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जिले में ग्लैंडर्स का खतरा नहीं: डॉ. जीसी द्विवेदी
Updated Fri, 16 Jun 2017 11:43 PM IST
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‘जिले में ग्लैंडर्स का खतरा नहीं’
बस्ती।
ग्लैंडर्स बीमारी से घोड़े, गधे, खच्चर, टट्टू को जिले में खतरा नहीं है। बस्ती मंडल से कुल 60 सैंपल नेशनल अनुसंधान रिसर्च सेंटर हिसार भेेजा गया था। इसमें सिर्फ संतकबीरनगर के दो सैंपल फेल हुए हैं। यह कहना है मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. जीसी द्विवेदी का।
शुक्रवार को डॉ. जीसी द्विवेदी ने बताया कि ग्लैंडर्स नामक बीमारी घोड़े, गधे, खच्चर और इसकी प्रजाति के जानवरों के लिए जानलेवा होती है लेकिन इसका खतरा जिले में नहीं है। यहां से जांच के लिए भेजे गए सैंपल में इसके लक्षण नहीं पाए गए। फिर भी विभाग इसको लेकर सतर्क है। बताया कि मंडल से कुल 60 सैंपल एनईआरसी, नेशनल अनुसंधान रिसर्च सेंटर, हिसार हरियाणा भेेजा गया था। इसमें सिद्धार्थनगर, बस्ती, संतकबीर नगर जिले से 20-20 सैंपल शामिल थे। इसमें संतकबीरनगर में दो सैंपल पॉजिटिव पाए गए। इन्हें इजेक्शन देकर मार दिया गया। सैंपल जांच के लिए हर महीने भेजा जाता है। सैंपल घोड़ा मालिक, धोबी, ईंट भट्ठों पर रहने वाले जानवरों से लिया जाता है। इसका आंकड़ा ब्लॉक के अनुसार रहता है। सभी की गणना 51 के तहत एक साथ की जाती है। बीमारी के संक्रमण मनुष्य में फैलने की आशंका को देखते हुए, अगर किसी ब्लॉक में सैंपल पॉजिटिव पाए जाते हैं। तो स्वास्थ्य विभाग की टीम को अलर्ट किया जाता है। ताकि संक्रमण को रोका जा सके। जिले में घोड़ा, खच्चर, इक्वाइन प्रजातियों की संख्या 728 है। 20 जुलाई से दोबारा गणना की जाएगी। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. जीसी द्विवेदी ने बताया कि हर महीने सीरम, ब्लड इकट्ठा करके भेजा जाता है। जो पॉजिटिव आने पर पशुओं को मार दिया जाता है। मनुष्य में बीमारी के फैलने की आशंका को देखते हुए सावधानी बरती जाती है।
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बस्ती।
ग्लैंडर्स बीमारी से घोड़े, गधे, खच्चर, टट्टू को जिले में खतरा नहीं है। बस्ती मंडल से कुल 60 सैंपल नेशनल अनुसंधान रिसर्च सेंटर हिसार भेेजा गया था। इसमें सिर्फ संतकबीरनगर के दो सैंपल फेल हुए हैं। यह कहना है मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. जीसी द्विवेदी का।
शुक्रवार को डॉ. जीसी द्विवेदी ने बताया कि ग्लैंडर्स नामक बीमारी घोड़े, गधे, खच्चर और इसकी प्रजाति के जानवरों के लिए जानलेवा होती है लेकिन इसका खतरा जिले में नहीं है। यहां से जांच के लिए भेजे गए सैंपल में इसके लक्षण नहीं पाए गए। फिर भी विभाग इसको लेकर सतर्क है। बताया कि मंडल से कुल 60 सैंपल एनईआरसी, नेशनल अनुसंधान रिसर्च सेंटर, हिसार हरियाणा भेेजा गया था। इसमें सिद्धार्थनगर, बस्ती, संतकबीर नगर जिले से 20-20 सैंपल शामिल थे। इसमें संतकबीरनगर में दो सैंपल पॉजिटिव पाए गए। इन्हें इजेक्शन देकर मार दिया गया। सैंपल जांच के लिए हर महीने भेजा जाता है। सैंपल घोड़ा मालिक, धोबी, ईंट भट्ठों पर रहने वाले जानवरों से लिया जाता है। इसका आंकड़ा ब्लॉक के अनुसार रहता है। सभी की गणना 51 के तहत एक साथ की जाती है। बीमारी के संक्रमण मनुष्य में फैलने की आशंका को देखते हुए, अगर किसी ब्लॉक में सैंपल पॉजिटिव पाए जाते हैं। तो स्वास्थ्य विभाग की टीम को अलर्ट किया जाता है। ताकि संक्रमण को रोका जा सके। जिले में घोड़ा, खच्चर, इक्वाइन प्रजातियों की संख्या 728 है। 20 जुलाई से दोबारा गणना की जाएगी। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. जीसी द्विवेदी ने बताया कि हर महीने सीरम, ब्लड इकट्ठा करके भेजा जाता है। जो पॉजिटिव आने पर पशुओं को मार दिया जाता है। मनुष्य में बीमारी के फैलने की आशंका को देखते हुए सावधानी बरती जाती है।
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