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आईवीआरआई में चैलेंजेज एंड थ्रेट्स ऑफ

Fri, 07 Feb 2020 01:54 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 07 Feb 2020 01:54 AM IST
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workshop on infection diseases in ivri
बरेली। आईवीआरआई में गुरुवार को इंडियन एसोसिएशन ऑफ वेटनरी माइक्रोबॉयोलॉजिस्ट्स इम्यूनो-लॉजिस्ट्स एंड स्पेशलिस्ट्स इन इंफेक्शंस डिजीजेज (आईएवीएमआई) के 33वें वार्षिक सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस पर चैलेंजेज एंड थ्रेट्स ऑफ माइक्रोब्स टू एनीमल्स एंड ह्यूमेंस विषय पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें जुटे विशेषज्ञों ने कोरोना वायरस पर चिंता जाहिर की। कहा- फिलहाल इसका कोई इलाज नहीं है, लेकिन सतर्कता से इससे बचा जा सकता है। किसी से मिलें तो हाथ न मिलाएं, नमस्कार करें।
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मुख्य अतिथि लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा, पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, हिसार के कुलपति डॉ. गुरदयाल सिंह ने कहा कि भारत सरकार पशुपालन के क्षेत्र के विकास के लिए भारी धनराशि आवंटित करती है, लेकिन पशुओं के रोगों पर अनुसंधान का दायरा सीमित है। अब पशुओं के विभिन्न रोगों के खिलाफ संयुक्त टीके की आवश्यकता है। कोरोना वायरस पर कहा कि फिलहाल इसका कोई इलाज नहीं है, लेकिन सतर्कता से इससे बचा जा सकता है। संस्थान निदेशक डॉ. राजकुमार सिंह ने विश्व की चिंता का केंद्र बने कोरोना वायरस के प्रसार के लिए पर्यावरण में हो रहे बदलावों को महत्वपूर्ण कारक बताया। कहा, इस तरह के रोगों के नियंत्रण के लिए वर्तमान में प्रभावित रोगियों के रक्त के नमूनों का विश्लेषण सुलभ साधन हो सकता है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के सहायक महानिदेशक (पशु स्वास्थ्य) ने कहा कि पिछले एक दशक में कई घातक विषाणु रोग जैसे सार्स, निपा, कोरोना आदि का संक्रमण मानव जाति में हुआ है। आज हमें इन रोगों को वैश्विक रूप से समझने की आवश्यकता है। इस मौके पर शेरे-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. नागेंद्र शर्मा, पंजाब सरकार के पूर्व पशुपालन सलाहकार प्रोफेसर पीके उप्पल, डॉ. एके तिवारी, बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय पटना के कुलपति डॉ. रामेश्वर सिंह समेत अन्य आदि मौजूद रहे।
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भोजन में दही, छाछ करें शामिल
बरेली। समारोह में हिस्सा लेने आए दिल्ली के राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के प्रोफेसर डॉ. बीएल शेरवाल ने कहा कि कोरोना ही नहीं कई तरह के मामूली फ्लू से भी बचने का सबसे बेहतर तरीका है शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना। भोजन में दही और छाछ को नियमित रूप से शामिल करके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। दही, छाछ में मौजूद बैक्टीरिया तमाम उन बैक्टीरिया को मारेंगे जो हमारे शरीर के लिए नुकसानदेह हैं। संक्रमण से बचना है तो लगातार बीस सेकेंड तक साबुन से हाथ धोएं। ऐसा करने से किसी भी तरह के संक्रमण से बचा जा सकता है। कोरोना समेत अन्य संक्रमित बीमारियों से बचाव के लिए हाथ मिलाने से परहेज करें। एक-दूसरे से मिलने पर हाथ जोड़कर नमस्कार करें।
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