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पेट्रोल पंपों पर चिप की असलियत परखेगा कौन?
बरेली।
Updated Mon, 08 May 2017 01:16 AM IST
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पेट्रोल पंपों पर चिप की असलियत परखेगा कौन?
- फोटो : पेट्रोल पंपों पर चिप की असलियत परखेगा कौन?
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जिले भर में बुधवार से लगातार पेट्रोल पंपों पर छापे मारे जा रहे हैं। आधा दर्जन मशीनों में चिप होने का संदेह भी जताते हुए उपकरण जब्त किए गए हैं लेकिन यह साफ नहीं हो पा रहा कि इस की जांच करेगा कौन। जिला पूर्ति अधिकारी और प्रशासनिक अफसर के पास तो जवाब है कि आयल कंपनी और मशीन लगाने वाले बताएंगे कि पंपों से मिले उपकरण क्या चिप से घटतौली में इस्तेमाल होते थे या नहीं? लेकिन कंपनी वालों की तरफ से अबतक कोई जवाब नहीं मिला है।
छापा अभियान में 50 से ज्यादा पेट्रोल पंप चेक हुए हैं। रविवार अवकाश होने से अभियान स्थगित रहा। छापे में आधा दर्जन मशीनों में चिप होने के मामले सामने आए। पहला मामला शहर में बीपीसी पेट्रोल पंप आटो पैराडाइज पर मिला था। दूसरा मामला शीशगढ़ में पकड़ा गया। डीएम पिंकी जोवेल खुद घंटे भर एक पंप पर मौजूद रहीं। इस मौके पर तकनीकी स्टाफ आदि मशीन की पल्सर यूनिट में मिली गड़बड़ी में ताकझांक करते थे। एसटीएम इंसपेक्टर अजय सिंह भी जांच करते रहे। फिर भी कोई चिप होने की पुष्टि नहीं कर पाया। बाद में तय हुआ कि उपकरण संबंधित मशीन निर्माता से चेक कराए जाएंगे। आनलाइन कंपनी से संपर्क किया गया, लेकिन अभी तक बात आगे नहीं बढ़ी।
चिप लगाने में पूरा नेटवर्क
पंपों पर जिस तरह की घटतौली मिली है उससे बाट माप विभाग भी अनभिज्ञ है। बताते हैं कि आधुनिक डिस्पेंसिंग यूनिटों में संबंधित निर्माता कंपनी और पेट्रोलियम कंपनी तकनीक सहायक आदि ही इस हेराफेरी से अवगत हो सकते हैं। मशीनों में माप प्रक्रिया सेटिंग पंप मालिक की सहमति से होती है। इस धंधे में शामिल लोग आन डिमांड पंपों पर पहुंचकर अपना कला प्रदर्शित करते हैं। इसके बाद मशीनों का मुद्रांकन कराया जाता है, इससे साफ जाहिर है कि भले ही बाट माप इस तकनीक से अनभिज्ञ है, लेकिन चिप कौन कौन पंपों पर इस्तेमाल हो रही है इसकी जानकारी जरूर रहती है।
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नहीं मिल रहा सहयोग
पेट्रोल पंप मशीनों में संदिग्ध उपकरणों की मौजूदगी होने प्रमाण मिलने के बाद इसकी पुष्टि जांच के लिए छापा दल परेशान है। इस कार्य में पेट्रोलियम कंपनियां भी साथ नहीं दे रही हैं। जबकि पंपों पर लगने वाली मशीनों की सप्लाई और स्थापना आदि पेट्रोलियम कंपनियां ही करती हैं। कंपनियों के पास बाकायदा तकनीक विभाग मौजूद है, फिर भी अपेक्षित सहयोेग नहीं मिला है।
‘दर्जन भर मशीनों से मिले संदिग्ध उपकरण कब्जे लिए गए हैं। इससे होने वाली घटतौली आदि की जांच और पुष्टि संबंधित निर्माता कंपनी ही करेगी। कंपनियों से संपर्क किया गया है, अभी तक कोई रेस्पांस नहीं मिला है।’
- केएल तिवारी, डीएसओ
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छापा अभियान में 50 से ज्यादा पेट्रोल पंप चेक हुए हैं। रविवार अवकाश होने से अभियान स्थगित रहा। छापे में आधा दर्जन मशीनों में चिप होने के मामले सामने आए। पहला मामला शहर में बीपीसी पेट्रोल पंप आटो पैराडाइज पर मिला था। दूसरा मामला शीशगढ़ में पकड़ा गया। डीएम पिंकी जोवेल खुद घंटे भर एक पंप पर मौजूद रहीं। इस मौके पर तकनीकी स्टाफ आदि मशीन की पल्सर यूनिट में मिली गड़बड़ी में ताकझांक करते थे। एसटीएम इंसपेक्टर अजय सिंह भी जांच करते रहे। फिर भी कोई चिप होने की पुष्टि नहीं कर पाया। बाद में तय हुआ कि उपकरण संबंधित मशीन निर्माता से चेक कराए जाएंगे। आनलाइन कंपनी से संपर्क किया गया, लेकिन अभी तक बात आगे नहीं बढ़ी।
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चिप लगाने में पूरा नेटवर्क
पंपों पर जिस तरह की घटतौली मिली है उससे बाट माप विभाग भी अनभिज्ञ है। बताते हैं कि आधुनिक डिस्पेंसिंग यूनिटों में संबंधित निर्माता कंपनी और पेट्रोलियम कंपनी तकनीक सहायक आदि ही इस हेराफेरी से अवगत हो सकते हैं। मशीनों में माप प्रक्रिया सेटिंग पंप मालिक की सहमति से होती है। इस धंधे में शामिल लोग आन डिमांड पंपों पर पहुंचकर अपना कला प्रदर्शित करते हैं। इसके बाद मशीनों का मुद्रांकन कराया जाता है, इससे साफ जाहिर है कि भले ही बाट माप इस तकनीक से अनभिज्ञ है, लेकिन चिप कौन कौन पंपों पर इस्तेमाल हो रही है इसकी जानकारी जरूर रहती है।
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नहीं मिल रहा सहयोग
पेट्रोल पंप मशीनों में संदिग्ध उपकरणों की मौजूदगी होने प्रमाण मिलने के बाद इसकी पुष्टि जांच के लिए छापा दल परेशान है। इस कार्य में पेट्रोलियम कंपनियां भी साथ नहीं दे रही हैं। जबकि पंपों पर लगने वाली मशीनों की सप्लाई और स्थापना आदि पेट्रोलियम कंपनियां ही करती हैं। कंपनियों के पास बाकायदा तकनीक विभाग मौजूद है, फिर भी अपेक्षित सहयोेग नहीं मिला है।
‘दर्जन भर मशीनों से मिले संदिग्ध उपकरण कब्जे लिए गए हैं। इससे होने वाली घटतौली आदि की जांच और पुष्टि संबंधित निर्माता कंपनी ही करेगी। कंपनियों से संपर्क किया गया है, अभी तक कोई रेस्पांस नहीं मिला है।’
- केएल तिवारी, डीएसओ