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आज से आपके पास रहेंगे पितर.. सुख-शांति के लिए करें अर्पण-तर्पण

Wed, 02 Sep 2020 02:11 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 02 Sep 2020 02:11 AM IST
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You will have ancestors from today .. Offer for peace and peace
तर्पण - फोटो : अमर उजाला

बुधवार से शुरू होकर 17 सितंबर तक चलेगा पितृ पक्ष, शुभ कार्य करना रहेगा वर्जित
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अकाल मृत्यु आत्महत्या करने वाले व्यक्ति का श्राद्ध चतुर्दशी को करना श्रेष्ठ

बरेली। बुधवार से शुरू हो रहा पितृ पक्ष 17 सितंबर तक चलेगा। पौराणिक मान्यता के अनुसार 16 दिन के पितृ पक्ष के दौरान पितृ अपने वंशजों के निकट रहकर उनका तर्पण-अर्पण स्वीकार करेंगे। माना जाता है कि यदि पितृ नाराज हो जाएं तो व्यक्ति का जीवन परेशानियों और समस्याओं से घिर जाता है। ऐसे में पूर्वजों को प्रसन्न करने के लिए पितृ पक्ष में श्राद्ध करना आवश्यक होता है।
श्राद्धों के जरिये पितरों को भोजन पहुंचाया जाता है। पिंड दान और तर्पण करके उनसे सुख, शांति, यश और वैभव की कामना की जाती है। हिंदू पंचांग के अनुसार पितृ पक्ष आश्विन महीने के कृष्ण पक्ष में होता है। इसका समापन अमावस्या को होता है। आमतौर पर पितृपक्ष 16 दिन का होता है। इस साल पितृ पक्ष दो सितंबर से शुरू होकर 17 सितंबर तक चलेगा। पितृ पक्ष में जल में दूध, जौ, चावल और गंगाजल मिलाकर सूर्य देव को तर्पण किया जाता है।
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पितृपक्ष का जीवन में महत्व

हिंदू धर्म में पितृपक्ष का विशेष महत्व है। मृत्यु के बाद श्राद्ध किया जाना बेहद जरूरी माना गया है। यह भी माना जाता है कि यदि श्राद्ध न किया जाए तो मरने वाले व्यक्ति की आत्मा को शांति नहीं मिलती है। श्राद्ध करने से पितृ प्रसन्न होते हैं। श्राद्ध पक्ष में वे अपने वंशजों के निकट रहते हैं। इस दौरान यदि श्राद्ध न किया जाए तो पितृ दुखी और नाराज हो जाते हैं।
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पितृपक्ष में किस दिन करें श्राद्ध

दिवंगत पितृ की मृत्यु की तिथि में ही श्राद्ध किया जाता है। यदि किसी की मृत्यु प्रतिपदा के दिन हुई है तो उनका श्राद्ध प्रतिपदा के ही दिन किया जाएगा। आमतौर पर इसी तरह से श्राद्ध की तिथियों का चयन किया जाता है। यदि किसी की अकाल मृत्यु, आत्महत्या या दुर्घटना में होती है, तो उनका श्राद्ध चतुर्दशी के दिन होता है। मृत्यु की तिथि का भान न होने पर पिता का श्राद्ध अष्टमी और मां का नवमी को किया जाता है। सन्यासी का श्राद्ध द्वादशी को करने का विधान है।

पितृपक्ष में क्या न करें

विशेष पूजा, अनुष्ठान, तेल लगाना, पान खाना निषिद्ध रहता है। चटख रंग के फूलों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। चना, मसूर, काला नमक, बैंगन, हींग, लहसुन और प्याज नहीं खाना चाहिए। नए कपड़े, घर, गहने और कीमती सामान नहीं खरीदना चाहिए।

श्राद्धों में कोई भी शुभ काम नहीं करना चाहिए। ऐसे कामों का फल नहीं मिलता है। श्राद्ध पक्ष में यमराज पितरों को अपने वंशजों से मिलने के लिए मुक्त कर देते हैं। - पंडित राजेंद्र तिवारी, भागवताचार्य

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