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UP Nikay Chunav: भितरघात से बिगड़ सकता है प्रत्याशियों का गणित, इस सीट पर रोचक है मुकाबला

Tue, 02 May 2023 03:03 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं Published by: मुकेश कुमार Updated Tue, 02 May 2023 03:03 PM IST
सार

बदायूं नगर पालिका सीट से प्रमुख प्रत्याशियों ने जनसंपर्क में पूरी ताकत झोंक दी है। हर कोई अपने मुताबिक जनता के बीच जाकर अपनी गोटियां फिट करने में लगा है, लेकिन टिकट न मिलने से दावेदार खेल बिगाड़ सकते हैं।  
 

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UP Nikay Chunav 2023 Badaun Nagar Palika Election contest may be interesting
निर्दलीय फात्मा रजा और कांग्रेस से माधवी साहू - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बदायूं में चुनाव की तारीख नजदीक आने के साथ ही प्रत्याशियों की भागदौड़ और जनसंपर्क बढ़ता जा रहा है। हर कोई अपने मुताबिक जनता के बीच जाकर अपनी गोटियां फिट करने में लगा है। शहर सीट पर कुछ प्रमुख प्रत्याशियों का मूवमेंट ज्यादा नजर आ रहा है तो कुछ गुपचुप तरीके से जनता का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन इसके बीच खास बात ये भी है कि हर पार्टी के भितरघाती अपने ही प्रत्याशी का गणित बिगाड़ने की कोशिश में लगे हैं। इससे मामला रोचक हो गया है।

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भाजपा- दीपमाला गोयल

बदायूं नगर पालिका सीट पर इस बार भाजपा ने दीपमाला गोयल को ही दोबारा प्रत्याशी बनाया है। दीपमाला पिछले चुनाव में भी विजयी रही थीं। हर बार की तरह इस बार भी भाजपा में टिकट के दावेदारों की संख्या ज्यादा थी। शहर सीट से 14 लोगों ने आवेदन किया था, लेकिन दीपमाला टिकट पाने में कामयाब हो गईं। 

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भाजपा जिलाध्यक्ष राजीव गुप्ता की पत्नी शुभ्रा गुप्ता, उसहैत की नगर पंचायत अध्यक्ष रह चुकी सैनरा वैश्य, रजनी मिश्रा आदि कई नाम टिकट की दावेदारों में शामिल बताए जा रहे थे, लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिल सका। ऐसे में जाहिर है कि कहीं न कहीं उनके दिल में इस बात की टीस जरूर होगी। हालांकि ऊपर से सभी भाजपा प्रत्याशी को जिताने के दावे तो कर रहे हैं, लेकिन यह भी सच है कि बाकी बचे 13 दावेदारों में से कुछ अंदरखाने प्रत्याशी को हराने की कोशिश भी करेंगे। ऐसे में दीपमाला की राह कठिन जरूर होगी।

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निर्दलीय- फात्मा रजा

निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में भाजपा प्रत्याशी के सामने पूर्व विधायक आबिद रजा की पत्नी फात्मा रजा है। फात्मा पिछले चुनाव में दूसरे नंबर पर रही थीं। तब उन्होंने सपा से चुनाव लड़ा था, लेकिन इस बार सपा ने शहर सीट पर किसी को सिंबल नहीं देकर कार्यकर्ताओं की मुश्किल बढ़ा दी है। फात्मा पिछले पांच साल में जनता के आगे आने वाली समस्याओं को दूर करने का वायदा कर रही है। 

उनके पति पूर्व विधायक आबिद तो साफ कह भी चुके हैं कि फात्मा के पालिकाध्यक्ष बनते ही सबसे पहले वे टैक्स का बोझ लोगों से कम करेंगे। ये अमीरों का हाफ और गरीबों का माफ किया जाएगा। इससे इतर यह भी सही है कि सपा कार्यकर्ताओं का वोट कहां जाएगा, यह अभी कहना मुश्किल लग रहा है। यहां भी भितरघाती मुकाबले को कड़ा बना सकते हैं।
 

निर्दलीय- नाजमी

निर्दलीय प्रत्याशी नाजमी भी चुनावी मैदान में ताल ठोक रही हैं। वह शहर निवासी सपा नेता व पूर्व जिला पंचायत सदस्य डॉ. शकील की भाभी हैं। इस बार सपा ने किसी को सिंबल तो नहीं दिया, लेकिन पिछले दिनों सपा जिलाध्यक्ष आशीष यादव ने डॉ. शकील के आवास पर जाकर उन्हें पार्टी के समर्थन की घोषणा कर दी। 

हालांकि कुछ सपा नेता निर्दलीय फात्मा रजा के साथ भी हैं लेकिन नाजमी स्वजातीय अंसारी वोटों के बल पर अपनी जीत आश्वस्त मान रही हैं। शहर में करीब 15-16 हजार अंसारी वोट का आंकड़ा है। ऐसे में वे भी इस चुनावी दौड़ में शामिल हैं। सपा का एक धड़ा भी उनकी खुलकर मदद कर रहा है।

कांग्रेस- माधवी साहू

कांग्रेस ने इस बार माधवी साहू पर दांव खेला है। माधवी भले ही अब तक कोई चुनाव न जीती हों, लेकिन इस बार भाजपा के भितरधाती व साहू समाज का वोट उन्हें लड़ाई में शामिल रखे है। साहू समाज का एक बड़ा हिस्सा भाजपा से नाराज है। उनका कहना है कि भाजपा ने हमेशा साहू समाज को उपेक्षित रखा है, जबकि साहू समाज की संख्या करीब 16 हजार है। 

समाज के नेता तो यहां तक कहते हैं कि भाजपा ने उनके समाज की संख्या छह हजार के करीब दिखाई है। ये आंकड़ा पेश करके भाजपा समाज को कमजोर करने का प्रयास कर रही है। इसका लाभ भी माधवी साहू को मिलता दिखाई दे रहा है। माधवी के अनुसार, उन्हें भाजपा के पिछले कार्यकाल से नाराज जनता का भी पूरा समर्थन मिल रहा है।
 

बसपा- संतोष कश्यप

बसपा से इस बार संतोष कश्यप मैदान में हैं। उनके पति मनोज कश्यप कई सालों से बसपा के मंडल कोऑर्डिनेटर हैं। उनके अनुसार यहां करीब 15 हजार वोट एससी वर्ग का है, जबकि करीब 12 हजार वोट कश्यप समाज का है। उनका दावा है कि इनके अलावा सभी वर्गों का समर्थन मिल रहा है। 

इसके अलावा भाजपा प्रत्याशी के पिछले कार्यकाल से नाराज लोगों के समर्थन का दावा भी उनके द्वारा किया जा रहा है। उनके अनुसार, वह और उनकी पत्नी लगातार डोर-टू डोर मतदाताओं से संपर्क साध रहे हैं और लोगों द्वारा उन्हें पूरी सपोर्ट मिल रही है। बता दें कि पिछले चुनाव में बसपा ने प्रीति साहू को अपना उम्मीदवार घोषित किया था लेकिन वह तीसरे स्थान पर रहीं थीं।

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