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यूपी बोर्ड परीक्षा: पहले ही दिन सारी व्यवस्थाएं फेल
बरेली
Updated Fri, 19 Feb 2016 01:59 AM IST
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बरेली। यूपी बोर्ड की परीक्षा के पहले ही दिन सारी व्यवस्थाएं फेल हो गईं। परीक्षार्थियों को मेज-कुर्सी पर बैठाने में विभाग फिर फेल हो गया। केंद्र व्यवस्थापकों को मिले सिम एक्टिवेट ही नहीं हो पाए, जिससे अॅानलाइन उपस्थिति भेजने की कवायद की कामयाब नहीं हो पाई। कई केंद्रों पर सीटिंग प्लान गड़बड़ मिला। एक परीक्षा केंद्र पर सचल दल के पहुंचते ही परीक्षार्थियों ने खिड़की से नकल सामाग्री फेंकी। रही सही कसर कक्ष निरीक्षकों ने पूरी कर दी। वह परीक्षा केंद्रों पर ड्यूटी करने के लिए पहुंचे ही नहीं।
बृहस्पतिवार से शुरू हुई यूपी बोर्ड परीक्षा की पहली पाली में हाईस्कूल का हिंदी का पेपर हुआ। इसमें 59988 परीक्षार्थियों को परीक्षा देना था। इसमें 6306 परीक्षार्थी अनुपस्थित पाए गए। दूसरी पाली में हुए इंटरमीडिएट के सैन्य अध्ययन के पेपर में 120 में से नौ परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे। डीआईओएस की ओर से सख्त निर्देश होने के बाद भी कई केंद्रों पर परीक्षार्थियों को फर्नीचर नहीं मिल पाए।
जब बैठाने की व्यवस्था नहीं तो यहां कैसे बना दिए केन्द्र
राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मल्लपुर सबराह में करीब पचास से ज्यादा परीक्षार्थियों ने टाट-पट्टी पर बैठकर परीक्षा दी। यहां पर बच्चे एक दूसरे से सटे हुए बैठे थे। बड़ी आसानी से एक-दूसरे की कॉपियों में ताक-झांक कर रहे थे। स्कूल कैंपस में बाहरी लोग भी घूम रहे थे। अंदर परीक्षार्थी परीक्षा दे रहे थे और परीक्षा कक्षों के बाहर से लोग खिड़की से झांक रहे थे।
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... बहेड़ी के केसर लाल भानवती इंटर कॉलेज में भी बहुत से छात्र टाट-पट्टी पर बैठे थे। रिछा के राजकीय इंटर कॉलेज में फर्नीचर की कमी की वजह से परीक्षार्थियों को दरी पर बैठकर परीक्षा देनी पड़ी। केंद्र व्यवस्थापक संजय सिंह ने बताया कि कॉलेज में फर्नीचर का अभाव है। कुछ परीक्षा कक्षों में ही फर्नीचर की व्यवस्था है।
... यही हाल आरएन टैगोर इंटर कॉलेज में भी पहुंचो। यहां पर भी परीक्षार्थियों ने जमीन पर बैठकर परीक्षा दी। भुता के अंबेडकर कन्या इंटर कॉलेज में भी परीक्षार्थियों ने बरामदे में जमीन पर बैठकर परीक्षा दी।
सीटिंग प्लान की गड़बड़ी के चलते आधे घंटे लेट हुई परीक्षा
भुता के अंबेडकर कन्या इंटर कॉलेज के परीक्षा केंद्र पर हाईस्कूल की पहली पाली में परीक्षार्थियों के सीटिंग प्लान की व्यवस्था ठीक न होने की वजह से आधे घंटे लेट पेपर मिला। सुबह साढ़े सात बजे से पेपर शुरू होना था, लेकिन आठ बजे शुरू हो पाया। इस बात को लेकर परीक्षार्थियों और अभिभावकों ने हंगामा भी किया। इसकी शिकायत थानाध्यक्ष तक भी पहुंच गई। थानाध्यक्ष गौरव सिंह यादव फोर्स के साथ मौके पर पहुंच गए और किसी तरह से मामला शांत कराया।
कई केंद्रों के केंद्र व्यवस्थापकों पर हुई कार्रवाई
बरेली। डीआईओएस के सचल दल ने शिव ज्ञान इंटर कॉलेज सीबीगंज में छापा मारा। उन्होंने देखा कि शिव ज्ञान के छात्र दूसरे परीक्षा कक्षों में बैठे हैं और दूसरे विद्यालयों के छात्र अन्य कमरों में। सीटिंग प्लान से छात्र बैठे हुए नहीं थे। बचे हुए प्रश्नपत्र आसपास फैले हुए थे। अव्यवस्था देखकर डीआईओएस ने केंद्र व्यवस्थापक को फटकारा। इसके बाद कार्रवाई करते हुए उन्होंने केंद्र व्यवस्थापक को हटा दिया। इसके अलावा सीबीगंज इंटर कॉलेज में मेडिकल लीव लेकर छुट्टी पर जाने वाले प्रधानाचार्य झम्मन लाल वहां पर घूमते हुए पाए गए। डीआईओएस गजेंद्र कुमार ने बताया कि वहां पर उनके घूमने का ही मतलब है कि वह कुछ गलत नीयत से आए होंगे। हो सकता है कि नकल भी कराना चाहते हों। डीआईओएस ने उन्हें नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
डीआईओएस को देखते ही परीक्षार्थियों ने फेंकी नकल
बरेली। बहेड़ी के शेरिया अल्पसंख्यक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय देवरनिया में डीआईओएस का सचल दल की गाड़ी जैसे ही गेट पर रुकी। परीक्षा कक्षों में बैठे परीक्षार्थियों ने नकल फेंकनी शुरू कर दी। अंदर छात्र नकल कर रहे थे, लेकिन डीआईओएस को देख बचने के लिए नकल फेंक दी। डीआईओएस ने बाहर से ही नकल के पर्चे उठाकर सील करवा दिए। अंदर जाकर उन्होंने तलाशी ली तो कोई नकल नहीं मिल पाई। एक छात्र के पास स्विच ऑफ मोबाइल मिला। उन्होंने केंद्र व्यवस्थापक और कक्ष निरीक्षकों को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है कि परीक्षा कक्ष से बाहर पर्चे कैसे फेंके गए। जवाब के बाद कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा। इसके अलावा उन्होंने मोबाइल रखने वाले छात्र को चेतावनी जारी कर अभिभावकों को भी बुलाया हैै।
चमकती घड़ी देख डिवाइस समझ बैठे शिक्षक
बरेली। साहू गोपीनाथ इंटर कॉलेज में सुबह की पाली में परीक्षा देने आई छात्राओं की शिक्षक तलाशी ले रही थीं। तलाशी के दौरान ही एक शिक्षक ने छात्रा की कलाई पर चमकती हुई घड़ी देखी। उन्होंने उस घड़ी को इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस समझ लिया। इसके बाद शिक्षक ने डांटते हुए छात्रा से वह घड़ी उतरवा ली। कहा कि यह घड़ी कुछ गड़बड़ी है, इसलिए वह इसे परीक्षा कक्ष में नहीं ले सकती है।
कक्ष निरीक्षकों की कमी से व्यवस्थाएं गड़बड़ाईं
बीएसए के देर से निर्णय लेने की वजह से शिक्षकों को नहीं मिल पाई सूचना
बरेली। यूपी बोर्ड की परीक्षा में पहले दिन ही अफरातफरी का माहौल रहा, कहीं शिक्षक नहीं पहुंचे तो कहीं पुलिस बल ही नदारद रहे। पहले दिन ही जहां कुछ जगह शिक्षक नहीं पहुंचे तो कुछ में बिना पुलिस बल के ही परीक्षा हुई। बेसिक शिक्षकों के परीक्षा केंद्रों पर न पहुंचने की वजह से काफी गड़बड़ी हुई। दरअसल, बेसिक शिक्षा विभाग और डीआईओएस के बीच खींचतान की वजह से देर से निर्णय हो पाया। बुधवार बृहस्पतिवार को बीएसए 1500 कक्ष निरीक्षक देने पर राजी तो हो गए, लेकिन इसकी जानकारी शिक्षकों न मिलने की वजह से वह परीक्षा केंद्रों पर नहीं पहुंच गए। आंवला के सुभाष कालेज के व्यवस्थापक ने बताया कि स्टाफ की कमी की वजह से क्लर्कों ने कक्ष निरीक्षक की ड्यूटी की। गुरु गोविंद सिंह इंटर कॉलेज मॉडल टाउन में 20 कक्ष निरीक्षकों की मांगी गई थी, लेकिन सिर्फ आठ शिक्षक ही ड्यूटी करने पहुंचे। बाकी के शिक्षक नदारद रहे।
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गुरुगोविंद सिंह में सुबह पेपर पहुंचे ली राहत की सांस
बरेली। गुरु गोविंद सिंह इंटर कॉलेज में सामान्य हिंदी के 55 पेपर कम पड़ गए थे। इसकी शिकायत एक दिन पहले ही कर दी गई थी, लेकिन पेपर परीक्षा वाले दिन सुबह पहुंचे। यह तो गनीमत थी कि परीक्षा दूसरी पाली में होनी थी, नहीं तो बड़ी समस्या हो जाती। रातभर केंद्र व्यवस्थापक अरविंदर कौर की सांसों अटकी रहीं, उन्हें लगा कि कहीं ऐसा न हो कि पेपर ही न समय मिले। इंटरमीडिएट कॉमर्स के छात्रों को सामान्य हिंदी का पेपर देना था, लेकिन गलती से हिंदी लिख गया। इसकी वजह से ही सारी समस्या हो गई। हिंदी के 55 पेपर ज्यादा हो गए और सामान्य हिंदी के कम पड़ गए।
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आउट ऑफ सिलेबस आया हिंदी का पेपर
हाईस्कूल के हिंदी में पेपर में पूछी गई सिलेबस से बाहर की संधि
बरेली। यूपी बोर्ड की परीक्षाओं के पहले दिन हुआ हाईस्कूल का हिंदी का पेपर आउट ऑफ सिलेबस आया। इसके अलावा प्रश्नपत्र में तमाम गलतियां और विसंगतियां भी मिलीं। जय नारायण सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के हिंदी के प्रवक्ता डॉ. गोविंद दीक्षित ने बताया कि प्रश्न संख्या 4 के ख खंड में काव्य अवतरण की व्याख्या करने को कहा गया है। इसमें वर्तनी की कई अशुद्धियां हैं। इसकी वजह से अर्थ का अनर्थ निकल रहा था। इससे छात्रों में कई शब्दों को लेकर भ्रम की स्थिति रही। प्रश्न संख्या छह में संस्कृति गद्य का अनुवाद करने को कहा गया। इसमें व्याकरण की अशुद्धियों के साथ ही वाक्य भी अपूर्ण थे। प्रश्न संख्या नौ के खंड क में अप उपसर्ग के मेल से शब्द बनाने को लिखा है, जबकि यह उपसर्ग ही नहीं होता। इसी तरह से प्रश्न संख्या 10 के खंड क में जिस शब्द की संधि करने और संधि का नाम बताने को लिखा है, वह संधि पाठ्यक्रम में ही नहीं है।
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बृहस्पतिवार से शुरू हुई यूपी बोर्ड परीक्षा की पहली पाली में हाईस्कूल का हिंदी का पेपर हुआ। इसमें 59988 परीक्षार्थियों को परीक्षा देना था। इसमें 6306 परीक्षार्थी अनुपस्थित पाए गए। दूसरी पाली में हुए इंटरमीडिएट के सैन्य अध्ययन के पेपर में 120 में से नौ परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे। डीआईओएस की ओर से सख्त निर्देश होने के बाद भी कई केंद्रों पर परीक्षार्थियों को फर्नीचर नहीं मिल पाए।
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जब बैठाने की व्यवस्था नहीं तो यहां कैसे बना दिए केन्द्र
राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मल्लपुर सबराह में करीब पचास से ज्यादा परीक्षार्थियों ने टाट-पट्टी पर बैठकर परीक्षा दी। यहां पर बच्चे एक दूसरे से सटे हुए बैठे थे। बड़ी आसानी से एक-दूसरे की कॉपियों में ताक-झांक कर रहे थे। स्कूल कैंपस में बाहरी लोग भी घूम रहे थे। अंदर परीक्षार्थी परीक्षा दे रहे थे और परीक्षा कक्षों के बाहर से लोग खिड़की से झांक रहे थे।
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... बहेड़ी के केसर लाल भानवती इंटर कॉलेज में भी बहुत से छात्र टाट-पट्टी पर बैठे थे। रिछा के राजकीय इंटर कॉलेज में फर्नीचर की कमी की वजह से परीक्षार्थियों को दरी पर बैठकर परीक्षा देनी पड़ी। केंद्र व्यवस्थापक संजय सिंह ने बताया कि कॉलेज में फर्नीचर का अभाव है। कुछ परीक्षा कक्षों में ही फर्नीचर की व्यवस्था है।
... यही हाल आरएन टैगोर इंटर कॉलेज में भी पहुंचो। यहां पर भी परीक्षार्थियों ने जमीन पर बैठकर परीक्षा दी। भुता के अंबेडकर कन्या इंटर कॉलेज में भी परीक्षार्थियों ने बरामदे में जमीन पर बैठकर परीक्षा दी।
सीटिंग प्लान की गड़बड़ी के चलते आधे घंटे लेट हुई परीक्षा
भुता के अंबेडकर कन्या इंटर कॉलेज के परीक्षा केंद्र पर हाईस्कूल की पहली पाली में परीक्षार्थियों के सीटिंग प्लान की व्यवस्था ठीक न होने की वजह से आधे घंटे लेट पेपर मिला। सुबह साढ़े सात बजे से पेपर शुरू होना था, लेकिन आठ बजे शुरू हो पाया। इस बात को लेकर परीक्षार्थियों और अभिभावकों ने हंगामा भी किया। इसकी शिकायत थानाध्यक्ष तक भी पहुंच गई। थानाध्यक्ष गौरव सिंह यादव फोर्स के साथ मौके पर पहुंच गए और किसी तरह से मामला शांत कराया।
कई केंद्रों के केंद्र व्यवस्थापकों पर हुई कार्रवाई
बरेली। डीआईओएस के सचल दल ने शिव ज्ञान इंटर कॉलेज सीबीगंज में छापा मारा। उन्होंने देखा कि शिव ज्ञान के छात्र दूसरे परीक्षा कक्षों में बैठे हैं और दूसरे विद्यालयों के छात्र अन्य कमरों में। सीटिंग प्लान से छात्र बैठे हुए नहीं थे। बचे हुए प्रश्नपत्र आसपास फैले हुए थे। अव्यवस्था देखकर डीआईओएस ने केंद्र व्यवस्थापक को फटकारा। इसके बाद कार्रवाई करते हुए उन्होंने केंद्र व्यवस्थापक को हटा दिया। इसके अलावा सीबीगंज इंटर कॉलेज में मेडिकल लीव लेकर छुट्टी पर जाने वाले प्रधानाचार्य झम्मन लाल वहां पर घूमते हुए पाए गए। डीआईओएस गजेंद्र कुमार ने बताया कि वहां पर उनके घूमने का ही मतलब है कि वह कुछ गलत नीयत से आए होंगे। हो सकता है कि नकल भी कराना चाहते हों। डीआईओएस ने उन्हें नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
डीआईओएस को देखते ही परीक्षार्थियों ने फेंकी नकल
बरेली। बहेड़ी के शेरिया अल्पसंख्यक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय देवरनिया में डीआईओएस का सचल दल की गाड़ी जैसे ही गेट पर रुकी। परीक्षा कक्षों में बैठे परीक्षार्थियों ने नकल फेंकनी शुरू कर दी। अंदर छात्र नकल कर रहे थे, लेकिन डीआईओएस को देख बचने के लिए नकल फेंक दी। डीआईओएस ने बाहर से ही नकल के पर्चे उठाकर सील करवा दिए। अंदर जाकर उन्होंने तलाशी ली तो कोई नकल नहीं मिल पाई। एक छात्र के पास स्विच ऑफ मोबाइल मिला। उन्होंने केंद्र व्यवस्थापक और कक्ष निरीक्षकों को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है कि परीक्षा कक्ष से बाहर पर्चे कैसे फेंके गए। जवाब के बाद कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा। इसके अलावा उन्होंने मोबाइल रखने वाले छात्र को चेतावनी जारी कर अभिभावकों को भी बुलाया हैै।
चमकती घड़ी देख डिवाइस समझ बैठे शिक्षक
बरेली। साहू गोपीनाथ इंटर कॉलेज में सुबह की पाली में परीक्षा देने आई छात्राओं की शिक्षक तलाशी ले रही थीं। तलाशी के दौरान ही एक शिक्षक ने छात्रा की कलाई पर चमकती हुई घड़ी देखी। उन्होंने उस घड़ी को इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस समझ लिया। इसके बाद शिक्षक ने डांटते हुए छात्रा से वह घड़ी उतरवा ली। कहा कि यह घड़ी कुछ गड़बड़ी है, इसलिए वह इसे परीक्षा कक्ष में नहीं ले सकती है।
कक्ष निरीक्षकों की कमी से व्यवस्थाएं गड़बड़ाईं
बीएसए के देर से निर्णय लेने की वजह से शिक्षकों को नहीं मिल पाई सूचना
बरेली। यूपी बोर्ड की परीक्षा में पहले दिन ही अफरातफरी का माहौल रहा, कहीं शिक्षक नहीं पहुंचे तो कहीं पुलिस बल ही नदारद रहे। पहले दिन ही जहां कुछ जगह शिक्षक नहीं पहुंचे तो कुछ में बिना पुलिस बल के ही परीक्षा हुई। बेसिक शिक्षकों के परीक्षा केंद्रों पर न पहुंचने की वजह से काफी गड़बड़ी हुई। दरअसल, बेसिक शिक्षा विभाग और डीआईओएस के बीच खींचतान की वजह से देर से निर्णय हो पाया। बुधवार बृहस्पतिवार को बीएसए 1500 कक्ष निरीक्षक देने पर राजी तो हो गए, लेकिन इसकी जानकारी शिक्षकों न मिलने की वजह से वह परीक्षा केंद्रों पर नहीं पहुंच गए। आंवला के सुभाष कालेज के व्यवस्थापक ने बताया कि स्टाफ की कमी की वजह से क्लर्कों ने कक्ष निरीक्षक की ड्यूटी की। गुरु गोविंद सिंह इंटर कॉलेज मॉडल टाउन में 20 कक्ष निरीक्षकों की मांगी गई थी, लेकिन सिर्फ आठ शिक्षक ही ड्यूटी करने पहुंचे। बाकी के शिक्षक नदारद रहे।
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गुरुगोविंद सिंह में सुबह पेपर पहुंचे ली राहत की सांस
बरेली। गुरु गोविंद सिंह इंटर कॉलेज में सामान्य हिंदी के 55 पेपर कम पड़ गए थे। इसकी शिकायत एक दिन पहले ही कर दी गई थी, लेकिन पेपर परीक्षा वाले दिन सुबह पहुंचे। यह तो गनीमत थी कि परीक्षा दूसरी पाली में होनी थी, नहीं तो बड़ी समस्या हो जाती। रातभर केंद्र व्यवस्थापक अरविंदर कौर की सांसों अटकी रहीं, उन्हें लगा कि कहीं ऐसा न हो कि पेपर ही न समय मिले। इंटरमीडिएट कॉमर्स के छात्रों को सामान्य हिंदी का पेपर देना था, लेकिन गलती से हिंदी लिख गया। इसकी वजह से ही सारी समस्या हो गई। हिंदी के 55 पेपर ज्यादा हो गए और सामान्य हिंदी के कम पड़ गए।
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आउट ऑफ सिलेबस आया हिंदी का पेपर
हाईस्कूल के हिंदी में पेपर में पूछी गई सिलेबस से बाहर की संधि
बरेली। यूपी बोर्ड की परीक्षाओं के पहले दिन हुआ हाईस्कूल का हिंदी का पेपर आउट ऑफ सिलेबस आया। इसके अलावा प्रश्नपत्र में तमाम गलतियां और विसंगतियां भी मिलीं। जय नारायण सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के हिंदी के प्रवक्ता डॉ. गोविंद दीक्षित ने बताया कि प्रश्न संख्या 4 के ख खंड में काव्य अवतरण की व्याख्या करने को कहा गया है। इसमें वर्तनी की कई अशुद्धियां हैं। इसकी वजह से अर्थ का अनर्थ निकल रहा था। इससे छात्रों में कई शब्दों को लेकर भ्रम की स्थिति रही। प्रश्न संख्या छह में संस्कृति गद्य का अनुवाद करने को कहा गया। इसमें व्याकरण की अशुद्धियों के साथ ही वाक्य भी अपूर्ण थे। प्रश्न संख्या नौ के खंड क में अप उपसर्ग के मेल से शब्द बनाने को लिखा है, जबकि यह उपसर्ग ही नहीं होता। इसी तरह से प्रश्न संख्या 10 के खंड क में जिस शब्द की संधि करने और संधि का नाम बताने को लिखा है, वह संधि पाठ्यक्रम में ही नहीं है।