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महिला हेल्प डेस्क: पीड़ितों से अब सलीके से बात
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- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
शीशे के केबिन में कंप्यूटर पर दर्ज होंगी शिकायतें, पीड़ितों को दिया जाएगा टोकन नंबर
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हिंदी-अंग्रेजी बोलने में सक्षम महिला पुलिसकर्मी होंगी तैनात, दिया जाएगा प्रशिक्षण
बरेली। पुलिस की महिला हेल्प डेस्क और आगंतुक कक्ष को औपचारिकता के दायरे से बाहर निकालने की तैयारी है। डीजीपी की ओर से जारी गाइड लाइन के मुताबिक पूरी तरह कंप्यूटराइज्ड हेल्प डेस्क और आगंतुक कक्ष शीशे के पारदर्शी केबिन में बनाया जाएगा और उन्हीं महिला सिपाहियों को यहां तैनाती दी जाएगी जो हिंदी के साथ अंग्रेजी में भी बात करने में सक्षम होंगी। उन्हें इसके लिए मेरठ की पुलिस लैंग्वेज लैब में भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। पीड़ितों से बातचीत और समस्याओं के निस्तारण पर जवाबदेही भी तय होगी।
महिला हेल्प डेस्क एवं आगंतुक कक्ष के नाम पर अब सिर्फ बैनर लगाकर और एक मेज व दो कुर्सी रखकर औपचारिकता नहीं निभाई जाएगी। निर्देश है कि इसके लिए ऐसा अलग कक्ष आवंटित किया जाए जिसमें कंप्यूटर, टेलीफोन, मोबाइल के साथ कैमरे भी लगे हों। महिला हेल्प डेस्क और आगंतुक कक्ष में दो महिला सिपाही तैनात की जाएंगी जिन्हें अंग्रेजी भाषा का भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। आगंतुकों और पीड़िताओं से बात करने की ट्रेनिंग देने के लिए उन्हें मेरठ की पुलिस प्रशिक्षण विद्यालय की लैंग्वेज लैब में भेजने को कहा गया है। हेल्प डेस्क पर तैनात स्टाफ को अपने इलाके के सीएचसी-पीएचसी के डॉक्टर और फार्मासिस्ट के नाम और मोबाइल नंबर के साथ प्राइवेट डॉक्टरों, मजिस्ट्रेट और तहसीलदार के भी नाम-नंबर रखने होंगे ताकि किसी भी पीड़ित का फौरन बयान दर्ज कराया जा सके।
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सर्कुलर में निर्देश है कि पीड़ित महिला से रिसेप्शन पर तैनात महिला कर्मचारी जो भी पूछताछ करेगी, उसका पूरा विवरण कंप्यूटर में दर्ज किया जाएगा। हर शिकायत का टोकन नंबर होगा जो पीड़िता और जांच अधिकारी को दिया जाएगा। पीड़ित को टोकन नंबर डालकर शिकायत प्राप्ति की एक रसीद भी दी जाएगी। यह नंबर कंप्यूटर पर डालते ही शिकायत सामने आ जाएगी। डीजीपी के आदेश के बाद थानों में मानकों के मुताबिक महिला सिपाहियों को चिन्हित किया जा रहा है।
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हिंदी-अंग्रेजी बोलने में सक्षम महिला पुलिसकर्मी होंगी तैनात, दिया जाएगा प्रशिक्षण बरेली। पुलिस की महिला हेल्प डेस्क और आगंतुक कक्ष को औपचारिकता के दायरे से बाहर निकालने की तैयारी है। डीजीपी की ओर से जारी गाइड लाइन के मुताबिक पूरी तरह कंप्यूटराइज्ड हेल्प डेस्क और आगंतुक कक्ष शीशे के पारदर्शी केबिन में बनाया जाएगा और उन्हीं महिला सिपाहियों को यहां तैनाती दी जाएगी जो हिंदी के साथ अंग्रेजी में भी बात करने में सक्षम होंगी। उन्हें इसके लिए मेरठ की पुलिस लैंग्वेज लैब में भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। पीड़ितों से बातचीत और समस्याओं के निस्तारण पर जवाबदेही भी तय होगी।
महिला हेल्प डेस्क एवं आगंतुक कक्ष के नाम पर अब सिर्फ बैनर लगाकर और एक मेज व दो कुर्सी रखकर औपचारिकता नहीं निभाई जाएगी। निर्देश है कि इसके लिए ऐसा अलग कक्ष आवंटित किया जाए जिसमें कंप्यूटर, टेलीफोन, मोबाइल के साथ कैमरे भी लगे हों। महिला हेल्प डेस्क और आगंतुक कक्ष में दो महिला सिपाही तैनात की जाएंगी जिन्हें अंग्रेजी भाषा का भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। आगंतुकों और पीड़िताओं से बात करने की ट्रेनिंग देने के लिए उन्हें मेरठ की पुलिस प्रशिक्षण विद्यालय की लैंग्वेज लैब में भेजने को कहा गया है। हेल्प डेस्क पर तैनात स्टाफ को अपने इलाके के सीएचसी-पीएचसी के डॉक्टर और फार्मासिस्ट के नाम और मोबाइल नंबर के साथ प्राइवेट डॉक्टरों, मजिस्ट्रेट और तहसीलदार के भी नाम-नंबर रखने होंगे ताकि किसी भी पीड़ित का फौरन बयान दर्ज कराया जा सके।
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सर्कुलर में निर्देश है कि पीड़ित महिला से रिसेप्शन पर तैनात महिला कर्मचारी जो भी पूछताछ करेगी, उसका पूरा विवरण कंप्यूटर में दर्ज किया जाएगा। हर शिकायत का टोकन नंबर होगा जो पीड़िता और जांच अधिकारी को दिया जाएगा। पीड़ित को टोकन नंबर डालकर शिकायत प्राप्ति की एक रसीद भी दी जाएगी। यह नंबर कंप्यूटर पर डालते ही शिकायत सामने आ जाएगी। डीजीपी के आदेश के बाद थानों में मानकों के मुताबिक महिला सिपाहियों को चिन्हित किया जा रहा है।