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Bareilly News: युवा खिलाड़ियों की सफलता की मजबूत आधारशिला हैं महिला प्रशिक्षक

Thu, 13 Nov 2025 02:47 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 13 Nov 2025 02:47 AM IST
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Women coaches are a strong foundation for the success of young athletes.
बरेली। खेल जगत में महिला कोच अब केवल प्रशिक्षक नहीं हैं, बल्कि वे युवा खिलाड़ियों की सफलता की नींव बन चुकी हैं। वे तकनीकी प्रशिक्षण देने के साथ-साथ खिलाड़ियों में अनुशासन, मानसिक मजबूती और खेल भावना विकसित करने में अहम भूमिका निभाती हैं। उनका समर्पण और अनुभव नई प्रतिभाओं को प्रेरित करता है और उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए तैयार करता है। इस दौरान राजकीय इंटर कॉलेज में आयोजित हो रही 69वीं राष्ट्रीय वॉलीबॉल अंडर-17 प्रतियोगिता में विभिन्न राज्यों से आईं महिला प्रशिक्षक नई प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं और खिलाड़ियों के भविष्य को संवार रही हैं।
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महाराष्ट्र में स्पोर्ट्स ऑफिसर हैं स्नेहल
महाराष्ट्र की स्नेहल चौधरी ने खेल और कोचिंग में अपनी अलग पहचान बनाई है। दसवीं कक्षा से ही उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और पदक जीते। इसके बाद फेडरेशन नेशनल, यूथ नेशनल और सीनियर नेशनल प्रतियोगिताओं में भी उन्होंने अपनी प्रतिभा दिखाई। खेल में अनुभव और उपलब्धियों के बाद उनका ध्यान खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करने की ओर गया। वर्ष 2009 में उन्होंने बीपीएड किया और एनआईएस पूरा कर स्पोर्ट्स ऑफिसर की परीक्षा उत्तीर्ण की। स्नेहल का मानना है कि एक कोच का सबसे बड़ा उद्देश्य ऐसे खिलाड़ी तैयार करना होना चाहिए जो खेल में सफलता के साथ राज्य और देश का नाम रोशन कर सकें।
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उत्तराखंड की कोच हैं श्वेता नेगी
उत्तराखंड की कोच श्वेता नेगी का खेल सफर भी प्रेरक है। प्रारंभ में वह बास्केटबॉल खिलाड़ी थीं, लेकिन स्कूल में उनका रुझान वॉलीबॉल की ओर बढ़ा। 14 वर्ष की उम्र में उन्होंने नेशनल में रजत पदक जीता और अब तक लगभग 13 राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग ले चुकी हैं। खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करने के लिए उन्होंने बीपीएड किया और वर्ष 2018 से पीटीआई के पद पर कार्यरत हैं। श्वेता का मानना है कि एक खिलाड़ी को केवल खेल सिखाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनमें आत्मविश्वास और जीत की भावना भी विकसित करनी चाहिए। उनकी कोचिंग में प्रशिक्षित खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुके हैं।
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फरीदा को विरासत में मिला खेल
फरीदा कमाल का खेलों से नाता उनके जन्म से ही जुड़ा रहा। उनके पिता हॉकी खिलाड़ी, भाई क्रिकेट खिलाड़ी, बहन टेबल टेनिस खिलाड़ी और पति पूर्व रणजी क्रिकेटर हैं। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि खेल उन्हें विरासत में मिला। उनके इस सफर में उन्हें न केवल खेल में सफलता हासिल करने का अवसर दिया, बल्कि युवा खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करने का जुनून भी दिया। फरीदा ने स्वयं एशिया कप में भारत का प्रतिनिधित्व किया और पिछले 15 वर्षों से नवोदय विद्यालय समिति में कोच के रूप में कार्यरत हैं। फरीदा के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके खिलाड़ी प्रदेश के साथ-साथ देश का भी नाम रोशन कर चुके हैं। संवाद
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