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गर्मी के तेवर से बढ़े डायरिया के मरीज
Updated Tue, 08 May 2018 11:16 PM IST
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अपनी बारी का इंतजार करते मरीज
- फोटो : अमर उजाला
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बस्ती। गर्मी के तीखे तेवर से स्वास्थ्य बिगड़ रहा है। जिला अस्पताल व स्वास्थ्य केंद्रों के अलावा निजी अस्पतालों में भी मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अकेले जिला अस्पताल में मंगलवार को डायरिया पीड़ित 60 मरीज पहुंचे थे।
डॉक्टरों के मुताबिक सिर्फ डायरिया से पीड़ित औसतन 60 से 80 मरीज हर दिन आ रहे हैं। कहते हैं कि उल्टी-दस्त की समस्या दो दिन से अधिक बनी रहे तो सावधान हो जाएं। ऐसी स्थिति डायरिया पीड़ितों की होती है, जिससे उसकी जान को भी खतरा रहता है। गर्मी में खान-पान के कारण भी उल्टी-दस्त व पेट दर्द के मामले ज्यादा आ रहे हैं। आंतों के संक्रमण से दस्त और उल्टी होने लगती है। इसे कोलाइटिस कहते हैं। दस्त और उल्टी को तुरंत न रोका जाए तो शरीर में पानी की भारी कमी हो जाती है और डायरिया बन जाती है।
वैक्टीरियल और वायरल है डायरिया
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉक्टर डॉ. रामजी सोनी कहते हैं कि प्रतिदिन करीब 60 मरीज डायरिया के आते हैैं। बताया कि डायरिया की मुख्य वजह दूषित पेय एवं खाद्य पदार्थ होता है, जो वैक्टीरियल और वायरल दोनों होते हैं। यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी फैलता है। डायरिया के दौरान बैक्टीरिया एवं वायरस छोटी एवं बड़ी आंत के अंदरूनी दीवार पर चिपक कर वहां एलर्जी पैदा करता है। इस स्थिति में काफी ज्यादा मात्रा में पानी मल के साथ बाहर निकलने लगता है। इस स्थिति में शरीर में पानी की तेजी से कमी होने लगती है। उल्टी होने से भी शरीर में पानी कम होता है। दस्त व उल्टी होना, ठंड के साथ बुखार लगना, दस्त में रक्त पीले म्यूकस की मात्रा भी देखी जाती है। कम मात्रा में पेशाब होना मुख्य लक्षणों में है।
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घुटनों के बल चलने वाले मासूमों पर ज्यादा खतरा
शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ डा. पंकज कुमार शुक्ल बताते हैं कि डायरिया में विशेष रूप से छह माह से 24 माह के बच्चों मेें ज्यादा खतरा होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस उम्र में बच्चे घुटनों के बल चलना शुरू कर देते हैं तो साफ-सफाई रखना मुश्किल हो जाता है। साथ ही दूध में अगर सही अनुपात में जलमिश्रित न किया जाए तो भी डायरिया का खतरा बढ़ जाता है। बच्चो में हरे कलर के दस्त का होना। चिड़चिड़ा होना आदि इसके लक्षण हैं। डॉक्टर का कहना है कि ऐसी स्थिति में मरीज को तत्काल डॉक्टर के पास ले जाएं। कुछ-कुछ देर पर ओआरएस का घोल पिलाते रहना चाहिए।
सावधानी ही बेहतर उपाय
पानी को उबालने के बाद ठंडा कर ही उपयोग करें। खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों के सेवन से परहेज करें। बासी खाने का सेवन नहीं करें। पानी को ढक कर रखें। खाना-खाने से पहले हाथ धोएं। फल सब्जियों को साफ पानी से अच्छी तरह धोकर खाएं।
डॉक्टरों के मुताबिक सिर्फ डायरिया से पीड़ित औसतन 60 से 80 मरीज हर दिन आ रहे हैं। कहते हैं कि उल्टी-दस्त की समस्या दो दिन से अधिक बनी रहे तो सावधान हो जाएं। ऐसी स्थिति डायरिया पीड़ितों की होती है, जिससे उसकी जान को भी खतरा रहता है। गर्मी में खान-पान के कारण भी उल्टी-दस्त व पेट दर्द के मामले ज्यादा आ रहे हैं। आंतों के संक्रमण से दस्त और उल्टी होने लगती है। इसे कोलाइटिस कहते हैं। दस्त और उल्टी को तुरंत न रोका जाए तो शरीर में पानी की भारी कमी हो जाती है और डायरिया बन जाती है।
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वैक्टीरियल और वायरल है डायरिया
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉक्टर डॉ. रामजी सोनी कहते हैं कि प्रतिदिन करीब 60 मरीज डायरिया के आते हैैं। बताया कि डायरिया की मुख्य वजह दूषित पेय एवं खाद्य पदार्थ होता है, जो वैक्टीरियल और वायरल दोनों होते हैं। यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी फैलता है। डायरिया के दौरान बैक्टीरिया एवं वायरस छोटी एवं बड़ी आंत के अंदरूनी दीवार पर चिपक कर वहां एलर्जी पैदा करता है। इस स्थिति में काफी ज्यादा मात्रा में पानी मल के साथ बाहर निकलने लगता है। इस स्थिति में शरीर में पानी की तेजी से कमी होने लगती है। उल्टी होने से भी शरीर में पानी कम होता है। दस्त व उल्टी होना, ठंड के साथ बुखार लगना, दस्त में रक्त पीले म्यूकस की मात्रा भी देखी जाती है। कम मात्रा में पेशाब होना मुख्य लक्षणों में है।
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घुटनों के बल चलने वाले मासूमों पर ज्यादा खतरा
शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ डा. पंकज कुमार शुक्ल बताते हैं कि डायरिया में विशेष रूप से छह माह से 24 माह के बच्चों मेें ज्यादा खतरा होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस उम्र में बच्चे घुटनों के बल चलना शुरू कर देते हैं तो साफ-सफाई रखना मुश्किल हो जाता है। साथ ही दूध में अगर सही अनुपात में जलमिश्रित न किया जाए तो भी डायरिया का खतरा बढ़ जाता है। बच्चो में हरे कलर के दस्त का होना। चिड़चिड़ा होना आदि इसके लक्षण हैं। डॉक्टर का कहना है कि ऐसी स्थिति में मरीज को तत्काल डॉक्टर के पास ले जाएं। कुछ-कुछ देर पर ओआरएस का घोल पिलाते रहना चाहिए।
सावधानी ही बेहतर उपाय
पानी को उबालने के बाद ठंडा कर ही उपयोग करें। खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों के सेवन से परहेज करें। बासी खाने का सेवन नहीं करें। पानी को ढक कर रखें। खाना-खाने से पहले हाथ धोएं। फल सब्जियों को साफ पानी से अच्छी तरह धोकर खाएं।