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खुद को हिंदी का अध्येता बताते गर्व महसूस करना होगा

Thu, 03 Sep 2020 01:40 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 03 Sep 2020 01:40 AM IST
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You have to feel proud to call yourself a Fellow of Hindi
हिंदी हैं हम - फोटो : Amar Ujala

हिंदी हैं हम के अमर उजाला अभियान पर बोले जिले के अधिकारी और कवि

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बरेली। खुद को हिंदी का अध्येता बताते हुए हमें खुद पर गर्व करना होगा। यह कहना है जिले के अधिकारी वर्ग का वहीं हिंदी कवि ने इस मुहिम से जुड़ते हुए कहा कि हम चाहते हैं कि हिंदी निर्विवाद रूप से गूंजे इसके लिए हमें और सरकार को आगे आना होगा और इसे राजभाषा बनाना होगा।
संयुक्त शिक्षा निदेशक (जेडी) प्रदीप कुमार कहते हैं कि हिंदी मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से प्राण वायु की तरह रही है। अकादमिक कैरियर में हिंदी विषय न होते हुए भी मैंने प्रतियोगी परीक्षाओं में वैकल्पिक विषय के रूप में हिंदी को चुना और आज मैं जिस मुकाम पर हूं, उसका श्रेय हिंदी और केवल हिंदी साहित्य को जाता है। हिंदी में अपार संभावनाएं हैं और हिंदी के बल पर बड़ी से बड़ी सफलताएं प्राप्त की जा सकती हैं। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी ने कई दशक पूर्व विदेश मंत्री रहते हुए संयुक्त राष्ट्र संघ में हिंदी में भाषण देकर पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ आकृष्ट किया था और देश भर में वह सब के मानस पटल पर छा गए थे। कहा कि हम सभी हिंदी को आत्मसात करें, हिंदी साहित्य के संवर्धन में पूरे मनोयोग से योगदान करें और गर्व से कहें कि वह हिंदी के अध्येता हैं।
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वहीं कवि इंद्र देव त्रिवेदी कहते हैं कि हिंदी के प्रति अंतर्मन में आदर भाव हो, तभी हिंदी सार्थक है। आज हिंदी भारत और विदेश दोनों जगह अपना ध्वज फहरा रही है। स्वाभाविक प्रश्न उठता है कि इतनी बड़ी संख्या में हिंदी भाषी और हिंदी प्रेमी लोग मौजूद हैं फिर भी हिंदी को सर्वमान्य भाषा घोषित करने में हिचक क्यों है? हिंदी के लिए यदि हमारा अंतर्मन इसकी स्वीकार्यता के प्रति और अधिक समर्पित हो जाए तो हिंदी की सार्थकता स्वयमेव सिद्ध हो जाएगी। हिंदी की अनिवार्यता से हिंदी के प्रति आदरभाव और भी विकसित होगा। यदि हम चाहते हैं कि हिंदी की जय जय जयकार एक दिन निर्विवाद रूप से गूंजे तो सरकार को आगे आकर इसे राजभाषा का दर्जा देना होगा।
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