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विश्व मधुमेह दिवस- मधुमेह से डरे नहीं, संतुलित खानपान, नियमित व्यायाम से पाएं निजात
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- फोटो : pixa
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बरेली। साइलेंट किलर यानी डायबिटीज की बीमारी लगातार बढ़ रही है। आलम यह है वर्तमान में हर पांचवां व्यक्ति इस रोग से ग्रसित है। खराब खानपान, अनियमित दिनचर्या और शारीरिक श्रम की कमी के कारण दुनिया भर में मधुमेह रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। विशेषज्ञ कहते हैं कि मधुमेह से डरें नहीं बल्कि शारीरिक श्रम, संतुलित आहार और नियमित योग से इससे मुक्ति पाई जा सकती है।
आज विश्व भर मेें सर फेडरिक बैंटिग के जन्मदिवस पर मधुमेह यानी डायबिटीज दिवस मनाया जा रहा है। उन्होंने ही इस बीमारी की खोज की थी। 1991 से विश्व स्वास्थ्य संगठन ने लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से 14 नवंबर का दिन विश्व मधुमेह दिवस मनाने के लिए निर्धारित किया। पूरे विश्व में 140 देश इस दिन को मनाते हैं। जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. वागीश वैश्य ने बताया कि इस बीमारी में रक्त में ग्लूकोज का स्तर सामान्य से अधिक बढ़ जाता है। रक्त कोशिकाएं इस शर्करा को उपयोग नहीं कर पाती। यदि ग्लूकोज का बढ़ा लेवल खून में लगातार बना रहे तो शरीर के अंगों को नुकसान पहुंचाना शुरू कर देता है, इसलिए डायबिटीज को समझना बहुत जरूरी है। नियमित पैदल घूमना, शारीरिक श्रम, योगासन और प्राणायम से मधुमेह में लाभ मिलता है। फिजीशियन डॉ. वीके धसमाना के अनुसार आहार और शरीर के वजन पर नियंत्रण रखकर भी डायबिटीज को नियंत्रित रखा जा सकता है। अगर डायबिटीज पर ठीक से नियंत्रण न रखा जाए तो मरीज में हार्ट, किडनी, आंखें, पैर और नर्र्वस सिस्टम संबंधी कई तरह की बीमारियां बढ़ जाती है।
डायबिटीज के प्रकार-
टाइप-1
इस श्रेणी की डायबिटीज में अग्नाशय बहुत कम इंसुलिन बनाता है या नहीं भी बनाता है। डायबिटीज के तकरीबन 10 फीसदी मामले इसी श्रेणी के होते हैं।
टाइप-2
इसमें अग्नाशय में आइलेट कोशिकाओं के विघटन के कारण इंसुलिन की पूरी तरह कमी हो जाती है। दुनिया भर में डायबिटीज के 90 फ ीसदी मामले इसी प्रकार के हैं।
गैस्टेशनल या गर्भकालीन मधुमेह
डायबिटीज का यह तीसरा प्रकार गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को होता है। इसमें खून में शर्करा की मात्रा अधिक हो जाती है। सावधानी न रखने पर इसके टाइप-2 डायबिटीज में बदलने की आशंका रहती है।
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25 साल में 64 फीसदी बढ़े मधुमेह के रोगी
डायबिटीज देश में तेजी से बढ़ने वाली बीमारियों में से एक है। एक शोध के मुताबिक, 25 साल में इस बीमारी के मामलों में 64 प्रतिशत इजाफा हुआ है। आने वाले छह बरसों में देश में इस बीमारी के मरीजों की संख्या 13.5 करोड़ से ज्यादा हो सकती है, जो वर्ष 2017 में 7.2 करोड़ थी। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च, इंस्टीट्यूट फ ॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड एवेल्यूएशन और पब्लिक हेल्थ फ ाउंडेशन ऑफ इंडिया की नवंबर 2017 की रिपोर्ट के मुताबिक 25 बरस में भारत में डायबिटीज के 64 फीसदी रोगी बढ़े हैं।
डायाबिटीज होने के कारण
उच्च रक्त चाप, अनुवंशिक, इंसुलिन की कमी, उच्च कोलेस्ट्रॉल, सही खानपान न होना, तनाव, शारीरिक काम की कमी, ड्रग्स, स्मोकिंगआदि।
डायाबिटिज के लक्षण
अधिक भूख लगना। अधिक नींद आना, प्यास ज्यादा लगना। बार-बार पेशाब आना, किसी घाव को भरने में अधिक समय लगना, शरीर के कुछ भागों का सुन्न होना या झनझनाहट महसूस होना, आंखों से कम दिखाई देना, जल्दी थकान होना, अचानक वजन कम होना आदि
मधुमेह में ध्यान रखने योग्य बातें
उचित समयांतराल में डाइबिटीज़ की जांच कराएं। डाइटीशियन डॉ. रोजी बताती हैं कि खाने की रोज़मर्रा की आदतों में बदलाव लाएं। जैसे शक्कर न लें, टुकड़ों में कम भोजन लें। दिनचर्या की एक उचित समय सारणी बनाएं और उसका पालन करें। पर्याप्त 6-7 घंटे की नींद और संतुलित आहार लें। वसा न लें। वजन का ध्यान रखें। मॉर्निंग वॉक और योग को दिनचर्या में शामिल करें। नीम हकीम की बातों में आकर इलाज न कराएं।
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आज विश्व भर मेें सर फेडरिक बैंटिग के जन्मदिवस पर मधुमेह यानी डायबिटीज दिवस मनाया जा रहा है। उन्होंने ही इस बीमारी की खोज की थी। 1991 से विश्व स्वास्थ्य संगठन ने लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से 14 नवंबर का दिन विश्व मधुमेह दिवस मनाने के लिए निर्धारित किया। पूरे विश्व में 140 देश इस दिन को मनाते हैं। जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. वागीश वैश्य ने बताया कि इस बीमारी में रक्त में ग्लूकोज का स्तर सामान्य से अधिक बढ़ जाता है। रक्त कोशिकाएं इस शर्करा को उपयोग नहीं कर पाती। यदि ग्लूकोज का बढ़ा लेवल खून में लगातार बना रहे तो शरीर के अंगों को नुकसान पहुंचाना शुरू कर देता है, इसलिए डायबिटीज को समझना बहुत जरूरी है। नियमित पैदल घूमना, शारीरिक श्रम, योगासन और प्राणायम से मधुमेह में लाभ मिलता है। फिजीशियन डॉ. वीके धसमाना के अनुसार आहार और शरीर के वजन पर नियंत्रण रखकर भी डायबिटीज को नियंत्रित रखा जा सकता है। अगर डायबिटीज पर ठीक से नियंत्रण न रखा जाए तो मरीज में हार्ट, किडनी, आंखें, पैर और नर्र्वस सिस्टम संबंधी कई तरह की बीमारियां बढ़ जाती है।
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डायबिटीज के प्रकार-
टाइप-1
इस श्रेणी की डायबिटीज में अग्नाशय बहुत कम इंसुलिन बनाता है या नहीं भी बनाता है। डायबिटीज के तकरीबन 10 फीसदी मामले इसी श्रेणी के होते हैं।
टाइप-2
इसमें अग्नाशय में आइलेट कोशिकाओं के विघटन के कारण इंसुलिन की पूरी तरह कमी हो जाती है। दुनिया भर में डायबिटीज के 90 फ ीसदी मामले इसी प्रकार के हैं।
गैस्टेशनल या गर्भकालीन मधुमेह
डायबिटीज का यह तीसरा प्रकार गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को होता है। इसमें खून में शर्करा की मात्रा अधिक हो जाती है। सावधानी न रखने पर इसके टाइप-2 डायबिटीज में बदलने की आशंका रहती है।
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25 साल में 64 फीसदी बढ़े मधुमेह के रोगी
डायबिटीज देश में तेजी से बढ़ने वाली बीमारियों में से एक है। एक शोध के मुताबिक, 25 साल में इस बीमारी के मामलों में 64 प्रतिशत इजाफा हुआ है। आने वाले छह बरसों में देश में इस बीमारी के मरीजों की संख्या 13.5 करोड़ से ज्यादा हो सकती है, जो वर्ष 2017 में 7.2 करोड़ थी। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च, इंस्टीट्यूट फ ॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड एवेल्यूएशन और पब्लिक हेल्थ फ ाउंडेशन ऑफ इंडिया की नवंबर 2017 की रिपोर्ट के मुताबिक 25 बरस में भारत में डायबिटीज के 64 फीसदी रोगी बढ़े हैं।
डायाबिटीज होने के कारण
उच्च रक्त चाप, अनुवंशिक, इंसुलिन की कमी, उच्च कोलेस्ट्रॉल, सही खानपान न होना, तनाव, शारीरिक काम की कमी, ड्रग्स, स्मोकिंगआदि।
डायाबिटिज के लक्षण
अधिक भूख लगना। अधिक नींद आना, प्यास ज्यादा लगना। बार-बार पेशाब आना, किसी घाव को भरने में अधिक समय लगना, शरीर के कुछ भागों का सुन्न होना या झनझनाहट महसूस होना, आंखों से कम दिखाई देना, जल्दी थकान होना, अचानक वजन कम होना आदि
मधुमेह में ध्यान रखने योग्य बातें
उचित समयांतराल में डाइबिटीज़ की जांच कराएं। डाइटीशियन डॉ. रोजी बताती हैं कि खाने की रोज़मर्रा की आदतों में बदलाव लाएं। जैसे शक्कर न लें, टुकड़ों में कम भोजन लें। दिनचर्या की एक उचित समय सारणी बनाएं और उसका पालन करें। पर्याप्त 6-7 घंटे की नींद और संतुलित आहार लें। वसा न लें। वजन का ध्यान रखें। मॉर्निंग वॉक और योग को दिनचर्या में शामिल करें। नीम हकीम की बातों में आकर इलाज न कराएं।