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किसकी जेब में जा रहा है विज्ञापन का कमाई
बरेली।
Updated Wed, 22 Mar 2017 12:32 AM IST
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किसकी जेब में जा रहा है विज्ञापन का कमाई
- फोटो : Whose cash is going on in advertising?
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कानूनगोयान के पार्षद कपिल कांत ने कार्यकारिणी बैठक में विज्ञापन का मुद्दा उठाते हुए एक नजीर रखी- नगर निगम के सामने अवैध होर्डिंग लगी थी। इसकी शिकायत की तो यह हटा दी गई लेकिन आज तक पता नहीं चल सका कि किस अधिकारी के संरक्षण में यह होर्डिंग लगी और किस एजेंसी ने इसे लगाया था। नगर निगम में विज्ञापन की कमाई किसी और जेब में जा रही है और अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। पिछले साल विज्ञापन से 54 लाख की वसूली हुई थी लेकिन गुजर रहे वित्तीय वर्ष में तो रिकार्ड ही टूट गया। सिर्फ 3 लाख 10 हजार ही कमाई विज्ञापन से हो पायी। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ ॉतो अधिकारियों ने अपने हाथ पैर और ढीले छोड़ दिए हैं और कारिंदे इनकी पकड़ से बाहर हैं। विज्ञापन से कमाई की ओर जानबूझकर ध्यान नहीं दिया जा रहा है और इस बारे में सफाई भी अधिकारी कार्यकारिणी की बैठक में नहीं दे पा रहे हैं। जबकि पूरा शहर अभी भी अवैध होर्डिंग से पटा पड़ा है। पार्षद कपिल कांत ने कहा कि विज्ञापनों पर कर का लक्ष्य एक करोड़ 25 लाख रुपए तय किया गया था। जबकि पिछले साल दिसंबर तक 44 लाख रुपए और पूरे वित्तीय वर्ष में 54 लाख रुपए की वसूली हो गई थी। ऐसे में कैसे निगम के अधिकारियों पर विश्वास करें। पार्षद विपुल लाला ने कहा कि होर्डिंग और यूनिपोल को हटाने में दिलचस्पी न दिखाने का क्या कारण है। क्या एक्शन एजेंसी पर लिया यह भी नहीं बताते हैं। नगर आयुक्त शीलधर यादव ने बताया कि होर्डिंग का नवीनीकरण के लिए कमेटी गठित है जिसकी सर्वे रिपोर्ट नहीं मिली है। यूनिपोल का सर्वे हो चुका है। जो कमी है उसे इस साल पूरा कर लेंगे। नए वित्तीय वर्ष में कमेटी से बात की जाएगी ताकि होर्डिंग शहर में कितने लगेंगे इसकी जानकारी हो।
- नगर आयुक्त हर बार कहते हैं हम कर लेंगे...
पार्षद कपितकांत ने कहा कि तीन माह पहले भी जब विज्ञापन से कमाई न होने की बात कार्यकारिणी की बैठक में उठाई गई थी तो नगर आयुक्त शीलधर सिंह यादव बोले थे कि हम कर लेंगे । तीन माह में मात्र 10 हजार रुपए की वसूली ही हो पाई है। राजस्व की वसूली न होने से जो निगम को हानि हो रही है उसका जिम्मेदार कौन है।
- पर्यावरण अभियंता के ऊपर थी जिम्मेदारी
बड़ी उम्मीदाें से नगर आयुक्त ने अपने चहेते पर्यावरण अभियंता उत्तम कुमार वर्मा को विज्ञापन की जिम्मेदारी दी थी। लेकिन उत्तम कुमार वर्मा भी सेटिंग में बिजी रहे। वह कार्यालय में नहीं दिखते हैं, जबकि उनके पास विज्ञापन के अलावा, निर्माण, स्वास्थ्य, डोर टू डोर, पार्कों का भी चार्ज दे दिया गया है।
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डीएम स्तर पर कमेटी ने यूनिपोल कितने लगेंगे यह तय कर दिया लेकिन होर्डिंग का सर्वे नहीं हो सका। इस कमेटी में अधिकारी थे जन प्रतिनिधि कोई नहीं था। जो विज्ञापन वसूली की दर कार्यकारिणी में पेश की गई है वह सितंबर से दिसबंर की है। विज्ञापन वसूली की कमी को इस माह पूरा करने के लिए कहा गया है।
डॉ. आईएस तोमर, मेयर
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- नगर आयुक्त हर बार कहते हैं हम कर लेंगे...
पार्षद कपितकांत ने कहा कि तीन माह पहले भी जब विज्ञापन से कमाई न होने की बात कार्यकारिणी की बैठक में उठाई गई थी तो नगर आयुक्त शीलधर सिंह यादव बोले थे कि हम कर लेंगे । तीन माह में मात्र 10 हजार रुपए की वसूली ही हो पाई है। राजस्व की वसूली न होने से जो निगम को हानि हो रही है उसका जिम्मेदार कौन है।
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- पर्यावरण अभियंता के ऊपर थी जिम्मेदारी
बड़ी उम्मीदाें से नगर आयुक्त ने अपने चहेते पर्यावरण अभियंता उत्तम कुमार वर्मा को विज्ञापन की जिम्मेदारी दी थी। लेकिन उत्तम कुमार वर्मा भी सेटिंग में बिजी रहे। वह कार्यालय में नहीं दिखते हैं, जबकि उनके पास विज्ञापन के अलावा, निर्माण, स्वास्थ्य, डोर टू डोर, पार्कों का भी चार्ज दे दिया गया है।
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डीएम स्तर पर कमेटी ने यूनिपोल कितने लगेंगे यह तय कर दिया लेकिन होर्डिंग का सर्वे नहीं हो सका। इस कमेटी में अधिकारी थे जन प्रतिनिधि कोई नहीं था। जो विज्ञापन वसूली की दर कार्यकारिणी में पेश की गई है वह सितंबर से दिसबंर की है। विज्ञापन वसूली की कमी को इस माह पूरा करने के लिए कहा गया है।
डॉ. आईएस तोमर, मेयर