{"_id":"6a4d5ddd324cd5b0a40b82d2","slug":"two-including-a-juvenile-offender-sentenced-to-30-months-imprisonment-under-the-gangster-act-bareilly-news-c-4-bly1053-920224-2026-07-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bareilly News: गैंगस्टर एक्ट में दोषी किशोर अपचारी समेत दो को 30-30 माह की कैद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bareilly News: गैंगस्टर एक्ट में दोषी किशोर अपचारी समेत दो को 30-30 माह की कैद
Wed, 08 Jul 2026 01:43 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Wed, 08 Jul 2026 01:43 AM IST
विज्ञापन
बरेली। स्पेशल जज गैंगस्टर एक्ट संतोष कुमार यादव ने मंगलवार को गैंगस्टर एक्ट के 24 साल पुराने मामले में अलीगंज थाना क्षेत्र के गांव राजपुर गौटिया निवासी अनेक पाल (रिपोर्ट दर्ज होने के दौरान किशोर अपचारी) और उमेश पाल को 30-30 साल की कैद और पांच-पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में दोषियों को दो-दो माह अतिरिक्त जेल में रहना होगा।
अलीगंज थाने के तत्कालीन प्रभारी पीडी शर्मा ने 29 अगस्त 2002 को अनेक पाल और उमेश पाल के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई थी। दोनों के खिलाफ अलीगंज थाने में हत्या समेत संगीन धाराओं में पहले से भी मामले दर्ज थी। गैंगस्टर एक्ट के मामले में विवेचना के बाद पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी। सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से तीन गवाह पेश किए गए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने अनेक पाल और उमेश पाल को गैंगस्टर एक्ट में दोषी करार देते हुए कैद व जुर्माने की सजा सुनाई है।
दांपत्य अधिकारों की बहाली याचिका खारिज, पति के बयान विरोधाभासी पाए गए
बरेली। पारिवारिक न्यायालय प्रथम के अपर प्रधान न्यायाधीश संजय कुमार सिंह ने मंगलवार को एक युवक की दांपत्य अधिकारों की बहाली संबंधी याचिका को एकपक्षीय रूप से खारिज कर दिया है। न्यायालय ने पाया कि युवक ने अपनी पत्नी पर लगाए गए आरोपों को पहले छिपाया था। बाद में उसके बयान विरोधाभासी साबित हुए।
विज्ञापन
युवक ने हिंदू विवाह अधिनियम के तहत दांपत्य अधिकारों के पुनर्स्थापन के लिए याचिका दायर की थी। उसने बताया कि उसका विवाह 30 जून 2011 को हुआ था और उनके दो बच्चे हैं। युवक के अनुसार, पत्नी लगभग चार वर्ष पहले घर छोड़कर अपने मायके चली गई थी। उसने आरोप लगाया कि पत्नी बिना किसी उचित कारण के उसके साथ नहीं रहना चाहती।
न्यायालय में पति ने बयान दिया कि उसकी पत्नी गुरुग्राम में एक फैक्टरी में काम करती है। वह दूसरे युवक के साथ रह रही है। हालांकि, मूल याचिका में युवक ने इस बात का कोई उल्लेख नहीं किया था। इसके विपरीत, युवक के पिता ने अपने बयान में कहा कि युवती पिछले पांच वर्ष से अपने मायके में बच्चों के साथ रह रही है। इन विरोधाभासी बयानों के कारण न्यायालय ने युवक के कथन को झूठा पाया।
एकपक्षीय रूप से मामला निरस्त किया
न्यायालय ने यह भी पाया कि युवक अपनी पत्नी और बच्चों के भरणपोषण में कोई सहयोग नहीं करता है। उसने न्यायालय में अपनी पत्नी पर किसी अन्य पुरुष के साथ संबंध होने का आरोप लगाया। जबकि याचिका में ऐसा कोई दावा नहीं था। न्यायालय ने इस आरोप को झूठा और पत्नी के प्रति क्रूरतापूर्ण माना। इसे महिला के पति से अलग रहने का पर्याप्त और उचित कारण बताया गया। इन तथ्यों के आधार पर न्यायालय ने युवक की याचिका को एकपक्षीय रूप से निरस्त कर दिया।
...................
रेलवे क्रॉसिंग का बूम क्षतिग्रस्त करने के मामले में एक दोषी करार
बरेली। एसीजेएम उत्तर रेलवे बरेली अनामिका सिंह ने लापरवाही से वाहन चलाते हुए रेलवे क्रॉसिंग संख्या-344-ए का बूम क्षतिग्रस्त करने के मामले में फरीदपुर थाना क्षेत्र के गांव ढकनी निवासी मुनीश को जुर्म स्वीकारोक्ति के आधार पर शनिवार को दोषी करार दिया है। उसने छह फरवरी 2018 को बूम क्षतिग्रस्त कर दिया था। कोर्ट ने दोषी को एक साल की परिवीक्षा पर रिहाई का आदेश दिया है। दोषी को 15 दिन के अंदर जिला प्रोबेशन अधिकारी के समक्ष 20 हजार रुपये का बंधपत्र दाखिल करना होगा और एक हजार रुपये बतौर क्षतिपूर्ति का रेलवे को भुगतान करना होगा।
रेलवे लाइन पर साइकिल छोड़ने के आरोपी को जमानत
बरेली। एसीजेएम उत्तर रेलवे बरेली अनामिका सिंह ने शनिवार को रेलवे लाइन पर साइकिल छोड़ने के आरोपी उमेश कुमार उर्फ सोनू की जमानत याचिका स्वीकृत कर ली। उसके खिलाफ आरपीएफ थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। आरोप है कि वह अनाधिकृत रूप से लाल फाटक ओवर ब्रिज के नीचे रेलवे लाइनों को साइकिल से पार कर रहा था। इसी दौरान तेजी से आ रही ट्रेन को देखकर साइकिल रेलवे लाइन पर ही छोड़ दी। साइकिल ट्रेन के इंजन से टकराने के कारण यात्रियों के जीवन को संकट पैदा हो गया।
विज्ञापन
अलीगंज थाने के तत्कालीन प्रभारी पीडी शर्मा ने 29 अगस्त 2002 को अनेक पाल और उमेश पाल के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई थी। दोनों के खिलाफ अलीगंज थाने में हत्या समेत संगीन धाराओं में पहले से भी मामले दर्ज थी। गैंगस्टर एक्ट के मामले में विवेचना के बाद पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी। सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से तीन गवाह पेश किए गए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने अनेक पाल और उमेश पाल को गैंगस्टर एक्ट में दोषी करार देते हुए कैद व जुर्माने की सजा सुनाई है।
विज्ञापन
दांपत्य अधिकारों की बहाली याचिका खारिज, पति के बयान विरोधाभासी पाए गए
बरेली। पारिवारिक न्यायालय प्रथम के अपर प्रधान न्यायाधीश संजय कुमार सिंह ने मंगलवार को एक युवक की दांपत्य अधिकारों की बहाली संबंधी याचिका को एकपक्षीय रूप से खारिज कर दिया है। न्यायालय ने पाया कि युवक ने अपनी पत्नी पर लगाए गए आरोपों को पहले छिपाया था। बाद में उसके बयान विरोधाभासी साबित हुए।
विज्ञापन
युवक ने हिंदू विवाह अधिनियम के तहत दांपत्य अधिकारों के पुनर्स्थापन के लिए याचिका दायर की थी। उसने बताया कि उसका विवाह 30 जून 2011 को हुआ था और उनके दो बच्चे हैं। युवक के अनुसार, पत्नी लगभग चार वर्ष पहले घर छोड़कर अपने मायके चली गई थी। उसने आरोप लगाया कि पत्नी बिना किसी उचित कारण के उसके साथ नहीं रहना चाहती।
न्यायालय में पति ने बयान दिया कि उसकी पत्नी गुरुग्राम में एक फैक्टरी में काम करती है। वह दूसरे युवक के साथ रह रही है। हालांकि, मूल याचिका में युवक ने इस बात का कोई उल्लेख नहीं किया था। इसके विपरीत, युवक के पिता ने अपने बयान में कहा कि युवती पिछले पांच वर्ष से अपने मायके में बच्चों के साथ रह रही है। इन विरोधाभासी बयानों के कारण न्यायालय ने युवक के कथन को झूठा पाया।
एकपक्षीय रूप से मामला निरस्त किया
न्यायालय ने यह भी पाया कि युवक अपनी पत्नी और बच्चों के भरणपोषण में कोई सहयोग नहीं करता है। उसने न्यायालय में अपनी पत्नी पर किसी अन्य पुरुष के साथ संबंध होने का आरोप लगाया। जबकि याचिका में ऐसा कोई दावा नहीं था। न्यायालय ने इस आरोप को झूठा और पत्नी के प्रति क्रूरतापूर्ण माना। इसे महिला के पति से अलग रहने का पर्याप्त और उचित कारण बताया गया। इन तथ्यों के आधार पर न्यायालय ने युवक की याचिका को एकपक्षीय रूप से निरस्त कर दिया।
...................
रेलवे क्रॉसिंग का बूम क्षतिग्रस्त करने के मामले में एक दोषी करार
बरेली। एसीजेएम उत्तर रेलवे बरेली अनामिका सिंह ने लापरवाही से वाहन चलाते हुए रेलवे क्रॉसिंग संख्या-344-ए का बूम क्षतिग्रस्त करने के मामले में फरीदपुर थाना क्षेत्र के गांव ढकनी निवासी मुनीश को जुर्म स्वीकारोक्ति के आधार पर शनिवार को दोषी करार दिया है। उसने छह फरवरी 2018 को बूम क्षतिग्रस्त कर दिया था। कोर्ट ने दोषी को एक साल की परिवीक्षा पर रिहाई का आदेश दिया है। दोषी को 15 दिन के अंदर जिला प्रोबेशन अधिकारी के समक्ष 20 हजार रुपये का बंधपत्र दाखिल करना होगा और एक हजार रुपये बतौर क्षतिपूर्ति का रेलवे को भुगतान करना होगा।
रेलवे लाइन पर साइकिल छोड़ने के आरोपी को जमानत
बरेली। एसीजेएम उत्तर रेलवे बरेली अनामिका सिंह ने शनिवार को रेलवे लाइन पर साइकिल छोड़ने के आरोपी उमेश कुमार उर्फ सोनू की जमानत याचिका स्वीकृत कर ली। उसके खिलाफ आरपीएफ थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। आरोप है कि वह अनाधिकृत रूप से लाल फाटक ओवर ब्रिज के नीचे रेलवे लाइनों को साइकिल से पार कर रहा था। इसी दौरान तेजी से आ रही ट्रेन को देखकर साइकिल रेलवे लाइन पर ही छोड़ दी। साइकिल ट्रेन के इंजन से टकराने के कारण यात्रियों के जीवन को संकट पैदा हो गया।