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फर्जी डीएल प्रकरण : आरटीओ कार्यालय में सन्नाटा, बाहरी व्यक्ति भी नजर नहीं आए

Fri, 04 Sep 2026 12:15 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 04 Sep 2026 12:15 AM IST
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Fake Driving License Case: Silence at the RTO office; no outsiders seen either.
आरटीओ कार्यालय बस्ती संवाद
बस्ती। फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) प्रकरण में कार्रवाई के बाद संभागीय परिवहन कार्यालय में व्यवस्था बदली-बदली नजर आई। दो पूर्व आरआई के निलंबन और चार पूर्व आउटसोर्स वेंडरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने के बाद बृहस्पतिवार को कार्यालय परिसर में सन्नाटा पसरा रहा। आम दिनों में आवेदकों और बाहरी लोगों से गुलजार रहने वाले कार्यालय में गिने-चुने लोग ही दिखाई दिए।
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बैकलॉग एंट्री के जरिये बनाए गए फर्जी डीएल प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच में पूर्व आरआई सीमा गौतम और संजय कुमार दास को दोषी पाया गया। सीमा गौतम पहले से एक अन्य मामले में निलंबित थीं। शासन ने फर्जी डीएल मामले में भी उन्हें निलंबित कर दिया। संजय कुमार दास को भी निलंबित किया गया है। दोनों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति की गई है। इसी मामले में चार पूर्व आउटसोर्स वेंडरों की भूमिका भी सामने आई। विभाग की ओर से तहरीर देकर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
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बायोमेट्रिक कक्ष में दिखे गिने-चुने आवेदक
बृहस्पतिवार सुबह करीब 11 बजे बायोमेट्रिक कक्ष में दो से चार आवेदक ही कतार में नजर आए। क्रमवार आवेदकों का बायोमेट्रिक कराया जा रहा था। आवेदकों ने बताया कि इसके बाद ड्राइविंग टेस्ट होना है। करीब साढ़े 11 बजे तक 12 आवेदक बायोमेट्रिक करा चुके थे।
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लिपिक कक्ष में भी दो-तीन आवेदक अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे थे। कर्मचारी अपने काम में जुटे रहे। वहीं, आरआई कक्ष का दरवाजा बंद मिला। इससे कुछ आवेदकों को अपनी बात रखने में परेशानी हुई और वे लौट गए।परिसर में दो-तीन कर्मचारी ही नजर आए। टेस्टिंग ट्रैक पर भी कोई वाहन नहीं था।
आमतौर पर सक्रिय रहने वाले कथित दलाल भी परिसर में नजर नहीं आए। कई कर्मचारी बाहर खड़े होकर आपस में बातचीत करते दिखे। डीएल और फिटनेस से संबंधित कार्य होते मिले। कैली स्थित परिवहन कार्यालय में भी कमोबेश यही स्थिति रही। परमिट, टैक्स जमा कराने और वाहनों के ट्रांसफर से जुड़े कार्यों के लिए भी गिने-चुने लोग ही पहुंचे।
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ऐसे सामने आया फर्जी डीएल बनाने का तरीका
जांच में सामने आया कि दूसरे राज्यों से बैकलॉग एंट्री कराकर बस्ती में डीएल से संबंधित कार्य कराए गए। उदाहरण के तौर पर रामतीरथ मौर्य का डीएल नंबर यूपी-63-20180030028 मिर्जापुर आरटीओ का है। इसकी बैकलॉग एंट्री सेप्पा (अरुणाचल प्रदेश) से वर्ष 2018 में कराई गई और वर्ष 2026 में बस्ती में पता बदलने की रसीद काटकर डीएल से संबंधित प्रक्रिया पूरी की गई। इसी तरह मनीष यादव का डीएल नंबर यूपी-57-20170098799 पडरौना का है। इसकी बैकलॉग एंट्री भी सेप्पा से वर्ष 2017 में हुई और बस्ती में नवीनीकरण कराया गया। करण गुप्ता के डीएल नंबर यूपी-51-20200018137 की बैकलॉग एंट्री सियांग (अरुणाचल प्रदेश) से हुई और लाइसेंस बस्ती से बनवाया गया। विभाग ने सत्यापन के बाद 1017 ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित किए हैं। कई अन्य डीएल भी संदिग्ध पाए गए हैं, जिनकी जांच जारी है।

कोट
लाइसेंस, फिटनेस, ड्राइविंग ट्रैक, परमिट और वाहनों के ट्रांसफर से संबंधित कार्य नियमानुसार चल रहे हैं। बाहरी व्यक्तियों पर नजर रखी जा रही है। कार्यालय की गतिविधियों की निगरानी सीसी कैमरों से भी की जा रही है।
-फरीउद्दीन, आरटीओ, बस्ती।
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