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बाघ के हमले में नौ लोग घायल ग्रामीणों के पीटने से जख्मी हुआ

Thu, 25 Jul 2019 02:52 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 25 Jul 2019 02:52 AM IST
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wild life
पूरनपुर (पीलीभीत)। झाड़ी से निकले बाघ ने बुधवार को जंगल किनारे धान के खेत में निराई कर रहे किसान श्याम मोहन पर हमला कर घायल कर दिया। उसके शोर मचाने पर साथी विजयपाल ने बाघ पर लाठी से प्रहार किया तो बाघ उस पर झपट्टा मारते हुए झाड़ी में चला गया। इसके बाद गांव वाले उसे खदेड़ने पहुंचे तो बाघ ने उन पर भी हमला कर दिया जिससे सात और लोग घायल हो गए। इन्हें सीएचसी में प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। गुस्साए ग्रामीणों ने एकत्र होकर झाड़ियों में छिपे बाघ पर हमला बोल दिया। लाठी-डंडे लेकर पहुंचे ग्रामीणों ने बाघ की घेराबंदी कर जमकर लाठियां बरसाईं। इसमें बाघ चोटिल हो गया। वन अफसरों ने जैसे-तैसे स्थिति को संभाला। रेस्क्यू कर बाघ को कब्जे में लेने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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घटना बुधवार सुबह करीब 11 बजे की है। घुंघचाई चौकी क्षेत्र के दियोरिया रेंज से सटे गांव मटेहना कॉलोनी नंबर चार निवासी श्याम मोहन ने बताया कि वह विजयपाल के साथ धान की निराई कर रहे थे। पास की झाड़ी से निकले बाघ ने उन पर हमला कर दिया। विजयपाल ने बाघ को लाठी मारकर भगाना चाहा तो बाघ ने विजयपाल को भी घायल कर दिया और फिर झाड़ियों में चला गया। घटना के बाद खेतों में काम कर रहे लोगों में भगदड़ मच गई। बाद में गांव से तमाम लोग लाठी-डंडे लेकर बाघ को खदेड़ने पहुंचे। लोग शोरशराबा करते हुए आगे बढ़े तो बाघ ने उन पर भी हमला कर दिया। इसमें रामवृक्ष, उनका पुत्र रमेश, बलवीर कुमार, राधेश्याम, कमला सिंह, विजयपाल, लक्ष्मन प्रसाद और दीपक यादव लहूलुहान हो गए। बाघ के हमले से लोगों में भगदड़ मच गई।
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बाघ चलने-फिरने में हुआ असमर्थ
बाघ पर धारदार हथियार से भी वार किए गए हैं। इधर, सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंचे वन अफसरों ने ग्रामीणों को बमुश्किल शांत किया। कुछ देर बाद वन विभाग की टीम ने जब बाघ को जंगल की ओर खदेड़ने का प्रयास किया तो वह उठा नहीं। रेंजर बीके गुप्ता ने बताया कि ग्रामीणों ने बाघ पर लाठियां बरसाई हैं। इससे वह चलने-फिरने में भी असमर्थ है। उसे इलाज के लिए कब्जे मेें लेने की कोशिश की जा रही है।
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दियोरिया रेंज के जंगल किनारे बसी है कॉलोनी
पूरनपुर। मटेहना कॉलोनी दियोरिया रेंज के जंगल किनारे बसी है। अधिकतर लोगों के खेत जंगल की सीमा से सटे हैं। बाघ के पगचिह्न तो अक्सर खेतों में देखे जाते हैं। इसकी कई बार सूचना भी वन विभाग के अफसरों को दी गई, लेकिन जंगल से निकलकर खेतों में बाघ की चहलकदमी नहीं रुकी। बुधवार को बाघ के हमले के बाद से आसपास के लोग दहशत में है। बाघ के हमले को लेकर लोगों से जब बातचीत की गई, तो उन्होंने बताया कि बाघ इतना ज्यादा गुस्से में था कि भीड़ देखते ही दौड़ पड़ा। इससे लोगों को भागने तक का मौका नहीं मिला और कई लोग घायल हो गए।

बाघ के पगचिह्न तो अक्सर खेतों में मिलते थे, लेकिन बाघ पहली बार देखा। बाघ भी इतना हमलावर था कि उसे खदेड़ने को पहुंचे लोगों को भागने तक का मौका नहीं मिल सका। बमुश्किल कैसे लोगों की जान बची। घटना के बाद लोग सोचने को मजबूर है।
-स्वामीनाथ मटेहना

बाघ के हमला की सूचना घटना के कुछ देर बाद गांव के लोगों ने वन विभाग के अफसरों को मोबाइल पर दी, लेकिन शाम चार बजे तक वन विभाग का कोई कर्मचारी, अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। इसके बाद पहुंचे कुछ कर्मचारी घटनास्थल से काफी दूर गांव के बाहर ही बैठे रहे। - श्रीराम, मटेहना

बाघ के खेतों में चहल कदमी करने की जानकारी तो कई बार मिली, लेकिन आज पहली बार लोगों का बाघ से मुकाबला हो गया। बाघ भी इतना खतरनाक की भारी शोर-शराबा के बाद भी अपनी जगह से हिलने तक का नाम नहीं ले रहा था। - रामलाल, मटेहना।


बाघ की दहशत पर दिन में 11 बजे से शाम तक लोगों में रही। सूचना पर वन कर्मियों का पहुंचना तो दूर घायलों को अस्पताल ले जाने को एंबुलेंस तक नहीं पहुंची। आखिर दो घुंघचाई से प्राइवेट वाहन को बुलाकर घटना के छह घंटे बाद सीएचसी लाया जा सका। इससे समय रहते घायलों को इलाज नहीं मिल सका।
-धरमोद यादव
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