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पोषण ट्रैकर रिपोर्ट: बरेली में पांच साल तक के 74 हजार बच्चों का कद सामान्य से कम, जानिए क्या है वजह
Thu, 16 Apr 2026 05:08 PM IST
बरेली ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
Published by: बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 16 Apr 2026 05:08 PM IST
सार
पोषण ट्रैकर की रिपोर्ट के अनुसार, बरेली में शून्य से पांच वर्ष तक के 74 हजार बच्चों की लंबाई उम्र के सापेक्ष कम पाई गई है। कल 2.69 लाख बच्चों की जांच में यह आंकड़ा सामने आया।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : AI
विस्तार
पौष्टिक आहार, शारीरिक क्रिया, आनुवांशिक या अन्य समस्या... वजह कोई हो पर शून्य से पांच वर्ष तक के हजारों बच्चों की लंबाई उम्र के सापेक्ष नहीं बढ़ रही। बरेली में पोषण ट्रैकर की चौंकाने वाली रिपोर्ट में 2.70 लाख बच्चों की जांच में 74 हजार की लंबाई कम मिली है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी मनोज कुमार के मुताबिक, बच्चों की लंबाई कम होने के कई कारक होते हैं। सबसे अहम गर्भावस्था के दौरान मां को उचित पौष्टिक आहार की कमी, एनीमिया या अन्य शारीरिक समस्या होती है। इससे जन्म के दौरान ही तमाम बच्चों का वजन और लंबाई कम होती है।
इससे बचाव के लिए आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ता गर्भवती की जांच, पौष्टिक आहार, नियमित जांच कराती हैं। सीएचसी, पीएचसी, वीएचएसएनडी पर निशुल्क परामर्श, इलाज, टीकाकरण होता है। फिर भी कई परिवार इन जांच और परामर्श को अपनाने में अनदेखी करते हैं।
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फिर भी जो बच्चे बेहद कमजोर होते हैं, उन्हें निशुल्क एसएनसीयू में रखते हैं। डिस्चार्ज के बाद जच्चा-बच्चा की निगरानी होती है, ताकि मां और बच्चा दोनों स्वस्थ रहें। बताया कि शून्य से पांच वर्ष की आयु के अल्प वजन और लंबाई कम होने की संख्या प्रदेश के कई जिलों से कम है।
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जिला कार्यक्रम अधिकारी मनोज कुमार के मुताबिक, बच्चों की लंबाई कम होने के कई कारक होते हैं। सबसे अहम गर्भावस्था के दौरान मां को उचित पौष्टिक आहार की कमी, एनीमिया या अन्य शारीरिक समस्या होती है। इससे जन्म के दौरान ही तमाम बच्चों का वजन और लंबाई कम होती है।
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इससे बचाव के लिए आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ता गर्भवती की जांच, पौष्टिक आहार, नियमित जांच कराती हैं। सीएचसी, पीएचसी, वीएचएसएनडी पर निशुल्क परामर्श, इलाज, टीकाकरण होता है। फिर भी कई परिवार इन जांच और परामर्श को अपनाने में अनदेखी करते हैं।
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फिर भी जो बच्चे बेहद कमजोर होते हैं, उन्हें निशुल्क एसएनसीयू में रखते हैं। डिस्चार्ज के बाद जच्चा-बच्चा की निगरानी होती है, ताकि मां और बच्चा दोनों स्वस्थ रहें। बताया कि शून्य से पांच वर्ष की आयु के अल्प वजन और लंबाई कम होने की संख्या प्रदेश के कई जिलों से कम है।
शहर में सबसे कम, नवाबगंज में सर्वाधिक बौने बच्चे
रिपोर्ट के अनुसार बरेली शहर में सबसे कम 1,225 जबकि नवाबगंज में सर्वाधिक 8,551 बच्चों की लंबाई सामान्य से कम मिली। क्रमवार शेरगढ़ में 6,217, भुता और फरीदपुर में 6,120, आलमपुर जाफराबाद में 5,929, फतेहगंज पश्चिमी में 5,416, मीरगंज में 5,320, दमखोदा में 5,022, बहेड़ी में 4,829, बिथरी चैनपुर में 4,681, मझगवां में 3,981, रामनगर में 3,530, भोजीपुरा में 2,862, क्यारा में 2,312, भदपुरा में 1,829 बच्चों की लंबाई कम मिली।
रिपोर्ट के अनुसार बरेली शहर में सबसे कम 1,225 जबकि नवाबगंज में सर्वाधिक 8,551 बच्चों की लंबाई सामान्य से कम मिली। क्रमवार शेरगढ़ में 6,217, भुता और फरीदपुर में 6,120, आलमपुर जाफराबाद में 5,929, फतेहगंज पश्चिमी में 5,416, मीरगंज में 5,320, दमखोदा में 5,022, बहेड़ी में 4,829, बिथरी चैनपुर में 4,681, मझगवां में 3,981, रामनगर में 3,530, भोजीपुरा में 2,862, क्यारा में 2,312, भदपुरा में 1,829 बच्चों की लंबाई कम मिली।
पांच साल तक के बच्चों का वजन, लंबाई के मानक
स्वास्थ्य मंत्रालय के मानकों के तहत बच्चों का वजन उम्र और लिंग के अनुसार अलग होता है। एक वर्ष के लड़के का वजन 10.2 किलो, लड़की का 9.5 किलो होना चाहिए। दो से पांच वर्ष में लड़के का वजन 12.3 से 16 किलो और लड़की का 12 से 15 किलो, तीन से पांच वर्ष में लड़के का 14 से 17 किलो, लड़की का 14 से 16 किलो तक होना चाहिए। लंबाई उम्र, लिंग, आनुवांशिकता के आधार पर अलग होती है। नवजात शिशु की औसत लंबाई 18-22 इंच, एक वर्ष की उम्र तक 28-30 इंच, दो वर्ष तक 32-36 इंच, पांच वर्ष तक लंबाई 39-43 इंच तक होनी चाहिए।
स्वास्थ्य मंत्रालय के मानकों के तहत बच्चों का वजन उम्र और लिंग के अनुसार अलग होता है। एक वर्ष के लड़के का वजन 10.2 किलो, लड़की का 9.5 किलो होना चाहिए। दो से पांच वर्ष में लड़के का वजन 12.3 से 16 किलो और लड़की का 12 से 15 किलो, तीन से पांच वर्ष में लड़के का 14 से 17 किलो, लड़की का 14 से 16 किलो तक होना चाहिए। लंबाई उम्र, लिंग, आनुवांशिकता के आधार पर अलग होती है। नवजात शिशु की औसत लंबाई 18-22 इंच, एक वर्ष की उम्र तक 28-30 इंच, दो वर्ष तक 32-36 इंच, पांच वर्ष तक लंबाई 39-43 इंच तक होनी चाहिए।
गर्मी शुरू होते ही एनआरसी में भर्ती हो रहे बच्चे, बेड फुल
जिला अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) के बेड अब भरने लगे हैं। प्रभारी डॉ. अजय सिंह के मुताबिक आरबीएसके, वीएचएसएनडी से पिछले सप्ताह से अतिकुपोषित बच्चों के भर्ती होने की संख्या बढ़ी है। पूर्व में नारी निकेतन से दो बच्चियां भर्ती हुई थीं। स्वस्थ होने पर डिस्चार्ज कर दिया गया। बताया कि केंद्र में अतिकुपोषित बच्चों को 14 दिन तक भर्ती करके विशेष देखभाल और पौष्टिक आहार दिया जाता है। बच्चे के वजन में 15 फीसदी तक वृद्धि और स्वास्थ्य में सुधार की पुष्टि पर डिस्चार्ज किया जाता है।
जिला अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) के बेड अब भरने लगे हैं। प्रभारी डॉ. अजय सिंह के मुताबिक आरबीएसके, वीएचएसएनडी से पिछले सप्ताह से अतिकुपोषित बच्चों के भर्ती होने की संख्या बढ़ी है। पूर्व में नारी निकेतन से दो बच्चियां भर्ती हुई थीं। स्वस्थ होने पर डिस्चार्ज कर दिया गया। बताया कि केंद्र में अतिकुपोषित बच्चों को 14 दिन तक भर्ती करके विशेष देखभाल और पौष्टिक आहार दिया जाता है। बच्चे के वजन में 15 फीसदी तक वृद्धि और स्वास्थ्य में सुधार की पुष्टि पर डिस्चार्ज किया जाता है।