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Monsoon 2023: कृषि विज्ञान केंद्र ने जारी की एडवाइजरी, सिंचाई का कर लें वैकल्पिक इंतजाम

Wed, 31 May 2023 04:37 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Wed, 31 May 2023 04:37 PM IST
सार

Monsoon in UP: मानसून में कम बारिश की संभावना जताई जा रही है। इसे देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से किसानों के लिए एडवाइजरी जारी हुई है। 

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Monsoon Update Less Rain Expected In Monsoon Season 2023, UP Me Monsoon Kab Aayega News in Hindi
मानसून में कम बारिश के आसार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बरेली मंडल में पश्चिमी विक्षोभ हावी होने से मई में अभी गर्मी से राहत मिल रही है, लेकिन आने वाले दिनों में तपिश बढ़ने के आसार हैं। मानसून में भी कम बारिश की संभावना जताई जा रही है। इसे देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से किसानों के लिए एडवाइजरी जारी हुई है, ताकि कम वर्षा होने की स्थिति में भी फसल का उत्पादन प्रभावित न हो। सरकार द्वारा संचालित फसल बीमा योजना के लिए पंजीकरण कराने का सुझाव दिया गया है।

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वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. रंजीत सिंह का कहना है कि मानसून इस बार भी पहले की तरह सामान्य से कम रहने का पूर्वानुमान है। पिछले साल बड़ी तादाद में किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ा था। लिहाजा, पूर्वानुमान को देखते हुए पहले से तैयारियां बेहद जरूरी हैं। उन्होंने खेत के चारों ओर ऊंची मेड़बंदी करने को कहा है, ताकि पानी खेत के बाहर न जाए।
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भूमिगत नमी बरकरार रहे। ऐसी फसलों का चुनाव करें जो कम पानी में तैयार हो जाएं। इसमें दलहनी फसलें उर्द, अरहर, मूंग, तिल, ज्वार, बाजरा, मक्का आदि की बोआई कर सकते हैं। फसल की सिंचाई स्प्रिंकलर, डि्रप आदि विधि से करने को कहा।

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धान की करें सीधी बोवाई

डॉ. रंजीत के मुताबिक किसान धान डीएसआर (सीधी बोआई) विधि से लगाएं। इससे पानी की जरूरत करीब 35 फीसदी कम होती है। एक हेक्टेयर में 20-25 किलो बीज लगता है। ड्रम सीडर द्वारा धान की बोआई से पैदावार पर असर नहीं होता। श्री तकनीक यानी 11-15 दिन तक विशेष प्रकार से उगाए धान का पौधरोपण कर सकते हैं। इससे खरपतवार का नियंत्रण आसान होता है और कम पानी की जरूरत होती है।

थावला विधि से करें सब्जी की बोवाई, बनाएं पॉली बैग

थावला विधि से सब्जियों की बोआई का सुझाव दिया है। बेलदार सब्जियों को पाॅली बैग में उगाकर तैयार करने को कहा है। मिर्च, टमाटर, बैंगन, शिमला मिर्च आदि की पौध को पहले प्रो ट्रे में उगाने का सुझाव दिया है, ताकि पौधों की वृद्धि हो और समय-रुपये की बचत हो सके। पंक्ति में बोई गई फसल के बीच घास की सूखी पत्तियां बिछाएं ताकि जल संरक्षण हो और खरपतवार नियंत्रित रहें।

जैविक खाद का प्रयोग करने से स्थिर रहेगी उपज

विशेषज्ञ के मुताबिक बारिश कम होने की स्थिति में फास्फोरस-पोटाश आदि उर्वरकों का प्रयोग सामान्य से अधिक करने को कहा है, ताकि विपरीत परिस्थितियों में पौधा बचा रहे। गोबर की खाद, कार्बनिक खाद आदि जैविक खाद की मात्रा बढ़ाने, फसल संरक्षण के लिए एकीकृत फसल संरक्षण के सिद्धांत के साथ जीवामृतम, बीजामृतम, सप्तधान्यअंकुर, दशपर्णी अर्क, बायो डी-कंपोजर आदि का प्रयोग करने का सुझाव दिया है।
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