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नवरात्र के साथ ही करें हिंदी नए वर्ष का स्वागत 

Tue, 28 Mar 2017 01:26 AM IST
बरेली।  
बरेली।   Updated Tue, 28 Mar 2017 01:26 AM IST
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Welcome to New Year Hindi Navaratri
Welcome to New Year Hindi Navaratri - फोटो : बरेली, अमर उजाला
वासंतिक नवरात्र एवं नव संवत्सर एक साथ शुरू हो रहे हैं। यह मौका अर्से बाद आया है जब हिंदी नव वर्ष का स्वागत ब्रह्म योग में होगा। मंगलवार 28 मार्च को सुबह 8 बजकर 32 मिनट से मेष लग्न लग रहा है। मेष लग्न के स्वामी मंगल ग्रह हैं। मंदिर में नवरात्र को लेकर तैयारी हो चुकी है, बाजार भी सज गए हैं। कुछ लोगाें में नवरात्र शुरू होने को लेकर संशय है। कहीं- कहीं 29 मार्च को नवरात्र शुरू होना बताया जा रहा है, लेकिन आचार्य मुकेश मिश्रा का कहना है कि पूर्वांचल काशी आदि पंचागाें में 29 से नवरात्र को दर्शाया गया है। जबकि बरेली, मथुरा, हरिद्वार, दिल्ली आदि पंचागाें में नवरात्र तिथि 28 मार्च बताई गई है। यह गणना सूर्य उदय के अनुसार की जाती है। मार्तंड, ब्रृजभूमि और विश्व विजय जैसे पंचागाें में नवरात्र 28 को दर्ज है। 
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पंडित रमेश चंद्र शास्त्री ने बताया कि नवरात्र में नौ देवी की आराधना के साथ ही हनुमान की पूजा भी फल प्रदान करेगी। जिन जातकों की कुंडली में मंगल ग्रह नीच राशि में बैठा हो या मंगल ग्रह की महादशा अंतर दशा चल रही हो तो ऐसे जातकों के लिए नवरात्रि का पर्व वरदान की तरह रहेगा। इस नव संवत्सर का आगमन भी 27 प्रकार के योगों से ब्रह्म योग में शुरू हो रहा है। यह कई सालाें बाद है। ब्रह्म योग ज्ञान, भक्ति, ईश्वरी कृपा का कारक माना जाता है। पुराणों की मान्यतानुसार ब्रह्मा जी ने सृष्टि का निर्माण भी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन ही किया था। तब से आज तक नव वर्ष यहीं से शुरू करते हैं। 
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कलश स्थापना के सिद्धि कारक मुहूर्त 
चौघड़िया 
चाल- 9:28 से 11:00 बजे तक- व्यापार में वृद्धि होगी
लाभ- 11:00 से 12:32 बजे तक - सभी कार्यों में तेजी आएगी 
अमृत- 12:32 से 2:04 बजे तक - रोग, शोक, निर्धनता से मुक्ति 

ऐसे करें कलश स्थापना
शुद्ध मिट्टी में गाय का गोबर मिलाकर उसमें जौ मिला लें। फिर पूजा के ईशान कोण में कलश ऊं वरुणाय नम: मंत्र बोलकर स्थापित कर दें। कलश में लौंग, इलायची, सुपारी, कमल गट्टा, दूर्वा, सिक्का, सोने या चांदी की वस्तु आदि कलश में डाले साथ में गंगाजल डालें। कलश के ऊपर आम, पीपल, पाकड़, बरगद, गूलर के पत्ते सजाएं। इन पत्ताें पर जटा युक्त नारियल लाल कपड़े में बांधकर रखें। दूध, दही, घी, शहद, बूरा से स्नान क राएं, फिर जनेऊ, रोली, चंदन, अबीर, गुलाल, सिंदूर से तिलक करें, अक्षत चढ़ाएं, धूप, दीप, नैवेध का भोग लगाकर ऋतुफल, पान, फूल चढ़ाएं। पहले दिन मां शैलपुत्री को अनार चढ़ाएं। 
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