टेक दिए और अनुबंध कर लिया है, मगर वे तय नीति के अनुसार केंद्र से धान नहीं उठा रहे हैं। ऐसे में केंद्रों पर धीरे-धीरे धान डंप होने लगा है। इन स्थितियों को देखते हुए केंद्र प्रभारी भी परेशान हैं, क्योंकि यदि राइस मिलर कुटाई को तैयार नहीं हुए तो धान रखने का संकट पैदा हो जाएगा।
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राइस मिलर्स फेडरेशन के चेयरमैन जयेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि प्रशासन एक पक्षीय अनुबंध को दबाव बना रहा है। ऐसे में मजबूरन संगठन को कोर्ट की शरण लेनी पड़ी अब 27 नवंबर को सुनवाई के बाद यह तय होगा कि मिलर अनुबंध करेगा या नहीं। वैसे एक पक्षीय अनुबंध को कोर्ट ने संज्ञान लिया है। डिप्टी आरएमओ गोरखनाथ त्रिपाठी ने कहा कि मिलर्स से बातचीत चल रही है। 12 ने अनुबंध कर लिया है, मगर वे अभी धान नहीं उठाए हैं। मंगलवार को सरकार से वार्ता की तिथि तय है उसके बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। वैसे तय है कि मिलर्स धान की उठान कर सहयोग करेंगे।
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