{"_id":"5dd2f0038ebc3e54c851f043","slug":"weather-civic-amenities-bareilly-news-bly38454091","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रदूषण की मार- खत्म हो रही ऑक्सीजन.. नदियों में जलीय जीवों पर खतरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रदूषण की मार- खत्म हो रही ऑक्सीजन.. नदियों में जलीय जीवों पर खतरा
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बरेली। हवा में बढ़े प्रदूषण से सांसों पर संकट तो है ही, अब पानी में बढ़ रहा प्रदूषण भी जलीय जीवों के लिए संकट पैदा कर रहा है। जिले की नदियों में आक्सीजन की मात्रा ही खत्म होती जा रही है। सिर्फ जलीय जीव ही नहीं, बल्कि लाभकारी सूक्ष्मजीव भी खत्म हो रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों से रामगंगा और आसपास की अन्य नदियों में हुए शोध में हैवी मेटल होने की बात तो सामने आई ही, आक्सीजन की मात्रा भी बेहद कम मिली। स्थिति अब और बिगड़ती जा रही है। पिछले दिनों विश्वविद्यालय के एनिमल साइंस विभाग में हुए शोध में रामगंगा के पानी में 3.84 मिलीलीटर प्रति लीटर डीजॉल्व आक्सीजन (डीओ)की मात्रा मिली थी। जबकि इसकी सामान्य मात्रा 7-8 के बीच में होनी चाहिए।
कानपुर विवि की कुलपति और रामगंगा पर रिसर्च करने वाली प्रोफेसर नीलिमा गुप्ता कहती हैं कि यूजीसी के मेजर रिसर्च प्रोजेक्ट के तहत कालाघाट, दसवांघाट, कटकर, मुरादाबाद, चौबारी, जलालनगर, कन्नौज समेत कई जगह से लिए गए सैंपल में डीओ काफी कम मिला। बरेली में डीओ 3.84 मिलीलीटर प्रति लीटर मिली, जबकि मुरादाबाद में डीओ मात्र 0.81 थी। क्लोराइड चौबारी में 97.84 मिलीलीटर प्रति लीटर मिला। ये पानी की कठोरता दर्शाता है। नदियों में जलीय जीव कई तरह की बीमारियों से ग्रस्त होकर मर रहे हैं। अब इसकी स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। रामगंगा, नकटिया, किला आदि नदियों की स्थिति ज्यादा खराब है।
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गंगा में खोजे जाएंगे हानिकारक प्रोटोजोआ
एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के एनिमल साइंस विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर नीलिमा गुप्ता ने बरेली में राम गंगा और उसकी सहायक नदियों में कई बड़े प्रोजेक्ट पर काम किया है। अब वह हुगली से लेकर कोलकाता तक गंगा के पानी में सूक्ष्मजीवी प्रोटोजोआ पर रिसर्च करेंगी। वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से उनको प्रोजेक्ट मिला है। उन्होंने बताया कि प्रोटोजोआ (प्रजीवगण) इंसानों और जंतुओं में कई तरह की होने वाली बीमारी का कारण बनते हैं। यह एक ऐसे प्राणियों का संघ है, जो एक कोशीय होते हैं। इसकी 30 हजार किस्में पाई जाती हैं। गंगा का पानी काफी प्रदूषित है। इसमें इन सूक्ष्म जीवों की संख्या ज्यादा मिल सकती है, जो हानिकारक हैं।
दो दिन बाद छाएंगे बादल... बढ़ेगी ठंड
कुछ दिन से धूप खिल रही है, लेकिन दो दिन बाद घने बादल छा सकते हैं। इससे ठंड बढ़ेगी, हालांकि बारिश की संभावना नहीं है। पिछले दो दिन से तापमान बढ़ा था, लेकिन सोमवार को तापमान नीचे आया। सोमवार को अधिकतम तापमान 25.1 और न्यूनतम 12.3 डिग्री सेल्सियस रहा। वहीं रविवार को अधिकतम तापमान 28 और न्यूनतम 13.3 डिग्री था। मौसम वैज्ञानिक डॉ. एचएस कुशवाहा के अनुसार दो दिन तक मौसम साफ रहेगा, लेकिन उसके बाद बादल छाने की उम्मीद है। बारिश नहीं होगी, लेकिन ठंड बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि अधिकतम पारा 25 से नीचे और न्यूनतम पारा 10 डिग्री से नीचे आ सकता है।
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विशेषज्ञों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों से रामगंगा और आसपास की अन्य नदियों में हुए शोध में हैवी मेटल होने की बात तो सामने आई ही, आक्सीजन की मात्रा भी बेहद कम मिली। स्थिति अब और बिगड़ती जा रही है। पिछले दिनों विश्वविद्यालय के एनिमल साइंस विभाग में हुए शोध में रामगंगा के पानी में 3.84 मिलीलीटर प्रति लीटर डीजॉल्व आक्सीजन (डीओ)की मात्रा मिली थी। जबकि इसकी सामान्य मात्रा 7-8 के बीच में होनी चाहिए।
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कानपुर विवि की कुलपति और रामगंगा पर रिसर्च करने वाली प्रोफेसर नीलिमा गुप्ता कहती हैं कि यूजीसी के मेजर रिसर्च प्रोजेक्ट के तहत कालाघाट, दसवांघाट, कटकर, मुरादाबाद, चौबारी, जलालनगर, कन्नौज समेत कई जगह से लिए गए सैंपल में डीओ काफी कम मिला। बरेली में डीओ 3.84 मिलीलीटर प्रति लीटर मिली, जबकि मुरादाबाद में डीओ मात्र 0.81 थी। क्लोराइड चौबारी में 97.84 मिलीलीटर प्रति लीटर मिला। ये पानी की कठोरता दर्शाता है। नदियों में जलीय जीव कई तरह की बीमारियों से ग्रस्त होकर मर रहे हैं। अब इसकी स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। रामगंगा, नकटिया, किला आदि नदियों की स्थिति ज्यादा खराब है।
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गंगा में खोजे जाएंगे हानिकारक प्रोटोजोआ
एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के एनिमल साइंस विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर नीलिमा गुप्ता ने बरेली में राम गंगा और उसकी सहायक नदियों में कई बड़े प्रोजेक्ट पर काम किया है। अब वह हुगली से लेकर कोलकाता तक गंगा के पानी में सूक्ष्मजीवी प्रोटोजोआ पर रिसर्च करेंगी। वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से उनको प्रोजेक्ट मिला है। उन्होंने बताया कि प्रोटोजोआ (प्रजीवगण) इंसानों और जंतुओं में कई तरह की होने वाली बीमारी का कारण बनते हैं। यह एक ऐसे प्राणियों का संघ है, जो एक कोशीय होते हैं। इसकी 30 हजार किस्में पाई जाती हैं। गंगा का पानी काफी प्रदूषित है। इसमें इन सूक्ष्म जीवों की संख्या ज्यादा मिल सकती है, जो हानिकारक हैं।
दो दिन बाद छाएंगे बादल... बढ़ेगी ठंड
कुछ दिन से धूप खिल रही है, लेकिन दो दिन बाद घने बादल छा सकते हैं। इससे ठंड बढ़ेगी, हालांकि बारिश की संभावना नहीं है। पिछले दो दिन से तापमान बढ़ा था, लेकिन सोमवार को तापमान नीचे आया। सोमवार को अधिकतम तापमान 25.1 और न्यूनतम 12.3 डिग्री सेल्सियस रहा। वहीं रविवार को अधिकतम तापमान 28 और न्यूनतम 13.3 डिग्री था। मौसम वैज्ञानिक डॉ. एचएस कुशवाहा के अनुसार दो दिन तक मौसम साफ रहेगा, लेकिन उसके बाद बादल छाने की उम्मीद है। बारिश नहीं होगी, लेकिन ठंड बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि अधिकतम पारा 25 से नीचे और न्यूनतम पारा 10 डिग्री से नीचे आ सकता है।