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वक्फ संशोधन बिल: बरेलवी उलमा को किया गया नजरअंदाज, जेपीसी पर मौलाना शहाबुद्दीन का आरोप

Wed, 22 Jan 2025 05:18 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Wed, 22 Jan 2025 05:18 PM IST
सार

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने वक्फ में संशोधन करने के लिए गठित जेपीसी पर सवाल उठाए हैं। मौलाना ने कमेटी पर बरेलवी उलमा को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। 

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waqf amendment bill Maulana Shahabuddin razvi says JPC committee ignored Barelvi Ulema
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी - फोटो : वीडियो ग्रैब

विस्तार

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि केंद्र सरकार ने वक्फ में संशोधन के लिए एक बिल संसद में पेश किया था, उस पर सहमति न बन पाने की वजह से जेपीसी का गठन किया गया। जिसके अध्यक्ष जगदंबिका पाल बनाए गए हैं। जबसे जेपीसी का गठन हुआ, उस वक्त से लेकर अब तक देश के विभिन्न हिस्सों में बैठक कर चुके हैं। जिसमें खासतौर पर दिल्ली, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार और आखिरी बैठक लखनऊ में की। मगर उन्होंने बरेलवी उलमा और बरेलवी संगठनों को नजरअंदाज किया। किसी भी बैठक में नहीं बुलाया। ये निहायत ही दुर्भाग्यपूर्ण रवैया है। 

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80 फीसद हैं बरेलवी मुसलमान
मौलाना ने कहा कि देश की मुस्लिम आबादी के हिसाब से अगर देखें तो सुन्नी सूफी बरेलवी मुसलमानों की आबादी बहुसंख्यक हैं। ये लगभग 80 फीसद है। जगदंबिका पाल ने लखनऊ समेत सभी जगहों पर बरेलवी उलमा और बरेलवी संगठनों को नजरअंदाज किया है। इससे जाहिर होता है कि उनकी नजर में बरेलवी मुसलमानों की कोई अहमियत नहीं है। वो सिर्फ चंद फीसदी मुस्लिम संगठनों से बात करके अपना काम पूरा कर देना चाहते हैं। ये एक तरह से एक विशेष फिरके को बढ़ावा देना और इंसाफ के खिलाफ कार्य करना है।
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एकतरफा कहलाएगी रिपोर्ट- मौलाना 
शहाबुद्दीन रजवी ने ये भी कहा कि बरेलवी उलमा उनसे बातचीत करके अपना पक्ष रखना चाहते थे। इस संबंध में उनको पत्र भी लिखा, मगर उन्होंने न मुलाकात का समय दिया और न ही पत्र का कोई जवाब दिया। उनके काम करने की कार्यशैली जेपीसी के अध्यक्ष की हैसियत से बेहतर नहीं कही जा सकती। इस स्थिति में वक्फ संशोधन बिल पर संसद में पेश की जाने वाली रिपोर्ट एकतरफा कहलाएगी। उनको अपने काम करने के तौर तरीकों पर पुनर्विचार करना चाहिए।  

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