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Bareilly News: कांवड़ मार्गों पर बेनाम ठेले, रेस्टोरेंट पर भी नहीं लगे नाम के बोर्ड
Mon, 27 Jul 2026 01:26 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Mon, 27 Jul 2026 01:26 AM IST
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बरेली। शहर के प्रमुख कांवड़ मार्गों के किनारे बने रेस्टोरेंट, वहां लगने वाले ठेलों पर दुकानदारों के नाम और पहचान के बोर्ड नहीं लगे हैं। यह हाल तब है, जबकि शासन की ओर से निर्देश दिए गए थे कि कांवड़ यात्रा मार्ग पर हर ठेले और दुकान पर खाद्य विभाग की ओर से जारी नाम-पते का स्टीकर और बेचे जाने वाले सामान की स्पष्ट जानकारी अंकित होनी चाहिए। प्रशासन तैयारियां तेज करने के दावे तो कर रहा है, लेकिन रविवार को की गई पड़ताल में इसकी कलई खुल गई।
लाखों की संख्या में कांवड़िये बदायूं रोड, पीलीभीत रोड और रामपुर रोड से होकर गुजरते हैं। यहां फल के ठेलों से लेकर खान-पान की दुकानों तक, किसी पर भी खाद्य विभाग का स्टीकर नहीं लगा है। पिछले वर्ष सावन में भी खाद्य विभाग ने सभी दुकानों और ठेलों पर अनिवार्य रूप से स्टीकर चस्पा कराने के बड़े-बड़े दावे किए थे, लेकिन इस बार भी स्थिति उतनी ही लचर बनी हुई है।
चौपुला से रामगंगा तक नदारद हैं बोर्ड
बदायूं रोड कांवड़ियों की आवाजाही के लिहाज से सबसे प्रमुख और संवेदनशील मार्ग है। जिलेभर के कांवड़िये कछला से गंगाजल भरने के लिए इसी मार्ग का उपयोग करते हैं और जल लेकर वापस शहर के प्रसिद्ध नाथ मंदिरों तक पहुंचते हैं। इस रोड पर चौपुला पुल से लेकर रामगंगा पुल तक लगभग 300 से अधिक फल के ठेले और 100 से ज्यादा रेस्टोरेंट व ढाबे संचालित हो रहे हैं। किसी भी ठेले या रेस्टोरेंट पर नाम के बोर्ड और विभागीय स्टीकर नहीं लगाए गए हैं। ऐसे में कौन दुकानदार क्या बेच रहा है और उसकी पहचान क्या है? शिवभक्तों को इसकी जानकारी नहीं मिल पा रही है।
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किला से झुमका तक भी हो रही नियमों की अनदेखी
हरिद्वार और गढ़मुक्तेश्वर जाने वाले कांवड़िये बृहस्पतिवार को रामपुर रोड से रवाना होते हैं और सोमवार तड़के जल लेकर इसी मार्ग से शहर लौटते हैं। इस रूट पर किला पुल के नीचे बड़ी संख्या में फलों के ठेले सजते हैं। किला से लेकर झुमका तिराहे तक विभिन्न प्रकार की दुकानें भी लगती हैं, लेकिन किसी के पास भी खाद्य विभाग की ओर से जारी पहचान का स्टीकर मौजूद नहीं है। इस रोड पर कई मांसाहारी ढाबे और दुकानें भी संचालित होती हैं। कांवड़ यात्रा के दौरान किसी अप्रिय स्थिति या विवाद से बचने के लिए इन ढाबों और दुकानों पर संचालकों के नाम आदि जानकारियां दर्ज होना जरूरी है।
पीलीभीत रोड पर भी नहीं लगे हैं नाम के बोर्ड
पीलीभीत रोड से भी हजारों कांवड़िये गुजरते हैं। सात नाथ में शुमार पशुपतिनाथ और वनखंडीनाथ मंदिर भी इसी रोड के दायरे में आते हैं। सावन में यहां दूर-दराज से आने वाले शिवभक्त मंदिरों के आसपास ही रात्रि विश्राम भी करते हैं। विश्राम के दौरान ये श्रद्धालु खान-पान का सामान इसी मार्ग की दुकानों से खरीदते हैं। दुकानदारों के नाम और पहचान स्पष्ट न होने के कारण उनको परेशानी होती है। खासकर, सेटेलाइट बस अड्डे पर तमाम फलों के ठेलों लगते हैं, लेकिन इन पर कोई सूचना अंकित नहीं है। सुरक्षा और पारदर्शिता के लिहाज से इन व्यवस्थाओं का समय रहते दुरुस्त होना बेहद जरूरी है।
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लाखों की संख्या में कांवड़िये बदायूं रोड, पीलीभीत रोड और रामपुर रोड से होकर गुजरते हैं। यहां फल के ठेलों से लेकर खान-पान की दुकानों तक, किसी पर भी खाद्य विभाग का स्टीकर नहीं लगा है। पिछले वर्ष सावन में भी खाद्य विभाग ने सभी दुकानों और ठेलों पर अनिवार्य रूप से स्टीकर चस्पा कराने के बड़े-बड़े दावे किए थे, लेकिन इस बार भी स्थिति उतनी ही लचर बनी हुई है।
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चौपुला से रामगंगा तक नदारद हैं बोर्ड
बदायूं रोड कांवड़ियों की आवाजाही के लिहाज से सबसे प्रमुख और संवेदनशील मार्ग है। जिलेभर के कांवड़िये कछला से गंगाजल भरने के लिए इसी मार्ग का उपयोग करते हैं और जल लेकर वापस शहर के प्रसिद्ध नाथ मंदिरों तक पहुंचते हैं। इस रोड पर चौपुला पुल से लेकर रामगंगा पुल तक लगभग 300 से अधिक फल के ठेले और 100 से ज्यादा रेस्टोरेंट व ढाबे संचालित हो रहे हैं। किसी भी ठेले या रेस्टोरेंट पर नाम के बोर्ड और विभागीय स्टीकर नहीं लगाए गए हैं। ऐसे में कौन दुकानदार क्या बेच रहा है और उसकी पहचान क्या है? शिवभक्तों को इसकी जानकारी नहीं मिल पा रही है।
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किला से झुमका तक भी हो रही नियमों की अनदेखी
हरिद्वार और गढ़मुक्तेश्वर जाने वाले कांवड़िये बृहस्पतिवार को रामपुर रोड से रवाना होते हैं और सोमवार तड़के जल लेकर इसी मार्ग से शहर लौटते हैं। इस रूट पर किला पुल के नीचे बड़ी संख्या में फलों के ठेले सजते हैं। किला से लेकर झुमका तिराहे तक विभिन्न प्रकार की दुकानें भी लगती हैं, लेकिन किसी के पास भी खाद्य विभाग की ओर से जारी पहचान का स्टीकर मौजूद नहीं है। इस रोड पर कई मांसाहारी ढाबे और दुकानें भी संचालित होती हैं। कांवड़ यात्रा के दौरान किसी अप्रिय स्थिति या विवाद से बचने के लिए इन ढाबों और दुकानों पर संचालकों के नाम आदि जानकारियां दर्ज होना जरूरी है।
पीलीभीत रोड पर भी नहीं लगे हैं नाम के बोर्ड
पीलीभीत रोड से भी हजारों कांवड़िये गुजरते हैं। सात नाथ में शुमार पशुपतिनाथ और वनखंडीनाथ मंदिर भी इसी रोड के दायरे में आते हैं। सावन में यहां दूर-दराज से आने वाले शिवभक्त मंदिरों के आसपास ही रात्रि विश्राम भी करते हैं। विश्राम के दौरान ये श्रद्धालु खान-पान का सामान इसी मार्ग की दुकानों से खरीदते हैं। दुकानदारों के नाम और पहचान स्पष्ट न होने के कारण उनको परेशानी होती है। खासकर, सेटेलाइट बस अड्डे पर तमाम फलों के ठेलों लगते हैं, लेकिन इन पर कोई सूचना अंकित नहीं है। सुरक्षा और पारदर्शिता के लिहाज से इन व्यवस्थाओं का समय रहते दुरुस्त होना बेहद जरूरी है।