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विमको को बचाने के लिए श्रमिक संगठन लामबंद
बरेली
Updated Sun, 28 Dec 2014 09:09 PM IST
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सीबीगंज स्थित विमको फैक्ट्री बंद करने की साजिश के खिलाफ ट्रेड यूनियन लामबंद हो गई है। अलग-अलग सभाओं में वक्ताओं ने जनप्रतिनिधियों पर तीखे प्रहार किए। उधर, विमको संघर्ष समिति ने सोमवार से नई रणनीति बनाने की तैयारी कर ली है।
ऐतिहासिक माचिस फैक्ट्री बंद होने की सुगबुगाहट पर ट्रेड यूनियन सक्रिय हो गई हैं। प्रमुख यूनियन नेताओं ने रविवार को विभिन्न स्थानों पर सभाएं आयोजित कीं। इसमें कारखाने में कार्यरत नौ सौ श्रमिकों के भविष्य पर चिंता जताई गई। वक्ताओं ने एक स्वर से कहा कि आईटीसी के मंसूबे पूरे नहीं होने दिए जाएंगे। इंटक, बीएमएस, भारतीय खेत मजदूर यूनियन और कम्यूनिस्ट पार्टी आदि नेताओं ने कहा कि पूंजीपतियों के पैसे से चुनाव लड़ने वाले जनप्रतिनिधियों ने इस मामले में चुप्पी साध कर साफ कर दिया है कि वे पूरी तरह श्रमिक विरोधी हैं। ट्रेड यूनियन नेताओं ने कहा कि वे ऐसे राजनेताओं को बेनकाब करें जो विमको बंद कराना चाहते हैं।
बिजली कर्मचारी और बीएमएस के प्रांतीय नेता राजेंद्र प्रसाद घिल्डियाल ने कहा है कि पूंजीपतियों की नौकरी करने वालों ने जिले में कई बड़े उद्योग बंद करा दिए। अब उनकी निगाह विमको पर जम गई है। कैंफर भी उनके एजेंडे में शामिल है। रबड़ फैक्ट्री और आईटीआर जैसे प्रमुख कारखानों में तालाबंदी कराने में कुछ राजनेता ही शामिल रहे हैं। अब आईटीसी का एजेंट बनकर चुप बैठे हैं। प्रदेश सरकार की नीतियों के चलते ही प्रदेश में नए उद्योग नहीं लग पा रहे हैं। इंटक के प्रदेश महामंत्री सतीश मेहता ने कहा है कि जिले में कई उद्योग बंद कराने में श्रमिकों को आरोपित करने वाले राजनेता औद्योगिक वातावरण नष्ट करने में जुटे हैं, लेकिन ट्रेड यूनियनें एकज़ुट होकर सड़कों पर उतरेंगी।
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खेत मजदूर यूनियन जिला मंत्री राजीव शांत ने प्रदेश सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि वह औद्योगिक वातावरण विरोधी है। जगदीश गंगवार, पीएल शर्मा, आबिद हुसैन सुनील कुमार, लक्ष्मण सिंह आदि ने कहा कि सभी ट्रेड यूनियन विमको श्रमिकों के साथ हैं। उधर, विमको संघर्ष समिति ने कहा है कि कारखाना बचाने के लिए सोमवार को नई रणनीति बनायी जाएगी।
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ऐतिहासिक माचिस फैक्ट्री बंद होने की सुगबुगाहट पर ट्रेड यूनियन सक्रिय हो गई हैं। प्रमुख यूनियन नेताओं ने रविवार को विभिन्न स्थानों पर सभाएं आयोजित कीं। इसमें कारखाने में कार्यरत नौ सौ श्रमिकों के भविष्य पर चिंता जताई गई। वक्ताओं ने एक स्वर से कहा कि आईटीसी के मंसूबे पूरे नहीं होने दिए जाएंगे। इंटक, बीएमएस, भारतीय खेत मजदूर यूनियन और कम्यूनिस्ट पार्टी आदि नेताओं ने कहा कि पूंजीपतियों के पैसे से चुनाव लड़ने वाले जनप्रतिनिधियों ने इस मामले में चुप्पी साध कर साफ कर दिया है कि वे पूरी तरह श्रमिक विरोधी हैं। ट्रेड यूनियन नेताओं ने कहा कि वे ऐसे राजनेताओं को बेनकाब करें जो विमको बंद कराना चाहते हैं।
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बिजली कर्मचारी और बीएमएस के प्रांतीय नेता राजेंद्र प्रसाद घिल्डियाल ने कहा है कि पूंजीपतियों की नौकरी करने वालों ने जिले में कई बड़े उद्योग बंद करा दिए। अब उनकी निगाह विमको पर जम गई है। कैंफर भी उनके एजेंडे में शामिल है। रबड़ फैक्ट्री और आईटीआर जैसे प्रमुख कारखानों में तालाबंदी कराने में कुछ राजनेता ही शामिल रहे हैं। अब आईटीसी का एजेंट बनकर चुप बैठे हैं। प्रदेश सरकार की नीतियों के चलते ही प्रदेश में नए उद्योग नहीं लग पा रहे हैं। इंटक के प्रदेश महामंत्री सतीश मेहता ने कहा है कि जिले में कई उद्योग बंद कराने में श्रमिकों को आरोपित करने वाले राजनेता औद्योगिक वातावरण नष्ट करने में जुटे हैं, लेकिन ट्रेड यूनियनें एकज़ुट होकर सड़कों पर उतरेंगी।
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खेत मजदूर यूनियन जिला मंत्री राजीव शांत ने प्रदेश सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि वह औद्योगिक वातावरण विरोधी है। जगदीश गंगवार, पीएल शर्मा, आबिद हुसैन सुनील कुमार, लक्ष्मण सिंह आदि ने कहा कि सभी ट्रेड यूनियन विमको श्रमिकों के साथ हैं। उधर, विमको संघर्ष समिति ने कहा है कि कारखाना बचाने के लिए सोमवार को नई रणनीति बनायी जाएगी।