{"_id":"67e31a75a4aa6734480dd5b7","slug":"villagers-showed-pieces-of-cylinders-that-fell-in-their-houses-bareilly-news-c-4-lko1064-606298-2025-03-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bareilly News: ग्रामीणों ने दिखाए घरों में गिरे सिलिंडरों के टुकड़े","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bareilly News: ग्रामीणों ने दिखाए घरों में गिरे सिलिंडरों के टुकड़े
विज्ञापन
बिथरी चैनपुर। सोमवार को रजऊ परसपुर की गैस एजेंसी के पास हुए भीषण अग्निकांड से जो दहशत बनी, वह दूसरे दिन भी लोगों के जेहन में कहीं न कहीं बरकरार थी। कई घरों में धमाके से फटे सिलिंडरों के टुकड़े गिरे। ग्रामीणों ने दहशत के उस मंजर की कहानी सुनाई। कई ग्रामीण खेतों में सिलिंडर खोजते रहे।
गांव निवासी रामबेरी पत्नी कृष्णपाल ने बताया कि सिलिंडर का एक भारी टुकड़ा उनके घर की छत पर गिरा था। तब उन्होंने बच्चों को घर से निकाला। जब इस तरह के हादसे की जानकारी आसपास के लोगों ने दी तो वह लोग दो घंटे तक घर से दूर पेड़ के नीचे जाकर बैठे। अमित व अचल राजपूत ने बताया कि उनका घर गोदाम से करीब 600 मीटर दूर है। उनकी छत पर करीब आधा अधजला सिलिंडर गिरा तो दहशत में आ गए। खासतौर से घर की महिलाओं में ज्यादा डर था। छोटे बच्चे निकलकर भाग रहे थे तो उन्हें एक सुरक्षित जगह बैठाया। उन्होंने घर के आंगन व छतों पर गिरे सिलिंडरों के टुकड़े दिखाए। शैलेश शर्मा ने बताया कि उनका केंद्र गोदाम के बिल्कुल करीब है जहां नौ निराश्रित लोग रहते हैं। उन्हें गांव में स्थित अपने घर में ले जाकर सुरक्षित किया। कहा कि समझदारी से किसी भी तरह की जनहानि नहीं हुई। संवाद
महिलाएं बच्चे देखने पहुंचे मलबा
- सोमवार को जहां धमाकों की दहशत से आधा गांव खाली हो गया था, वहीं मंगलवार को मगनपुर व रजऊ परसपुर की महिलाएं गोदाम पर पहुंची। महिलाओं में मलबा और ट्रक का हाल देखने को लेकर कौतुहल था। एजेंसी के कई कर्मचारी भी दूसरे दिन आ गए। इन्होंने ठेली ले जाकर खेतों से सिलिंडरों व ट्रक के अवशेष इकट्ठा किए।
विज्ञापन
विज्ञापन
गांव निवासी रामबेरी पत्नी कृष्णपाल ने बताया कि सिलिंडर का एक भारी टुकड़ा उनके घर की छत पर गिरा था। तब उन्होंने बच्चों को घर से निकाला। जब इस तरह के हादसे की जानकारी आसपास के लोगों ने दी तो वह लोग दो घंटे तक घर से दूर पेड़ के नीचे जाकर बैठे। अमित व अचल राजपूत ने बताया कि उनका घर गोदाम से करीब 600 मीटर दूर है। उनकी छत पर करीब आधा अधजला सिलिंडर गिरा तो दहशत में आ गए। खासतौर से घर की महिलाओं में ज्यादा डर था। छोटे बच्चे निकलकर भाग रहे थे तो उन्हें एक सुरक्षित जगह बैठाया। उन्होंने घर के आंगन व छतों पर गिरे सिलिंडरों के टुकड़े दिखाए। शैलेश शर्मा ने बताया कि उनका केंद्र गोदाम के बिल्कुल करीब है जहां नौ निराश्रित लोग रहते हैं। उन्हें गांव में स्थित अपने घर में ले जाकर सुरक्षित किया। कहा कि समझदारी से किसी भी तरह की जनहानि नहीं हुई। संवाद
विज्ञापन
महिलाएं बच्चे देखने पहुंचे मलबा
- सोमवार को जहां धमाकों की दहशत से आधा गांव खाली हो गया था, वहीं मंगलवार को मगनपुर व रजऊ परसपुर की महिलाएं गोदाम पर पहुंची। महिलाओं में मलबा और ट्रक का हाल देखने को लेकर कौतुहल था। एजेंसी के कई कर्मचारी भी दूसरे दिन आ गए। इन्होंने ठेली ले जाकर खेतों से सिलिंडरों व ट्रक के अवशेष इकट्ठा किए।
विज्ञापन