पीलीभीत में बंद हुई महिला हेल्पलाइन नंबर 181 की सेवा, स्टाफ को 13 महीने से नहीं मिला मानदेय
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं को जब कभी दिक्कत होती थी तो वे महिला हेल्पलाइन नंबर 181 पर फोन करके मदद लेती थीं। मगर, 10 जून से पीलीभीत में महिला हेल्पलाइन की यह सेवा बंद कर दी गई। हालांकि स्टाफ इसे पांच जून से ही बंद बता रहे हैं। महिला हेल्पलाइन सेवा से जुड़े स्टाफ के सात कर्मचारियों को 13 माह से मानदेय नहीं मिलने के कारण यह नौबत आई है।
घरेलू हिंसा के बढ़ते अपराधों को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 24 जून 2017 को प्रदेश के सभी जिलों में महिला अपराध रोकने के लिए 181 हेल्पलाइन सेवा की शुरूआत की थी। सरकार ने इस हेल्पलाइन सेवा की जिम्मेदारी जीवीके कंपनी को दी थी।
पीलीभीत जनपद में भी वनस्टॉप सेंटर (आशा ज्योति केंद्र) की स्थापना की गई थी। हिंसा पीड़ित महिलाओं को संबंधित जगह से लाने और फिर मदद करने के लिए एक रेस्क्यू वैन, तीन सुगमकर्ता, दो चालक और दो हाउसकीपिंग स्टाफ की तैनाती की गई।
कॉल सेंटर खुलने के बाद तो प्रतिदिन 10 से 15 पीड़ित महिलाओं की कॉल भी इस हेल्पलाइन नंबर पर आती थी। हालांकि यह अलग बात है कि फोन पर कॉल सेंटर की ओर से हिंसा पीड़ित महिलाओं से बेतुके सवाल पूछे जाते थे। मगर, फिर भी महिलाओं को इस हेल्पलाइन नंबर से कुछ न कुछ मदद की उम्मीद रहती थी।
घरेलू हिंसा से ग्रसित महिलाओं के लिए संकटमोचक की भूमिका निभाने वाली महिला हेल्पलाइन सेवा 10 दिन से बंद है। इसकी वजह यह है कि वित्तीय वर्ष 2019-20 में सरकार ने हेल्पलाइन चलाने वाली कंपनी को भुगतान नहीं किया। इसलिए कंपनी ने स्टाफ को मानदेय नहीं दिया।
महिला हेल्पलाइन सेवा से जुड़ी सुगमकर्ता रेनू शर्मा, पारुल सिंह, खुशबूजहां, चालक छत्रपाल, सतीश, हाउसकीपर पूजा और द्रौपदी को पिछले 13 माह से मानदेय नहीं मिला। इधर, सेवा प्रदाता कंपनी ने भी अब स्टाफ को नौकरी से हटाने का नोटिस थमा दिया है।
यह स्टाफ महिला हेल्पलाइन में काम करके 13 माह से मानदेय न मिलने की वजह से पहले से ही आर्थिक तंगी झेल रहे थे। अब नौकरी से निकाले जाने के बाद स्टाफ कोरोना महामारी के बीच बेरोजगार भी हो गए हैं।