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Basti News: शिक्षा बनी कारोबार... पहली कक्षा में किताब-कॉपी पर खर्च हो रहे 10 हजार
Wed, 03 Apr 2024 12:55 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Wed, 03 Apr 2024 12:55 AM IST
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निजी विद्यालयों में एनसीईआरटी की जगह प्राइवेट पुस्तकों को किया गया अनिवार्य
आईसीएससी बोर्ड से मान्यता प्राप्त विद्यालयों में हाई प्रोफाइल हुई शिक्षा, अभिभावक परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। अब शिक्षा महंगी हो गई है। सरकार के लाख जतन के बाद भी कॉपी-किताब और ड्रेस पर खर्च होने वाली भारी भरकम रकम अभिभावकों को परेशान कर रही है। आईसीएससी बोर्ड से मान्यता प्राप्त स्कूलों में पढ़ाई पर आने वाला खर्च पूछिए मत। मध्यम वर्गीय अभिभावकों को बच्चों का पाठ्य सामग्री जुटाने में पसीना छूट जा रहा। यहां अन्य कक्षाओं की बात छोड़िए, पहली कक्षा में ही किताब-कॉपी, बैग और ड्रेस पर 10 हजार से भी अधिक का बजट बन रहा है, जिनके पास पढ़ने योग्य एक से अधिक बच्चे हैं उनकी हालत बिगड़ जा रही है।
नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो गया है। आजकल निजी स्कूलों में बच्चों के दाखिले के लिए होड़ मची हुई है। सरकारी विद्यालयों में छिटपुट की संख्या में नामांकन के लिए बच्चे आ रहे हैं। वहीं निजी विद्यालयों में बच्चों संग अभिभावकों की लाइन लग रही है। अंदर अलग-अलग काउंटर सजे हुए हैं। फीस के काउंटर भी हैं। पाठ्य सामग्री के लिए अलग काउंटर पर जाना पड़ रहा है। नियम कानून सभी ताक पर है।
अभिभावकों को आरोप है कि विद्यालय प्रबंधन का अपना नियम है। महंगी फीस और वाहन किराया ही वसूल नहीं किया जा रहा है, बल्कि इसके अलावा भी कॉपी,-किताब, बैग, बॉटल और ड्रेस के नाम पर सबसे ज्यादा रकम अभिभावकों से लिया जा रहा है। जहां यह व्यवस्था नहीं है वहां एक निर्धारित दुकान के नाम का स्लिप पकड़ाकर अभिभावकों को भेज दिया जा रहा है। एनसीईआरटी की पुस्तकों की अनिवार्यता को इन विद्यालयों में दरकिनार कर दिया गया है। महंगी दामों में मिलने वाली प्राइवेट पुस्तकों की अनिवार्यता अधिकांश स्कूलों में कर दी गई है।
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अभिभावकों का कहना है कि आम तौर पर बाजार में उपलब्ध कॉपियां भी यहां के लिए उपयोगी नहीं है। विद्यालय की ओर महंगे दर की कॉपी, बैग आदि भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। हाई प्रोफाइल विद्यालयों में नामांकन का पूरा पैकेज बनाकर दिया जा रहा है। तभी तो शहर से सटे एक आईसीएससी बोर्ड के स्कूल में दाखिला कराने आए गिदही के राजन ने बताया कि अरे साहब, मत पूछिए। यह पढ़ाई है या कारोबार.. कुछ समझ में नहीं आ रहा है। पहली कक्षा में बेटे का दाखिला कराए हैं। किताब, काॅपी, ड्रेस पर ही 10 हजार रुपये खर्च हो गए। फीस जमा करना बाकी है।
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कक्षा नौ के लिए खरीदे 8 हजार की किताबें
पिकौरा के अनिल ने बताया कि उनकी बेटी इस बार आईसीएससी बोर्ड के एक विद्यालय में कक्षा नौ में पहुंची है। केवल कॉपी-किताब पर आठ हजार रुपये विद्यालय में जमा करा लिए गए हैं। फीस देना बाकी है। बाहर से कुछ भी नहीं खरीदना है। विद्यालय प्रशासन के अनुसार ही बच्चों का ड्रेस एवं पाठ्य सामग्री खरीदनी पड़ती है। इसमें मनमाना कीमत वसूल की जाती है। मजबूरी है बच्चों को पढ़ाना है तो कहीं से इंतजाम करके देना ही पड़ेगा।
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पाठ्य सामग्री पर 50 प्रतिशत से अधिक का मुनाफा
निजी विद्यालयों में बेहतर शिक्षा देने के बहाने प्राइवेट पुस्तकें बच्चों के लिए अनिवार्य की जाती हैं। इसमें एजेंटों से सेटिंग होती है। हाईप्रोफाइल शिक्षा के नाम पर प्रत्येक पुस्तक एवं कॉपी पर अंकित मूल्य अभिभावकों से वसूल कर लिए जाते हैं। इसमें विक्रेता को 50 प्रतिशत से अधिक का मुनाफा हो रहा है। इसीलिए अधिकतर विद्यालय नामांकन के साथ पाठ्य सामग्री का भी पैकेज तैयार कर अभिभावकों को उपलब्ध करा रहे हैं। एक तरह से यह एक कारोबार का हिस्सा बन गया है।
अनुराग कुमार, शैक्षिक गतिविधियों के जानकार।
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निजी विद्यालयों की ओर से अधिक फीस या कॉपी-किताब के अधिक मूल्य लिए जाने की शिकायतें नहीं मिल रही है। यदि ऐसा है तो शिकायत मिलनी चाहिए। वैसे प्रशासन सभी अभिभावकों से बार- बार अपने बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूल में कराने के लिए अपील कर रहा है। परिषदीय विद्यालयों में मुफ्त शिक्षा की व्यवस्था है। इसका लाभ सभी को उठाना चाहिए।
-अंद्रा वामसी, डीएम
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आईसीएससी बोर्ड से मान्यता प्राप्त विद्यालयों में हाई प्रोफाइल हुई शिक्षा, अभिभावक परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। अब शिक्षा महंगी हो गई है। सरकार के लाख जतन के बाद भी कॉपी-किताब और ड्रेस पर खर्च होने वाली भारी भरकम रकम अभिभावकों को परेशान कर रही है। आईसीएससी बोर्ड से मान्यता प्राप्त स्कूलों में पढ़ाई पर आने वाला खर्च पूछिए मत। मध्यम वर्गीय अभिभावकों को बच्चों का पाठ्य सामग्री जुटाने में पसीना छूट जा रहा। यहां अन्य कक्षाओं की बात छोड़िए, पहली कक्षा में ही किताब-कॉपी, बैग और ड्रेस पर 10 हजार से भी अधिक का बजट बन रहा है, जिनके पास पढ़ने योग्य एक से अधिक बच्चे हैं उनकी हालत बिगड़ जा रही है।
नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो गया है। आजकल निजी स्कूलों में बच्चों के दाखिले के लिए होड़ मची हुई है। सरकारी विद्यालयों में छिटपुट की संख्या में नामांकन के लिए बच्चे आ रहे हैं। वहीं निजी विद्यालयों में बच्चों संग अभिभावकों की लाइन लग रही है। अंदर अलग-अलग काउंटर सजे हुए हैं। फीस के काउंटर भी हैं। पाठ्य सामग्री के लिए अलग काउंटर पर जाना पड़ रहा है। नियम कानून सभी ताक पर है।
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अभिभावकों को आरोप है कि विद्यालय प्रबंधन का अपना नियम है। महंगी फीस और वाहन किराया ही वसूल नहीं किया जा रहा है, बल्कि इसके अलावा भी कॉपी,-किताब, बैग, बॉटल और ड्रेस के नाम पर सबसे ज्यादा रकम अभिभावकों से लिया जा रहा है। जहां यह व्यवस्था नहीं है वहां एक निर्धारित दुकान के नाम का स्लिप पकड़ाकर अभिभावकों को भेज दिया जा रहा है। एनसीईआरटी की पुस्तकों की अनिवार्यता को इन विद्यालयों में दरकिनार कर दिया गया है। महंगी दामों में मिलने वाली प्राइवेट पुस्तकों की अनिवार्यता अधिकांश स्कूलों में कर दी गई है।
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अभिभावकों का कहना है कि आम तौर पर बाजार में उपलब्ध कॉपियां भी यहां के लिए उपयोगी नहीं है। विद्यालय की ओर महंगे दर की कॉपी, बैग आदि भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। हाई प्रोफाइल विद्यालयों में नामांकन का पूरा पैकेज बनाकर दिया जा रहा है। तभी तो शहर से सटे एक आईसीएससी बोर्ड के स्कूल में दाखिला कराने आए गिदही के राजन ने बताया कि अरे साहब, मत पूछिए। यह पढ़ाई है या कारोबार.. कुछ समझ में नहीं आ रहा है। पहली कक्षा में बेटे का दाखिला कराए हैं। किताब, काॅपी, ड्रेस पर ही 10 हजार रुपये खर्च हो गए। फीस जमा करना बाकी है।
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कक्षा नौ के लिए खरीदे 8 हजार की किताबें
पिकौरा के अनिल ने बताया कि उनकी बेटी इस बार आईसीएससी बोर्ड के एक विद्यालय में कक्षा नौ में पहुंची है। केवल कॉपी-किताब पर आठ हजार रुपये विद्यालय में जमा करा लिए गए हैं। फीस देना बाकी है। बाहर से कुछ भी नहीं खरीदना है। विद्यालय प्रशासन के अनुसार ही बच्चों का ड्रेस एवं पाठ्य सामग्री खरीदनी पड़ती है। इसमें मनमाना कीमत वसूल की जाती है। मजबूरी है बच्चों को पढ़ाना है तो कहीं से इंतजाम करके देना ही पड़ेगा।
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पाठ्य सामग्री पर 50 प्रतिशत से अधिक का मुनाफा
निजी विद्यालयों में बेहतर शिक्षा देने के बहाने प्राइवेट पुस्तकें बच्चों के लिए अनिवार्य की जाती हैं। इसमें एजेंटों से सेटिंग होती है। हाईप्रोफाइल शिक्षा के नाम पर प्रत्येक पुस्तक एवं कॉपी पर अंकित मूल्य अभिभावकों से वसूल कर लिए जाते हैं। इसमें विक्रेता को 50 प्रतिशत से अधिक का मुनाफा हो रहा है। इसीलिए अधिकतर विद्यालय नामांकन के साथ पाठ्य सामग्री का भी पैकेज तैयार कर अभिभावकों को उपलब्ध करा रहे हैं। एक तरह से यह एक कारोबार का हिस्सा बन गया है।
अनुराग कुमार, शैक्षिक गतिविधियों के जानकार।
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निजी विद्यालयों की ओर से अधिक फीस या कॉपी-किताब के अधिक मूल्य लिए जाने की शिकायतें नहीं मिल रही है। यदि ऐसा है तो शिकायत मिलनी चाहिए। वैसे प्रशासन सभी अभिभावकों से बार- बार अपने बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूल में कराने के लिए अपील कर रहा है। परिषदीय विद्यालयों में मुफ्त शिक्षा की व्यवस्था है। इसका लाभ सभी को उठाना चाहिए।
-अंद्रा वामसी, डीएम