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फिर तो वीरपाल भी डटे रहेंगे
बरेली।
Updated Sat, 07 Jan 2017 01:59 AM IST
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veerpal is still fighting
- फोटो : veerpal is still fighting
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समाजवादी पार्टी में शीर्ष स्तर पर चल रही पिता पुत्र में सुलह की कोशिशों के बीच बरेली में टिकटार्थी और आम कार्यकर्ता मायूस हैं। निचले स्तर पर बंट चुके कुछ कार्यकर्ताओं के लिए सुलह होना भी उतना कष्टकारी है जितना बिखरना। नेता जी को ही कुल का सिरमौर मानकर पुन: ससम्मान ताज सौंपने को लोग तैयार हैं लेकिन शिवपाल यादव, रामगोपाल यादव और अमर सिंह की भूमिकाओं पर बात अटकी पड़ी है। फिलहाल यहां यही संदेश पहुंच रहा है कि पिता-पुत्र एक होंगे। इसका एक आशय यह भी लिया जा रहा है कि बाकी बड़े नेताओं का कुछ भी हो मुलायम को फिर से ताज मिलने का मतलब सीएम की नाराजगी के बावजूद वीरपाल बरेली में अपनी जगह डटे रह सकते हैं। इसकी वजह है कि उनकी जगह उपयुक्त व्यक्ति अभी मिल नहीं पा रहा है। कुछ लोग जिम्मेदारी लेने से बच रहे हैं तो कुछ दावा करने वालों की काबिलियत पर नए प्रदेश अध्यक्ष को भी भरोसा नहीं हो पा रहा है। वीरपाल समर्थक कह रहे हैं कि उन्होंने सीएम के खिलाफ भी कभी कुछ नहीं कहां हां इतना जरूर रहे हैं कि वह नेता जी के ही साथ रहेंगे। ऐसे में सीएम भी उनके बारे में नरम पड़ सकते हैं। हां प्रत्याशियों के बारे में उनकी संस्तुति किनारे की जा सकती है।
विधायक शहजिल इस्लाम ने देर शाम पार्टी में सुलह होने की पुष्टि करते हुए कहा कि नेताजी ने टिकट बांटने से लेकर संगठन में भी सारे अधिकारी सीएम को दे दिए हैं। अमर सिंह और शिवपाल सिंह दोनों सीएम के काम में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। इस बात पर पार्टी में सहमति बन गई है। एक या दो दिन में दोनों पक्ष चुनाव आयोग में हलफनामा देंगे। पार्टी को साइकिल चुनाव चिह्न फिर से मिल जाएगा। भगवत सरन गंगवार और अताउर रहमान भी दो दिन पहले ही लौट चुके हैं उन्हें क्षेत्र में काम करने और धैर्य बनाए रखने को कहा गया है। अपराह्न चार बजे चैनलों ने बताया कि कैबिनेट मंत्री आजम खां लखनऊ में मुलायम सिंह यादव से मिलने गए हैं। इसके चलते नेताजी ने चार बजे होने वाली अपनी प्रेस कान्फ्रेंस रद्दद कर दी। इसके बाद सपाईयों के बीच फिर तरह-तरह की चर्चाएं होने लगीं। हालांकि देर रात तक सुलह समझौते से किसी निष्कर्ष पर पहुंचने की पुष्टि नहीं हुई। सीएम समर्थक विधायक शहजिल इस्लाम ने देर शाम पुष्टि की कि नेताजी सीएम को विधानसभा के टिकट बांटने से लेकर संगठन तक के पूरे अधिकार देने पर सहमत हो गए हैं। अमर सिंह और शिवपाल सिंह भी इस फार्मूले पर सहमत हैं। अब पार्टी का विवाद समाप्त होने की ओर है। सीएम एक या दो दिन के अंदर सपा के प्रत्याशियों की नई सूची जारी करेंगे। हालांकि इन बातों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी।
सोमवार हो सकता है फैसला - सपा का नया जिलाध्यक्ष आएगा कि पुराना ही रहेगा इसका फैसला सोमवार तक होने के संकेत मिले हैं। इस फैसले में नवाबगंज विधायक भगवतसरन गंगवार और बहेड़ी विधायक अताउर्रहमान की भूमिका महत्वपूर्ण रहने वाली है। दावेदार राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव, सीएम अखिलश्ेा यादव के अलावा प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम तक जुगाड़ लगा रहे हैं। बताया जाता है कि नई सपा के नेता अध्यक्षी किसी ऐसे महत्वपूर्ण नेता को ये पद सौंपना चाहता है जो नौ सीटों पर दमदार चुनाव लड़ाने में अपनी भूमिका निभा सके। इसी पर मंथन चल रहा है।
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विधायक शहजिल इस्लाम ने देर शाम पार्टी में सुलह होने की पुष्टि करते हुए कहा कि नेताजी ने टिकट बांटने से लेकर संगठन में भी सारे अधिकारी सीएम को दे दिए हैं। अमर सिंह और शिवपाल सिंह दोनों सीएम के काम में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। इस बात पर पार्टी में सहमति बन गई है। एक या दो दिन में दोनों पक्ष चुनाव आयोग में हलफनामा देंगे। पार्टी को साइकिल चुनाव चिह्न फिर से मिल जाएगा। भगवत सरन गंगवार और अताउर रहमान भी दो दिन पहले ही लौट चुके हैं उन्हें क्षेत्र में काम करने और धैर्य बनाए रखने को कहा गया है। अपराह्न चार बजे चैनलों ने बताया कि कैबिनेट मंत्री आजम खां लखनऊ में मुलायम सिंह यादव से मिलने गए हैं। इसके चलते नेताजी ने चार बजे होने वाली अपनी प्रेस कान्फ्रेंस रद्दद कर दी। इसके बाद सपाईयों के बीच फिर तरह-तरह की चर्चाएं होने लगीं। हालांकि देर रात तक सुलह समझौते से किसी निष्कर्ष पर पहुंचने की पुष्टि नहीं हुई। सीएम समर्थक विधायक शहजिल इस्लाम ने देर शाम पुष्टि की कि नेताजी सीएम को विधानसभा के टिकट बांटने से लेकर संगठन तक के पूरे अधिकार देने पर सहमत हो गए हैं। अमर सिंह और शिवपाल सिंह भी इस फार्मूले पर सहमत हैं। अब पार्टी का विवाद समाप्त होने की ओर है। सीएम एक या दो दिन के अंदर सपा के प्रत्याशियों की नई सूची जारी करेंगे। हालांकि इन बातों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी।
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सोमवार हो सकता है फैसला - सपा का नया जिलाध्यक्ष आएगा कि पुराना ही रहेगा इसका फैसला सोमवार तक होने के संकेत मिले हैं। इस फैसले में नवाबगंज विधायक भगवतसरन गंगवार और बहेड़ी विधायक अताउर्रहमान की भूमिका महत्वपूर्ण रहने वाली है। दावेदार राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव, सीएम अखिलश्ेा यादव के अलावा प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम तक जुगाड़ लगा रहे हैं। बताया जाता है कि नई सपा के नेता अध्यक्षी किसी ऐसे महत्वपूर्ण नेता को ये पद सौंपना चाहता है जो नौ सीटों पर दमदार चुनाव लड़ाने में अपनी भूमिका निभा सके। इसी पर मंथन चल रहा है।
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