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जन धन के जरिये काला धन वालों पर कसेगा शिकंजा
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
Updated Fri, 18 Nov 2016 01:41 AM IST
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- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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जन धन खातों के जरिये काला धन जुटाने वालों पर शिकंजा कसने के लिए केंद्र सरकार आयकर विभाग, बैंक और केंद्रीय खुफिया एजेंसी आईबी की मदद ले रही है। बैंकों से रोजाना इन लोगों का गांव, शहर, कस्बों और मुहल्लों तक का ऑनलाइन ब्योरा लिया जा रहा है। इसे केंद्रीय खुफिया एजेंसी (आईबी) और ईडी को भेजकर जानकारी जुटाई जानी है कि आखिर यह रकम इनके खातों में कौन जमा कर रहे हैं। ऐसे लोगों की पहचान कराने के साथ-साथ गहराई से जांच कराने के संकेत मिले हैं।
इस साल नौ नवंबर से गरीबों के जन धन खातों में तेजी से धनराशि जमा हो रही है। पिछले एक साल से आठ नवंबर तक इन खातों में 10 -10 हजार रुपये भी जमा नहीं थे। इनके पक्के मकान भी नहीं हैं। 500 और एक हजार के नोट बंद करने का आदेश हुआ तो वह लखपति कैसे बन गए। अब सरकार की रणनीति है कि इन जन धन खातों में एक-एक लाख रुपये से अधिक धनराशि जमा वाले गांवों की पहचान कर ली जाए। ऐसे गांवों में धनराशि जमा करने वालों से आईबी की टीम यह पता करेगी कि उनके खातों में जमा यह धनराशि किसने दी। इन गरीबों को इतनी धनराशि जमा कराने वाले लोगों के किन-किन बड़े-बड़े नेता, अधिकारी तथा उद्यमियों से संपर्क है। उन्हीं के माध्यम से काला धन जुटाने वालों तक पहुंचने की रणनीति है। उन पर केंद्र सरकार आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोप में शिकंजा कसेगी।
इस रणनीति में सरकार का उद्देश्य जन धन खातों में जमा कराने वाले गरीबों का उत्पीड़न करना नहीं बल्कि उनके जरिये काला धन जुटाने वालों तक पहुंचना है। यह तो सरकार को पता है कि इन गरीबों को तो 10 से लेकर 25 फीसदी रुपये ही दिए जाएंगे, जबकि मोटी रकम तो फिर से काला धन एकत्रित करने वालों को पहुंचाने की रणनीति है।
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इस तरह कसेगा शिकंजा
जन धन खातों में जमा एक लाख या उससे अधिक रकम वाले खातों का विवरण ऑनलाइन सॉफ्टवेयर से आयकर की इनफोर्समेंट ब्रांच को जाएगा। यहां पहचान किए गए गांव वार जन धन खातों का विवरण गृह मंत्रालय को भेजा जाएगा। वहां से आईबी की टीम गांव, शहर और कस्बों के उन लोगों से गोपनीय पड़ताल करेगी कि उनकोे यह रकम जमा कराने के लिए किसने दी थी। उसी व्यक्ति पर आईबी की नजर रहेगी कि वह किससे यह रकम लेकर आए हैं और गरीबों को खातों में जमा कराने के लिए दी है।
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इस साल नौ नवंबर से गरीबों के जन धन खातों में तेजी से धनराशि जमा हो रही है। पिछले एक साल से आठ नवंबर तक इन खातों में 10 -10 हजार रुपये भी जमा नहीं थे। इनके पक्के मकान भी नहीं हैं। 500 और एक हजार के नोट बंद करने का आदेश हुआ तो वह लखपति कैसे बन गए। अब सरकार की रणनीति है कि इन जन धन खातों में एक-एक लाख रुपये से अधिक धनराशि जमा वाले गांवों की पहचान कर ली जाए। ऐसे गांवों में धनराशि जमा करने वालों से आईबी की टीम यह पता करेगी कि उनके खातों में जमा यह धनराशि किसने दी। इन गरीबों को इतनी धनराशि जमा कराने वाले लोगों के किन-किन बड़े-बड़े नेता, अधिकारी तथा उद्यमियों से संपर्क है। उन्हीं के माध्यम से काला धन जुटाने वालों तक पहुंचने की रणनीति है। उन पर केंद्र सरकार आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोप में शिकंजा कसेगी।
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इस रणनीति में सरकार का उद्देश्य जन धन खातों में जमा कराने वाले गरीबों का उत्पीड़न करना नहीं बल्कि उनके जरिये काला धन जुटाने वालों तक पहुंचना है। यह तो सरकार को पता है कि इन गरीबों को तो 10 से लेकर 25 फीसदी रुपये ही दिए जाएंगे, जबकि मोटी रकम तो फिर से काला धन एकत्रित करने वालों को पहुंचाने की रणनीति है।
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इस तरह कसेगा शिकंजा
जन धन खातों में जमा एक लाख या उससे अधिक रकम वाले खातों का विवरण ऑनलाइन सॉफ्टवेयर से आयकर की इनफोर्समेंट ब्रांच को जाएगा। यहां पहचान किए गए गांव वार जन धन खातों का विवरण गृह मंत्रालय को भेजा जाएगा। वहां से आईबी की टीम गांव, शहर और कस्बों के उन लोगों से गोपनीय पड़ताल करेगी कि उनकोे यह रकम जमा कराने के लिए किसने दी थी। उसी व्यक्ति पर आईबी की नजर रहेगी कि वह किससे यह रकम लेकर आए हैं और गरीबों को खातों में जमा कराने के लिए दी है।