Monsoon 2023: कृषि विज्ञान केंद्र ने जारी की एडवाइजरी, सिंचाई का कर लें वैकल्पिक इंतजाम
Monsoon in UP: मानसून में कम बारिश की संभावना जताई जा रही है। इसे देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से किसानों के लिए एडवाइजरी जारी हुई है।
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बरेली मंडल में पश्चिमी विक्षोभ हावी होने से मई में अभी गर्मी से राहत मिल रही है, लेकिन आने वाले दिनों में तपिश बढ़ने के आसार हैं। मानसून में भी कम बारिश की संभावना जताई जा रही है। इसे देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से किसानों के लिए एडवाइजरी जारी हुई है, ताकि कम वर्षा होने की स्थिति में भी फसल का उत्पादन प्रभावित न हो। सरकार द्वारा संचालित फसल बीमा योजना के लिए पंजीकरण कराने का सुझाव दिया गया है।
वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. रंजीत सिंह का कहना है कि मानसून इस बार भी पहले की तरह सामान्य से कम रहने का पूर्वानुमान है। पिछले साल बड़ी तादाद में किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ा था। लिहाजा, पूर्वानुमान को देखते हुए पहले से तैयारियां बेहद जरूरी हैं। उन्होंने खेत के चारों ओर ऊंची मेड़बंदी करने को कहा है, ताकि पानी खेत के बाहर न जाए।
भूमिगत नमी बरकरार रहे। ऐसी फसलों का चुनाव करें जो कम पानी में तैयार हो जाएं। इसमें दलहनी फसलें उर्द, अरहर, मूंग, तिल, ज्वार, बाजरा, मक्का आदि की बोआई कर सकते हैं। फसल की सिंचाई स्प्रिंकलर, डि्रप आदि विधि से करने को कहा।
धान की करें सीधी बोवाई
डॉ. रंजीत के मुताबिक किसान धान डीएसआर (सीधी बोआई) विधि से लगाएं। इससे पानी की जरूरत करीब 35 फीसदी कम होती है। एक हेक्टेयर में 20-25 किलो बीज लगता है। ड्रम सीडर द्वारा धान की बोआई से पैदावार पर असर नहीं होता। श्री तकनीक यानी 11-15 दिन तक विशेष प्रकार से उगाए धान का पौधरोपण कर सकते हैं। इससे खरपतवार का नियंत्रण आसान होता है और कम पानी की जरूरत होती है।
थावला विधि से करें सब्जी की बोवाई, बनाएं पॉली बैग
थावला विधि से सब्जियों की बोआई का सुझाव दिया है। बेलदार सब्जियों को पाॅली बैग में उगाकर तैयार करने को कहा है। मिर्च, टमाटर, बैंगन, शिमला मिर्च आदि की पौध को पहले प्रो ट्रे में उगाने का सुझाव दिया है, ताकि पौधों की वृद्धि हो और समय-रुपये की बचत हो सके। पंक्ति में बोई गई फसल के बीच घास की सूखी पत्तियां बिछाएं ताकि जल संरक्षण हो और खरपतवार नियंत्रित रहें।