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Bareilly News: दो और डेंगू संदिग्धों की मौत, जिला अस्पताल का वार्ड फुल; बेंच पर हो रहा मरीजों का इलाज
Wed, 25 Oct 2023 08:22 AM IST
मुकेश कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
Published by: मुकेश कुमार
Updated Wed, 25 Oct 2023 08:22 AM IST
सार
बरेली में डेंगू का कहर थम नहीं रहा है। मंगलवार को दो और डेंगू संदिग्ध मरीजों की मौत हो गई। अब तक 23 संदिग्ध मरीजों की जान जा चुका है। सीएमओ ने डेंगू संदिग्ध मरीजों की मौत का ऑडिट कराने की बात कही है।
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जिला अस्पताल का डेंगू वार्ड फुल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बरेली में डेंगू संदिग्धों की मौत का सिलसिला जारी है। मंगलवार को एक ही गांव के दो और युवकों की मौत हो गई। परिजनों ने दोनों की एनएस-1 कार्ड टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव बताई है। सीएमओ ने डेंगू संदिग्ध मरीजों की मौत का ऑडिट कराने की बात कही है। दूसरी ओर, जिला अस्पताल में डेंगू मरीजों के लिए व्यवस्था नाकाफी साबित हो रही है। वार्ड फुल हो जाने की वजह से बेंच पर लिटाकर मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
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शीशगढ़, मीरगंज, फतेहगंज पश्चिमी, शेरगढ़ के बाद बुखार का प्रकोप अब देवरनिया तक जा पहुंचा है। सीएचसी रिछा से सटे गांव मंगतपुर निवासी गुड्डू और सोनू दस दिनों से बुखार से तप रहे थे। निजी पैथोलॉजी में एनएस-1 कार्ड से जांच कराई तो रिपोर्ट पॉजिटिव मिली थी। डॉक्टरों ने डेंगू संदिग्ध बताकर इलाज शुरू कर दिया था। सीएचसी पर इलाज कराने पहुंचे तो एनएनएम और आशा ने वहां बेहतर इलाज नहीं मिलने की बात कहकर निजी अस्पताल में भर्ती कराने के लिए कहा था। सोमवार देर रात दोनों की मौत हो गई।
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मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग की ओर से गांव में कैंप लगाकर जांच की गई पर कोई भी डेंगू पॉजिटिव नहीं मिला। गांव में पंचायत राज विभाग की ओर से नाले-नालियों की सफाई और कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कराया जा रहा है। जिले में अब तक 23 संदिग्ध मरीजों की मौत हो चुकी है।
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मौतों पर उठाए सवाल
मौत डेंगू से हुई है या नहीं, इस पर ग्राम प्रधान के प्रतिनिधि योगेंद्र गंगवार उर्फ टिल्लू ने सवाल उठाए। इसकी पुष्टि के लिए उन्होंने सीएचसी प्रभारी डॉ. शुएब खान से संपर्क किया। इस पर प्रभारी ने मृतकों की सभी जांच रिपोर्ट और इलाज के दस्तावेज मांगे हैं। उन्होंने बुखार के मरीजों को सीएचसी पहुंचकर जांच कराने के लिए कहा है।
60 मरीजों के घर नहीं पहुंची टीम
20 दिन में डेंगू के मरीजों की तादाद दोगुनी हो चुकी है, मगर निरोधात्मक कार्रवाई में महकमा पिछड़ता जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक जिले में अब तक 585 केस मिले हैं। इनके सापेक्ष 526 मरीजों के घर ही निरोधात्मक कार्रवाई के लिए टीमें पहुंचीं। 60 मरीजों के घर टीमें नहीं पहुंचीं। शहर के 17 वार्ड में डेंगू के 268 व 185 गांवों में 317 मरीज मिल चुके हैं।
मौत डेंगू से हुई है या नहीं, इस पर ग्राम प्रधान के प्रतिनिधि योगेंद्र गंगवार उर्फ टिल्लू ने सवाल उठाए। इसकी पुष्टि के लिए उन्होंने सीएचसी प्रभारी डॉ. शुएब खान से संपर्क किया। इस पर प्रभारी ने मृतकों की सभी जांच रिपोर्ट और इलाज के दस्तावेज मांगे हैं। उन्होंने बुखार के मरीजों को सीएचसी पहुंचकर जांच कराने के लिए कहा है।
60 मरीजों के घर नहीं पहुंची टीम
20 दिन में डेंगू के मरीजों की तादाद दोगुनी हो चुकी है, मगर निरोधात्मक कार्रवाई में महकमा पिछड़ता जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक जिले में अब तक 585 केस मिले हैं। इनके सापेक्ष 526 मरीजों के घर ही निरोधात्मक कार्रवाई के लिए टीमें पहुंचीं। 60 मरीजों के घर टीमें नहीं पहुंचीं। शहर के 17 वार्ड में डेंगू के 268 व 185 गांवों में 317 मरीज मिल चुके हैं।
भोजीपुरा में डेंगू का सर्वाधिक प्रकोप
भोजीपुरा में डेंगू का सर्वाधिक प्रकोप है। यहां सौ मरीज मिल चुके हैं। मीरगंज, शेरगढ़ और रामनगर की कई ग्राम पंचायतों में डेंगू के केस बढ़ते जा रहे हैं। मंगलवार को ग्राम पंचायत घंघोरा पिपरिया, शेरगढ़ के सिमरावा, पलथा, मीरगंज के देवरिया, समसपुर, सुजातपुर, रामनगर के रेवती में टीमें लगाकर कीटनाशक दवाओं का छिड़काव, फॉगिंग समेत नाले-नालियों की सफाई कराई गई।
एडी एसआईसी डॉ. अलका शर्मा ने बताया कि दूर-दराज से आए मरीजों को इलाज मुहैया कराना प्राथमिकता है। सीमित संसाधनों में बेहतर सुविधा दी जा रही है। तीन सौ बेड अस्पताल में वार्ड शुरू होने तक यह दिक्कत रह सकती है।
भोजीपुरा में डेंगू का सर्वाधिक प्रकोप है। यहां सौ मरीज मिल चुके हैं। मीरगंज, शेरगढ़ और रामनगर की कई ग्राम पंचायतों में डेंगू के केस बढ़ते जा रहे हैं। मंगलवार को ग्राम पंचायत घंघोरा पिपरिया, शेरगढ़ के सिमरावा, पलथा, मीरगंज के देवरिया, समसपुर, सुजातपुर, रामनगर के रेवती में टीमें लगाकर कीटनाशक दवाओं का छिड़काव, फॉगिंग समेत नाले-नालियों की सफाई कराई गई।
एडी एसआईसी डॉ. अलका शर्मा ने बताया कि दूर-दराज से आए मरीजों को इलाज मुहैया कराना प्राथमिकता है। सीमित संसाधनों में बेहतर सुविधा दी जा रही है। तीन सौ बेड अस्पताल में वार्ड शुरू होने तक यह दिक्कत रह सकती है।