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तीन तटबंध की सुरक्षा को स्वीकृति हुए 34.69 करोड़
Updated Fri, 07 Jul 2017 11:15 PM IST
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तटबंधों की सुरक्षा के नाम पर गोलमाल
बस्ती।
तटबंधों और गांवों को बाढ़ से बचाने के लिए हर साल करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं मगर स्थायी समाधान नहीं हो रहा है। बाढ़ के नाम पर इस विभाग में हर साल भारी गोलमाल होता है और इसकी जानकारी शासन और प्रशासन को भी रहती है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि घाघरा नदी में जितना बोल्डर विभाग ने गिरा दिया, उससे पूरी नदी पट जाती।
बाढ़ खंड विभाग के अधिकारी और ठेकेदार बाढ़ के समय अधिक सक्रिय हो जाते हैं। तटबंधों को बचाने के लिए साल भर कार्ययोजना बनती है। इस विभाग पर हमेशा यह आरोप लगता रहा है कि इस विभाग के अधिकारी और कर्मचारी बाढ़ के समय क्यों इतना सक्रिय रहते हैं, जब कि विभाग के पास कार्य करने के लए नौ माह से अधिक समय रहता है। हाल ही में बाढ़ मंत्री के दौरे के दौरान भी इस विभाग के अधिकारियों और ठेकेदारों पर बोल्डर और अन्य निर्माण के नाम पर सरकारी धन की बंदरबांट की शिकायतें की गईं। विभाग के एक ठेकेदार की मानें तो इस खेल में सभी लोग शामिल रहते हैं। नीचे से लेकर ऊपर तक की संलिप्तता रहती है। कहते हैं कि बजट लाने के लिए ठेकेदार को शासन में भारी सुविधा शुल्क देना पड़ता है। यही हाल स्थानीय स्तर का भी है। अगर इस ठेकेदार की बात को सच मानें तो बाढ़ के समय सिर्फ 25 फीसदी कार्य होता है।
तटबंधों की सुरक्षा में मिले 34.69 करोड़
हर साल की तरह इस साल भी विभाग को तटबंधों और गांवों को बाढ़ से बचाने के नाम पर राज्य आकस्मिक निधि से 34.69 की मंजूरी मिली। विभाग को इस मद में 13.87 करोड़ की धनराशि मिल भी चुकी है। जिनकी मंजूरी मिली है, उनमें हर्रैया तहसील की घाघरा नदी के तट पर लोलपुर-विक्रमजोत तटबंध पर 12.05 करोड़, सदर तहसील के घाघरा नदी के बाएं तट पर कलवारी-रामपुर तंटबंध पर 10.66 करोड़ एवं इसी तहसील के कलवारी- रामपुर तटबंध की सुरक्षा के लिए पिचिंग कार्य के लिए 11.99 करोड़।
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तहसीलदार ने की बोल्डर गिराने की मांग
एडीएम भगवान शरण ने बताया कि तहसीलदार सदर ने जांच रिपोर्ट में कलवारी-रामपुर तटबंध के किनारे बोल्डर गिराने की रिपोर्ट की है। धोबहट तटबंध के स्पर नंबर चार पर रेनकट की मरम्मत के लिए बोल्डर की आवश्यकता बताई है। इसके लिए विभाग को लिखा गया है।
रेननकट, रैटहोल भरने में खर्च हो गए 60 लाख
बस्ती। पिछली बाढ़ के समय में नौ तटबंध रेनकट और रैटहोल के कारण असुरक्षित होने का दावा बाढ़ खंड के अधिकारियों ने किया था। इसे भरने के लिए विभाग की ओर से अब तक 60 लाख रुपये खर्च करने की रिपोर्ट की गई।
जिन तटबंधों को रेनकट, रैटहोल, मूज कटिंग एवं रेगुलेटर के कारण खतरा हो गया था, उनकी मरम्मत के नाम पर 60 लाख रुपये खर्च करने का दावा किया गया। उनमें विक्रमजोत-धुसवा तटबंध पर तीन लाख, इसी तटबंध मिट्टी भराई पर एक लाख, काशीपुर-दुबौलिया तटबंध पर दो लाख, कटरिया-चांदपुर तटबंध पर दो लाख, चांदपुर-गौरा तटबंध पर एक लाख, गौरा-सैफाबाद तटबंध पर चार लाख, सैफाबाद-कलवारी तटबंध पर एक लाख, कलवारी-रामपुर तटबंध के सुदृढ़ीकरण पर पांच लाख, नकटा-छपवा तटबंध पर तीन लाख 20 हजार, मनवर नदी के दाएं तट पर निर्मित पंडूलघाट-नैकापार तटबंध पर एक लाख, कलवारी-रामपुर के ग्राम पिपरपाती के सामने यूपीपीसीएल के ड्रेजर मशीन से चैनेलाइजेशन पर सात लाख एवं अधीक्षण अभियंता के आवास मरम्मत के नाम पर दो लाख खर्च हुआ। इसी तरह रिर्जव के रूप में नायलान क्रेट, पुरानी सीमेंट की बोरियां, प्रथम श्रेणी का बिक्र रोड़ा व मिर्जापुर स्टोन बोल्डर के नाम पर खरीद की गई।
नाबार्ड ने भी दिया 63.58 करोड़
बस्ती। नाबार्ड वित्त पोषित परियोजना के तहत दो तटबंधों के लिए 63.59 करोड़ की स्वीकृति दी है। इसमें 27 करोड़ की धनराशि विभाग को मिल भी चुकी है। जिन तटबंधों के लए धन जारी किया गया, उनमें घाघरा नदी के बाएं तट पर निर्मित गौरा-सैफाबाद तटबंध की सुरक्षा के लिए कटाव निरोधक कार्य करने के लिए 33. 98 करोड़ और निर्मित कलवारी-रामपुर तटबंध पर सात अदद स्पर निर्माण कराने के लिए 29.59 करोड़ सहित कुल 63.58 करोड़ की स्वीकृति दी गई, जिसमें गौरा-सैफाबाद तटबंध के लिए 15 करोड़ और कलवारी-रामपुर तटबंध के लिए 12 करोड़ जारी किया है।
डीएम और विधायक ने बंधे का निरीक्षण किया
कुदरहा। क्षेत्र में घाघरा नदी के बढ़ते दबाव को देखते हुए शुक्रवार को डीएम अरविंद सिंह और महादेवा के विधायक रवि सोनकर सहित अन्य अधिकारियों ने कलवारी-रामपुर तटबंध का निरीक्षण किया। यहां पर लगभग 30 करोड़ की लागत से सात स्पर का निर्माण हो रहा है।
निर्माण कार्य को गुणवत्तापरक और एक सप्ताह में पूरा करने का निर्देश बाढ़ खंड विभाग के अधिकारियों को डीएम ने दिया। विधायक ने बताया कि कटान हो रही है, जिसे रोकने का हर संभव प्रयास किया जाएगा। बताया कि सरकार ने उनके क्षेत्र के लिए 30 करोड़ दिया है, जो कि क्षेत्र के लोगों के लिए एक उपलब्धि है। इस मौके सीआरओ आरडी पांडेय, एसडीएम सदर कीर्ति प्रकाश भारती, निदेशचंद्र त्रिपाठी, बलराम यादव, प्रदीप पांडेय, इंदु तिवारी, महेंद्रपाल, मनीष त्रिपाठी, संजय चौधरी, रमन पाल, रिंकू पाल सहित अन्य मौजूद रहे।
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बस्ती।
तटबंधों और गांवों को बाढ़ से बचाने के लिए हर साल करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं मगर स्थायी समाधान नहीं हो रहा है। बाढ़ के नाम पर इस विभाग में हर साल भारी गोलमाल होता है और इसकी जानकारी शासन और प्रशासन को भी रहती है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि घाघरा नदी में जितना बोल्डर विभाग ने गिरा दिया, उससे पूरी नदी पट जाती।
बाढ़ खंड विभाग के अधिकारी और ठेकेदार बाढ़ के समय अधिक सक्रिय हो जाते हैं। तटबंधों को बचाने के लिए साल भर कार्ययोजना बनती है। इस विभाग पर हमेशा यह आरोप लगता रहा है कि इस विभाग के अधिकारी और कर्मचारी बाढ़ के समय क्यों इतना सक्रिय रहते हैं, जब कि विभाग के पास कार्य करने के लए नौ माह से अधिक समय रहता है। हाल ही में बाढ़ मंत्री के दौरे के दौरान भी इस विभाग के अधिकारियों और ठेकेदारों पर बोल्डर और अन्य निर्माण के नाम पर सरकारी धन की बंदरबांट की शिकायतें की गईं। विभाग के एक ठेकेदार की मानें तो इस खेल में सभी लोग शामिल रहते हैं। नीचे से लेकर ऊपर तक की संलिप्तता रहती है। कहते हैं कि बजट लाने के लिए ठेकेदार को शासन में भारी सुविधा शुल्क देना पड़ता है। यही हाल स्थानीय स्तर का भी है। अगर इस ठेकेदार की बात को सच मानें तो बाढ़ के समय सिर्फ 25 फीसदी कार्य होता है।
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तटबंधों की सुरक्षा में मिले 34.69 करोड़
हर साल की तरह इस साल भी विभाग को तटबंधों और गांवों को बाढ़ से बचाने के नाम पर राज्य आकस्मिक निधि से 34.69 की मंजूरी मिली। विभाग को इस मद में 13.87 करोड़ की धनराशि मिल भी चुकी है। जिनकी मंजूरी मिली है, उनमें हर्रैया तहसील की घाघरा नदी के तट पर लोलपुर-विक्रमजोत तटबंध पर 12.05 करोड़, सदर तहसील के घाघरा नदी के बाएं तट पर कलवारी-रामपुर तंटबंध पर 10.66 करोड़ एवं इसी तहसील के कलवारी- रामपुर तटबंध की सुरक्षा के लिए पिचिंग कार्य के लिए 11.99 करोड़।
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तहसीलदार ने की बोल्डर गिराने की मांग
एडीएम भगवान शरण ने बताया कि तहसीलदार सदर ने जांच रिपोर्ट में कलवारी-रामपुर तटबंध के किनारे बोल्डर गिराने की रिपोर्ट की है। धोबहट तटबंध के स्पर नंबर चार पर रेनकट की मरम्मत के लिए बोल्डर की आवश्यकता बताई है। इसके लिए विभाग को लिखा गया है।
रेननकट, रैटहोल भरने में खर्च हो गए 60 लाख
बस्ती। पिछली बाढ़ के समय में नौ तटबंध रेनकट और रैटहोल के कारण असुरक्षित होने का दावा बाढ़ खंड के अधिकारियों ने किया था। इसे भरने के लिए विभाग की ओर से अब तक 60 लाख रुपये खर्च करने की रिपोर्ट की गई।
जिन तटबंधों को रेनकट, रैटहोल, मूज कटिंग एवं रेगुलेटर के कारण खतरा हो गया था, उनकी मरम्मत के नाम पर 60 लाख रुपये खर्च करने का दावा किया गया। उनमें विक्रमजोत-धुसवा तटबंध पर तीन लाख, इसी तटबंध मिट्टी भराई पर एक लाख, काशीपुर-दुबौलिया तटबंध पर दो लाख, कटरिया-चांदपुर तटबंध पर दो लाख, चांदपुर-गौरा तटबंध पर एक लाख, गौरा-सैफाबाद तटबंध पर चार लाख, सैफाबाद-कलवारी तटबंध पर एक लाख, कलवारी-रामपुर तटबंध के सुदृढ़ीकरण पर पांच लाख, नकटा-छपवा तटबंध पर तीन लाख 20 हजार, मनवर नदी के दाएं तट पर निर्मित पंडूलघाट-नैकापार तटबंध पर एक लाख, कलवारी-रामपुर के ग्राम पिपरपाती के सामने यूपीपीसीएल के ड्रेजर मशीन से चैनेलाइजेशन पर सात लाख एवं अधीक्षण अभियंता के आवास मरम्मत के नाम पर दो लाख खर्च हुआ। इसी तरह रिर्जव के रूप में नायलान क्रेट, पुरानी सीमेंट की बोरियां, प्रथम श्रेणी का बिक्र रोड़ा व मिर्जापुर स्टोन बोल्डर के नाम पर खरीद की गई।
नाबार्ड ने भी दिया 63.58 करोड़
बस्ती। नाबार्ड वित्त पोषित परियोजना के तहत दो तटबंधों के लिए 63.59 करोड़ की स्वीकृति दी है। इसमें 27 करोड़ की धनराशि विभाग को मिल भी चुकी है। जिन तटबंधों के लए धन जारी किया गया, उनमें घाघरा नदी के बाएं तट पर निर्मित गौरा-सैफाबाद तटबंध की सुरक्षा के लिए कटाव निरोधक कार्य करने के लिए 33. 98 करोड़ और निर्मित कलवारी-रामपुर तटबंध पर सात अदद स्पर निर्माण कराने के लिए 29.59 करोड़ सहित कुल 63.58 करोड़ की स्वीकृति दी गई, जिसमें गौरा-सैफाबाद तटबंध के लिए 15 करोड़ और कलवारी-रामपुर तटबंध के लिए 12 करोड़ जारी किया है।
डीएम और विधायक ने बंधे का निरीक्षण किया
कुदरहा। क्षेत्र में घाघरा नदी के बढ़ते दबाव को देखते हुए शुक्रवार को डीएम अरविंद सिंह और महादेवा के विधायक रवि सोनकर सहित अन्य अधिकारियों ने कलवारी-रामपुर तटबंध का निरीक्षण किया। यहां पर लगभग 30 करोड़ की लागत से सात स्पर का निर्माण हो रहा है।
निर्माण कार्य को गुणवत्तापरक और एक सप्ताह में पूरा करने का निर्देश बाढ़ खंड विभाग के अधिकारियों को डीएम ने दिया। विधायक ने बताया कि कटान हो रही है, जिसे रोकने का हर संभव प्रयास किया जाएगा। बताया कि सरकार ने उनके क्षेत्र के लिए 30 करोड़ दिया है, जो कि क्षेत्र के लोगों के लिए एक उपलब्धि है। इस मौके सीआरओ आरडी पांडेय, एसडीएम सदर कीर्ति प्रकाश भारती, निदेशचंद्र त्रिपाठी, बलराम यादव, प्रदीप पांडेय, इंदु तिवारी, महेंद्रपाल, मनीष त्रिपाठी, संजय चौधरी, रमन पाल, रिंकू पाल सहित अन्य मौजूद रहे।