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छत से गिरकर हो गई छह साल बच्चे की मौत
बरेली
Updated Mon, 01 Feb 2016 01:08 AM IST
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बरेली। होनी को जो मंजूर था, वो तो हो गया लेकिन मासूम शुभ के माता-पिता को यह अफसोस रह गया कि अगर उनके घर के जीने की रेलिंग होती तो शायद उनका छह साल का बेटा सही-सलामत होता। खेलते समय घर के जीने से सीधे आंगन में गिर जाने से मासूम की जान चली गई। वह सैदपुर हाकिन्स के पास स्थित बालाजी बिहार कालोनी में रहने वाले वाजपेयी परिवार का इकलौता बेटा और दो बहनों का अकेला भाई था। छीपीटोला स्थित श्री सिद्धबाबा सरस्वती शिशु मंदिर में नर्सरी का छात्र शुभ मेधावी भी था। शुक्रवार को शाम छह बजे वह अपनी बड़ी और छोटी बहनों के साथ घर की छत पर खेल रहा था। भागते समय अचानक पैर फिसलने से वह जीने से होता हुआ सीधे घर के आंगन में गिर गया। बेहोश बेटे को लेकर परिवार वाले एक अस्पताल में लेकर भागे लेकिन डाक्टरों ने उसको मृत घोषित कर दिया। सिर में गंभीर चोट लगने से मासूम की मौत हो गई। शनिवार को उसकी अंत्येष्टि कर दी गई। बच्चे की मौत पर घर में कोहराम मचा हुआ है। 10 फरवरी को उसका बर्थ डे मनाने की तैयारी चल रही थी।
शुभ की मौत के बाद सारे परिजन और रिश्ते-नातेदार शोकाकुल हैं। सबको जीने की रेलिंग न होने का अफसोस है। शुभ के पिता तुषार वाजपेयी सेल्समैन हैं। उनका भी मानना है कि अगर जीने में रेलिंग लगी होती तो शुभ सीधे नीचे नहीं गिरता। इससे उसको इतनी ज्यादा चोट नहीं लगती कि मौत हो जाती। बेहद अफसोसजनकर यह घटना बाकी अभिभावकों को बच्चों की सुरक्षा के प्रति जागरूक करती है। घर के जीने की रेलिंग और छत की पर्याप्त बाउंड्रीवॉल बेहद जरूरी है ताकि सुरक्षा के प्रति नासमझ बच्चों की जान जोखिम न पड़ने पाए। शुभ के निधन पर उसके विद्यालय में शोकसभा करके सारे शिक्षकों और विद्यार्थियों ने शोक संवेदना प्रकट की। प्रिंसिपल मनोज कुमार शर्मा ने सारे बच्चों को सुरक्षा के प्रति सचेत किया। कहा कि खेलने और राह चलने के समय वह सुरक्षा के उपायों के प्रति न सिर्फ खुद सजग रहें बल्कि अभिभावकों और बाकी लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करें।
रहें सावधान
1. जिस घर की छत पर रेलिंग न पड़ी हो वहां बच्चों को न भेजें
2. जीना बनने के साथ ही साइड रेलिंग जरूर लगवाएं
3. रेलिंग के बीच का गैप किसी भी हाल में न रखें
4. छत पर अगर रोशनी के लिए गैप छोड़ा हो तो ग्रील जरूर लगाएं
5. बच्चे कहीं भी खेलें उनपर नजर जरूर रखें
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शुभ की मौत के बाद सारे परिजन और रिश्ते-नातेदार शोकाकुल हैं। सबको जीने की रेलिंग न होने का अफसोस है। शुभ के पिता तुषार वाजपेयी सेल्समैन हैं। उनका भी मानना है कि अगर जीने में रेलिंग लगी होती तो शुभ सीधे नीचे नहीं गिरता। इससे उसको इतनी ज्यादा चोट नहीं लगती कि मौत हो जाती। बेहद अफसोसजनकर यह घटना बाकी अभिभावकों को बच्चों की सुरक्षा के प्रति जागरूक करती है। घर के जीने की रेलिंग और छत की पर्याप्त बाउंड्रीवॉल बेहद जरूरी है ताकि सुरक्षा के प्रति नासमझ बच्चों की जान जोखिम न पड़ने पाए। शुभ के निधन पर उसके विद्यालय में शोकसभा करके सारे शिक्षकों और विद्यार्थियों ने शोक संवेदना प्रकट की। प्रिंसिपल मनोज कुमार शर्मा ने सारे बच्चों को सुरक्षा के प्रति सचेत किया। कहा कि खेलने और राह चलने के समय वह सुरक्षा के उपायों के प्रति न सिर्फ खुद सजग रहें बल्कि अभिभावकों और बाकी लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करें।
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रहें सावधान
1. जिस घर की छत पर रेलिंग न पड़ी हो वहां बच्चों को न भेजें
2. जीना बनने के साथ ही साइड रेलिंग जरूर लगवाएं
3. रेलिंग के बीच का गैप किसी भी हाल में न रखें
4. छत पर अगर रोशनी के लिए गैप छोड़ा हो तो ग्रील जरूर लगाएं
5. बच्चे कहीं भी खेलें उनपर नजर जरूर रखें