फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Yogi will decide on rubber factory land

योगी करेंगे रबर फैक्ट्री जमीन पर फैसला

Sat, 16 Sep 2017 01:08 AM IST
बरेली।
बरेली। Updated Sat, 16 Sep 2017 01:08 AM IST
विज्ञापन
Yogi will decide on rubber factory land
रबर पऊफ्रैक्‍टट्री

विज्ञापन
रबर फैक्ट्री की अरबों रुपये की जमीन वापस लेने के लिए डीएम राघवेंद्र विक्रम सिंह ने प्रमुख सचिव उद्योग विभाग को स्टेटस रिपोर्ट भेज दी है। प्रमुख सचिव को भी इससे अवगत करा दिया है। बताया जा रहा है कि यह मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ की भी जानकारी में है। जल्द योगी ही रबर फैक्ट्री की जमीन के संबंध में फैसला लेंगे।
रबर फैक्ट्री की बेशकीमती जमीन से प्रशासन बेखबर था। हालांकि वह चाहता तो इस जमीन को 20 साल पहले ही वापस ले सकता था। हाल ही में बरेली की डीएम रहीं डॉ. पिंकी जोवल ने रबर फैक्ट्री की जमीन का स्टेटस पता करने के लिए तत्कालीन एडीएम एफआर मनोज कुमार को आदेश जारी किए थे। एडीएम ने जमीन के कागज मंगाकर देखे तो सारी हकीकत सामने आ गई। शासन ने रबर फैक्ट्री के लिए फतेहगंज पश्चिमी में हाईवे किनारे 1370 एकड़ जमीन देते समय यह शर्त रखी थी कि फैक्ट्री बंद होते ही यह वापस ले ली जाएगी। 
विज्ञापन

सेठ तुलसीदास किला चंद के परिवार ने 15 जुलाई 1999 को जैसे ही रबर फैक्ट्री में ताले डाले थे, तभी इस जमीन को शर्तों के मुताबिक वापस लिया जा सकता था लेकिन किसी ने इसकी गहराई में जाने की कोशिश ही नहीं की। प्रशासन से अधिकारियों ने उसी समय जमीन वापस ले ली होती तो बीस साल पहले ही रबर फैक्ट्री की बेशकीमती जमीन पर बड़ा प्रोजेक्ट आ सकता था। एडीएम ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया था कि रबर फैक्ट्री के इलाके में से ही 1985 में आईटीबीपी को 200 एकड़ जमीन इसी शर्त पर दी गई थी। उनके तबादले के बाद आए डीएम राघवेंद्र विक्रम सिंह ने रबर फैक्ट्री की जमीन को लेकर गंभीरता लेकर इसकी स्टेटस रिपोर्ट उद्योग विभाग को दी है। मामला मुख्यमंत्री और प्रमुख सचिव के भी संज्ञान में है।
विज्ञापन
विज्ञापन


प्राधिकरण में भी अधिवक्ता करेंगे पैरवी
डीएम राघवेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि सेठ तुलसीदास किला चंद ने जिन वित्तीय संस्थानों से फैक्ट्री लगाने के लिए ऋण लिया है, उनका जमीन से कोई लेना देना नहीं है। बकाया की देनदारी के लिए उनका परिवार जिम्मेदार है। मुंबई की अदालत ने इसके लिए वित्तीय संस्थानों का मामला ऋण माफी प्राधिकरण को सौंप दिया है। हमने सरकार से अनुरोध किया है कि वहां अपना अधिवक्ता पैरवी के लिए लगाया जाएगा। ताकि आगे जमीन वापसी में कोई दिक्कत ही नहीं होने पाए।    
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed