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उमड़ा रजा के दीवानों का रेला
बरेली
Updated Fri, 19 Dec 2014 10:38 PM IST
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उर्स-ए-रजवी के आखिरी दिन इस्लामिया कॉलेज के मैदान में बने मंच पर आला हजरत फाजिले बरेलवी के उर्स की आखिरी तकरीर चल रही थी। सुबह से जायरीन का मजमा एकत्र होता रहा। शहर की कोई गली कोई सड़क ऐसी नहीं जहां से अकीदतमंदों की गुजर न हो रही हो। दोपहर दो बजते बजते उर्स स्थल और आसपास की सड़कों और गलियों में सिर्फ रजा के दीवानों का रेला ही दिखाई देने लगा। जैसे ही कुल शरीफ की शुरुआत हुई जो जहां था उसके कदम वहीं रुक गए। इस दौरान कुदरत भी मेहरबान हो गई। रात से ठिठुर रहे लोगों को सूरज की हल्की से चमक ने काफी राहत दी, और लोग आराम से कुल की रस्म में शामिल हो सके।
उर्स के अंतिम दिन जलसे का आगाज कारी साजिद-उर-रहमान ने तिलावते कुरान पाक से किया। सज्जादानशीन अलहाज मौलाना मोहम्मद सुब्हान रजा खां (सुब्हानी मियां) की सरपरस्ती, नायब सज्जादा मौलाना अहसन रजा खां कादरी (अहसन मियां) की सदारत और सय्यद आसिफ मियां की निगरानी में उलमा की तकरीर की सिलसिला शुरू हुआ।
इसमें इंलैंड से आए मौलाना फरोग उल कादरी ने कहा कि आला हजरत का मसलक ही हक पर है। आज सारी दुनिया में आला हजरत का परचम लहरा रहा है। उन्होंने आला हजरत को शांति के लिए नोबेल पुरस्कार देने की मांग उठाई। पाकिस्तान में बच्चों के कत्ल पर निंदा करते हुए कहा कि किसी एक का कत्ल करना पूरी इंसानियत का कत्ल है। इस्लाम का आतंकवाद से कोई ताल्लुक नहीं। नबीरे आला हजरत अरसलान रजा खां ने कहा कि हमें उन लोगों से मिलना जुलना बंद कर देना चाहिए जो इस्लाम में रह कर इस्लाम के खिलाफ काम कर रहे हैं। मौलाना जिक्र उल्ला ने आला हजरत कारनामों पर रोशनी डाली।
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इसी तरह मौलाना मुख्तार ने कहा कि बरेली रजवियों का ही मरकज नहीं बल्कि अहले सुन्नत का मरकज है। मुफ्ती सलीम नूरी ने कहा नबी-ए-करीम के मुताबिक अपनी जिंदगी बसर करें। कारी इकबाल ने आला हजरत को एक अजीम साइंस दां बताया। मुफ्ती शहरयार खां (बिहार) ने मुसलमानों की दीनी तालीम पर जोर दिया। साथ ही कहा कि लालच या डरा धमका कर किसी का धर्म परिवर्तन नही कराया जा सकता। मुफ्ती रिजवान नूरी ने सुन्नी मुसलमानों के इत्तेहाद पर जोर दिया।
इनके अलावा कारी अमानत रसूल ने शाहजी मियां (पीलीभीत), मौलाना जाहिद रजा, मौलाना गुलफाम रामपुरी, मौलाना सलीम रजा, मुफ्ती अलाउद्दीन, मौलाना असलम टनकपुरी आदि ने अपनी तकरीर में समाज से जुड़े तमाम मुद्दों पर रोशनी डाली।
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उर्स के अंतिम दिन जलसे का आगाज कारी साजिद-उर-रहमान ने तिलावते कुरान पाक से किया। सज्जादानशीन अलहाज मौलाना मोहम्मद सुब्हान रजा खां (सुब्हानी मियां) की सरपरस्ती, नायब सज्जादा मौलाना अहसन रजा खां कादरी (अहसन मियां) की सदारत और सय्यद आसिफ मियां की निगरानी में उलमा की तकरीर की सिलसिला शुरू हुआ।
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इसमें इंलैंड से आए मौलाना फरोग उल कादरी ने कहा कि आला हजरत का मसलक ही हक पर है। आज सारी दुनिया में आला हजरत का परचम लहरा रहा है। उन्होंने आला हजरत को शांति के लिए नोबेल पुरस्कार देने की मांग उठाई। पाकिस्तान में बच्चों के कत्ल पर निंदा करते हुए कहा कि किसी एक का कत्ल करना पूरी इंसानियत का कत्ल है। इस्लाम का आतंकवाद से कोई ताल्लुक नहीं। नबीरे आला हजरत अरसलान रजा खां ने कहा कि हमें उन लोगों से मिलना जुलना बंद कर देना चाहिए जो इस्लाम में रह कर इस्लाम के खिलाफ काम कर रहे हैं। मौलाना जिक्र उल्ला ने आला हजरत कारनामों पर रोशनी डाली।
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इसी तरह मौलाना मुख्तार ने कहा कि बरेली रजवियों का ही मरकज नहीं बल्कि अहले सुन्नत का मरकज है। मुफ्ती सलीम नूरी ने कहा नबी-ए-करीम के मुताबिक अपनी जिंदगी बसर करें। कारी इकबाल ने आला हजरत को एक अजीम साइंस दां बताया। मुफ्ती शहरयार खां (बिहार) ने मुसलमानों की दीनी तालीम पर जोर दिया। साथ ही कहा कि लालच या डरा धमका कर किसी का धर्म परिवर्तन नही कराया जा सकता। मुफ्ती रिजवान नूरी ने सुन्नी मुसलमानों के इत्तेहाद पर जोर दिया।
इनके अलावा कारी अमानत रसूल ने शाहजी मियां (पीलीभीत), मौलाना जाहिद रजा, मौलाना गुलफाम रामपुरी, मौलाना सलीम रजा, मुफ्ती अलाउद्दीन, मौलाना असलम टनकपुरी आदि ने अपनी तकरीर में समाज से जुड़े तमाम मुद्दों पर रोशनी डाली।