{"_id":"642cea831fd3aaad1500b029","slug":"umesh-pal-case-ashraf-behest-authorities-had-made-jail-a-hotel-pet-cat-was-also-taken-care-of-2023-04-05","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Umesh Pal Case: अशरफ के इशारे पर नाचते थे जेलकर्मी, जेल को बना दिया था होटल, पालतू बिल्ली का भी रखते थे ख्याल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Umesh Pal Case: अशरफ के इशारे पर नाचते थे जेलकर्मी, जेल को बना दिया था होटल, पालतू बिल्ली का भी रखते थे ख्याल
Wed, 05 Apr 2023 09:00 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 05 Apr 2023 09:00 AM IST
सार
बरेली जेल में बंद पूर्व विधायक खालिद अजीम उर्फ अशरफ के इशारों पर जेल कर्मी नाचते थे। अशरफ के इशारे पर जेलकर्मियों ने जेल को होटल बना दिया था। बंदियों के लिए भी समय-सय पर दावत का इंतजाम किया गया। जेल के अंदर ही नवरात्र में फलाहार तो रमजान में इफ्तार का भी प्रबंध अशरफ की ओर से कराया जाता था।
विज्ञापन
Umesh Pal Hatyakand
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पूर्व विधायक खालिद अजीम उर्फ अशरफ के लिए जेल किसी होटल से कम न थी। जेल में वह गुर्गों संग दरबार लगाता था। उसके लिए पीलीभीत से स्पेशल बिरयानी मंगाई जाती थी, वहीं उसकी पालतू बिल्ली का भी ख्याल रखा जाता था। माफिया का रसूख इस कदर हावी था कि किसी जेलकर्मी की विरोध करने की हिम्मत नहीं होती थी।
उसकी खातिरदारी के लिए जेल अधीक्षक राजीव शुक्ला ने सारे कायदे-कानून ताक पर रख दिए थे। प्रभारी डीआईजी जेल आरएन पांडेय ने जांच के बाद इसकी रिपोर्ट डीजी जेल को भेजी थी। सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट में जेल के शीर्ष अफसरों से लेकर निचले स्तर के कर्मचारियों तक को नाम के साथ जिक्र कर दोषी ठहराया गया है।
इसमें राजीव शुक्ला को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा गया है कि कुछ कर्मचारी न चाहते हुए भी इस काकस का हिस्सा बनने को मजबूर थे। विरोध की स्थिति में उनको खुद पर ही कार्रवाई होने का डर सता रहा था। पीलीभीत के मोहल्ला फीलखाना निवासी आरिफ को पुलिस पहले ही जेल भेज चुकी है।
विज्ञापन
उसके द्वारा लाई गई बिरयानी जेल अधीक्षक की देखरेख में अशरफ की बैरक तक पहुंचाई जाती थी। अशरफ के लिए जेल की कैंटीन में भी चिकन, मटन और अंडा करी बनाई जाती थी। अशरफ के कहने पर बिल्लियों के खाने के लिए बिस्किट, ब्रेड व दूध आदि आता था।
विज्ञापन
उसकी खातिरदारी के लिए जेल अधीक्षक राजीव शुक्ला ने सारे कायदे-कानून ताक पर रख दिए थे। प्रभारी डीआईजी जेल आरएन पांडेय ने जांच के बाद इसकी रिपोर्ट डीजी जेल को भेजी थी। सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट में जेल के शीर्ष अफसरों से लेकर निचले स्तर के कर्मचारियों तक को नाम के साथ जिक्र कर दोषी ठहराया गया है।
विज्ञापन
इसमें राजीव शुक्ला को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा गया है कि कुछ कर्मचारी न चाहते हुए भी इस काकस का हिस्सा बनने को मजबूर थे। विरोध की स्थिति में उनको खुद पर ही कार्रवाई होने का डर सता रहा था। पीलीभीत के मोहल्ला फीलखाना निवासी आरिफ को पुलिस पहले ही जेल भेज चुकी है।
विज्ञापन
उसके द्वारा लाई गई बिरयानी जेल अधीक्षक की देखरेख में अशरफ की बैरक तक पहुंचाई जाती थी। अशरफ के लिए जेल की कैंटीन में भी चिकन, मटन और अंडा करी बनाई जाती थी। अशरफ के कहने पर बिल्लियों के खाने के लिए बिस्किट, ब्रेड व दूध आदि आता था।
Trending Videos
चहारदीवारी में ही दम तोड़ गईं विरोध में उठने वाली आवाजेंशुरू में अशरफ को जेल में मिल रही इन सहूलियतों पर अंदरखाने विरोध की स्थिति भी रही पर अधिकारियों के झुकाव की वजह से निचला स्टाफ मन मसोस कर रह गया। बाद में अशरफ के गुर्गों ने भी अपने स्तर से स्टाफ से लेकर उपदव्री बंदियों तक को सेट कर लिया।
जेल के प्रमुख जिम्मेदारों को हर महीने नजराना पहुंचने लगा। बंदियों के लिए भी समय-सय पर दावत का इंतजाम किया गया। जेल के अंदर ही नवरात्र में फलाहार तो रमजान में इफ्तार का भी प्रबंध अशरफ की ओर से कराया जाता था। नन्हे उर्फ दयाराम के ऑटो में जेल के अन्य सामान के साथ दावत का सामान भी मंगाया जाता था।
अशरफ की सेवा में लगे थे आरक्षीजेल के अफसरों ने नियमों को ताक पर रखकर आरक्षियों को अशरफ की सेवा में लगा रखा था। अधिकारियों का हुक्म बजाने के अलावा उनके पास कोई रास्ता भी नहीं था। जेल में रहकर अशरफ जिससे चाहता, बात कर लेता था और जिससे चाहता मुलाकात करता था। उमेश पाल हत्याकांड में अशरफ का नाम आने के बाद से परतें खुल रही हैं। एक अधिकारी ने जब जेल अधीक्षक से सवाल किया था कि वह अशरफ को ये सुविधाएं डर की वजह से दे रहे थे या लालच की वजह से तो वह जवाब देने के बजाय बात घुमा गए।
मुकदमे में बढ़ सकता है जेल अधीक्षक का नाम
जेल में चल रहे खेल के लिए वरिष्ठ जेल अधीक्षक राजीव शुक्ला ही जिम्मेदार थे। उनका निलंबन न होने की वजह से पुलिस उनपर सीधी कार्रवाई से बच रही थी, जबकि जेल के निचले स्तर के कर्मचारी मुकदमे में नामजद होकर जेल जा चुके हैं। सीओ तृतीय आशीष कुमार सिंह के नेतृत्व वाली एसआईटी मामले की जांच कर रही है। निलंबित व जेल जा चुके कर्मचारियों ने बयान भी दिया है कि अधिकारियों के निर्देश पर वे अशरफ को सुविधाएं मुहैया करा रहे थे। इस लिहाज से एसआईटी राजीव शुक्ला का नाम मुकदमे में शामिल कर सकती है। आने वाले वक्त में उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
जेल में चल रहे खेल के लिए वरिष्ठ जेल अधीक्षक राजीव शुक्ला ही जिम्मेदार थे। उनका निलंबन न होने की वजह से पुलिस उनपर सीधी कार्रवाई से बच रही थी, जबकि जेल के निचले स्तर के कर्मचारी मुकदमे में नामजद होकर जेल जा चुके हैं। सीओ तृतीय आशीष कुमार सिंह के नेतृत्व वाली एसआईटी मामले की जांच कर रही है। निलंबित व जेल जा चुके कर्मचारियों ने बयान भी दिया है कि अधिकारियों के निर्देश पर वे अशरफ को सुविधाएं मुहैया करा रहे थे। इस लिहाज से एसआईटी राजीव शुक्ला का नाम मुकदमे में शामिल कर सकती है। आने वाले वक्त में उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
अब तक आठ निलंबित
वरिष्ठ जेल अधीक्षक राजीव शुक्ला, जेलर राजीव मिश्रा, डिप्टी जेलर दुर्गेश प्रताप सिंह, जेल वार्डर शिवहरि अवस्थी, मनोज गौड़, बृजवीर सिंह, दानिश मेहंदी और दलपत सिंह।
वरिष्ठ जेल अधीक्षक राजीव शुक्ला, जेलर राजीव मिश्रा, डिप्टी जेलर दुर्गेश प्रताप सिंह, जेल वार्डर शिवहरि अवस्थी, मनोज गौड़, बृजवीर सिंह, दानिश मेहंदी और दलपत सिंह।
सात जा चुके जेल
जेल वार्डर शिवहरि अवस्थी, मनोज गौड़, लल्ला गद्दी, आरिफ, नन्हे उर्फ दयाराम, फरहद उर्फ गुड्डू और सरफुद्दीन।
यह भी पढ़ें: Atiq Ahmed: अतीक के आगे नहीं झुके राजूपाल हत्याकांड के विवेचक, पाक से आता था धमकी भरा फोन, भाई को फंसाया तो...
जेल वार्डर शिवहरि अवस्थी, मनोज गौड़, लल्ला गद्दी, आरिफ, नन्हे उर्फ दयाराम, फरहद उर्फ गुड्डू और सरफुद्दीन।
यह भी पढ़ें: Atiq Ahmed: अतीक के आगे नहीं झुके राजूपाल हत्याकांड के विवेचक, पाक से आता था धमकी भरा फोन, भाई को फंसाया तो...