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Bareilly News: बेसमेंट में चल रहा ट्रामा सेंटर, जांच सुविधा नदारद, पर इलाज सभी मर्ज का
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बरेली। डोहरा रोड पर संचालित अपोलो अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती बच्चे की चोरी का प्रकरण सामने आने के बाद अमर उजाला की टीम ने बुधवार को बदायूं रोड पर संचालित अस्पतालों का जायजा लिया। ट्रामा सेंटर का बोर्ड लगाए अस्पतालों में जांच की सुविधाएं नदारद मिलीं। डॉक्टर ऑन कॉल ही आते हैं। मानक अधूरे होने पर भी बेहतर इलाज का दावा किया जा रहा है।
अपराह्न तीन बजे टीम लाल फाटक मार्ग पर संचालित न्यू अपेक्स हॉस्पिटल एंड ट्रामा सेंटर पर पहुंची। यहां ट्रामा सेंटर की सुविधाओं का दावा बोर्ड पर दर्ज मिला, पर संंबंधित अस्पताल और ट्रामा सेवाएं बेसमेंट में चलती मिलीं। परिसर में सन्नाटा था। मौजूद रिसेप्शनिस्ट ने बताया कि अस्पताल में दुर्घटनाग्रस्त मरीजों का इलाज, प्रसव, सर्जरी, सभी ऑपरेशन होते हैं। आयुष्मान कार्ड से भी इलाज होता है। कुछ डॉक्टर ऑन कॉल सेवाएं देते हैं, पर यहां रेडियोलॉजी सुविधा नहीं है। मरीज को सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड आदि जांचें बाहर से करानी पड़ती हैं।
पैथोलॉजी में रक्त संबंधी जांचों का दावा किया, पर कौन-कौन सी जांच होती हैं? इस पर डॉक्टर से जानकारी लेने की बात कही। विजिटिंग कार्ड दिया। नंबर पर कॉल की गई तो फोन रिसीव हुआ, पर उन्होंने भी कोई जवाब नहीं दिया। पैनल में दर्ज डॉक्टर मौजूद नहीं थे। कोई मरीज भी भर्ती नहीं मिला। अस्पताल के संचालक डॉ. हृदेश पाल ने बताया कि ट्रामा की सारी सुविधाएं हैं। न्यूरो से लेकर ऑर्थो विशेषज्ञ चिकित्सकों का पैनल है। स्थान परिवर्तन की वजह से आईसीयू अभी तैयार नहीं है। बेसमेंट में अस्पताल चल रहा है पर ऊपर निर्माण जारी है। इसकी वजह से व्यवस्थाएं डगमगाई हैं। सीटी स्कैन, एमआरआई जांचें नहीं होतीं।
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दोपहर ढाई बजे टीम बदायूं रोड पर पटेल विहार में संचालित आदित्य हॉस्पिटल एंड ट्रामा सेंटर पहुंची। यहां ट्रामा यानी गंभीर दुर्घटनाग्रस्त मरीजों के इलाज, सभी प्रकार की सर्जरी, प्रसव, दूरबीन विधि से किडनी, पेट के ऑपरेशन, कूल्हा, घुटना प्रत्यारोपण समेत अन्य कई इलाज का जिक्र बोर्ड पर किया गया है। मैनेजर अजय कुमार ने बताया कि एक्सरे के अलावा अन्य कोई रेडियोलॉजी जांच नहीं होती। अस्पताल में गायनेकोलॉजिस्ट नहीं हैं पर सामान्य, सिजेरियन प्रसव होते हैं। पैनल के कुछ डॉक्टर ऑन काॅल मरीजों को देखने आते हैं। कम खर्च में बढि़या इलाज होता है।
लाल फाटक पुल के पास संचालित आर्या हॉस्पिटल, ट्रामा सेंटर में अपराह्न साढ़े तीन बजे मरीजों की कतार लगी मिली। पैनल में दर्ज कुछ डॉक्टर मौजूद थे तो कुछ ऑन कॉल ही देखने पहुंचते हैं। प्रसव होते हैं पर स्टाफ ने आयुष्मान कार्ड से इलाज की सुविधा नहीं होने की जानकारी दी। रेडियोलॉजी संबंधी जांचें भी नहीं होतीं। संचालिका डॉ. मीनाक्षी राजपूत ने बताया कि ट्रामा संबंधी एक्सीडेंटल, हेड इंजरी के मरीजों के लिए डॉक्टर आते हैं। अल्ट्रासाउंड, एमआरआई, सीटी स्कैन नहीं हाेता। सामान्य व सिजेरियन प्रसव होते हैं।
अमर उजाला में बुधवार को प्रकाशित निजी अस्पतालों में इलाज की व्यवस्था संबंधी पड़ताल की खबर का संज्ञान लेकर स्वास्थ्य विभाग ने चारों पंजीकृत अस्पतालों को नोटिस भेजा है। संचालकों से अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं, डॉक्टरों के पैनल आदि की रिपोर्ट मांगी है। दावों के सापेक्ष अगर सुविधाएं नहीं हैं तो उसे दुरुस्त कराकर अवगत कराने के लिए कहा है। अमर उजाला की टीम ने अहसास अस्पताल, मेडिविजन, सुभांश सेवा हॉस्पिटल, श्री पोशाकीलाल अस्पताल का जायजा लिया था।
ट्रामा सेंटर के मानक
- चार ऑपरेशन थियेटर होने चाहिए। न्यूरो, हड्डी व पेट के लिए अलग-अलग ऑपरेशन थियेटर होने चाहिए।
- आईसीयू की सुविधा। एमआरआई, सीटी स्कैन व अन्य रेडियोलॉजी जांचों की सुविधा।
- ब्लड बैंक, पैथोलॉजी की सुविधा, आठ-आठ घंटे के रोस्टर पर विशेषज्ञों की तैनाती।
- सिर से पैर तक की सर्जरी के लिए एक ही छत के नीचे सभी सुविधाएं।
- न्यूरो सर्जन, आर्थोपेडिक सर्जन समेत अन्य सर्जन 24 घंटे ट्रामा सेंटर में मौजूद रहें।
- ट्रामा मरीजों के लिए अलग व्यवस्था हो। सामान्य मरीज यहां नहीं देखे जाते हैं।
- अग्निशमन समेत अन्य संबंधित विभागों की एनओसी, प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ।
वर्जन
अगर अस्पताल में इमरजेंसी है। वहां न्यूरो सर्जन, ऑर्थो सर्जन, एनेस्थेटिक, अन्य विशेषज्ञ चिकित्सक और प्रशिक्षित स्टाफ हैं तो उसे ट्रामा सेंटर कहा जा सकता है। अगर यह मानक पूरे नहीं हैं तो उन्हें दिखवाया जाएगा। - डॉ. लईक अहमद अंसारी, एसीएमओ, नोडल अधिकारी, निजी अस्पताल
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अपराह्न तीन बजे टीम लाल फाटक मार्ग पर संचालित न्यू अपेक्स हॉस्पिटल एंड ट्रामा सेंटर पर पहुंची। यहां ट्रामा सेंटर की सुविधाओं का दावा बोर्ड पर दर्ज मिला, पर संंबंधित अस्पताल और ट्रामा सेवाएं बेसमेंट में चलती मिलीं। परिसर में सन्नाटा था। मौजूद रिसेप्शनिस्ट ने बताया कि अस्पताल में दुर्घटनाग्रस्त मरीजों का इलाज, प्रसव, सर्जरी, सभी ऑपरेशन होते हैं। आयुष्मान कार्ड से भी इलाज होता है। कुछ डॉक्टर ऑन कॉल सेवाएं देते हैं, पर यहां रेडियोलॉजी सुविधा नहीं है। मरीज को सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड आदि जांचें बाहर से करानी पड़ती हैं।
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पैथोलॉजी में रक्त संबंधी जांचों का दावा किया, पर कौन-कौन सी जांच होती हैं? इस पर डॉक्टर से जानकारी लेने की बात कही। विजिटिंग कार्ड दिया। नंबर पर कॉल की गई तो फोन रिसीव हुआ, पर उन्होंने भी कोई जवाब नहीं दिया। पैनल में दर्ज डॉक्टर मौजूद नहीं थे। कोई मरीज भी भर्ती नहीं मिला। अस्पताल के संचालक डॉ. हृदेश पाल ने बताया कि ट्रामा की सारी सुविधाएं हैं। न्यूरो से लेकर ऑर्थो विशेषज्ञ चिकित्सकों का पैनल है। स्थान परिवर्तन की वजह से आईसीयू अभी तैयार नहीं है। बेसमेंट में अस्पताल चल रहा है पर ऊपर निर्माण जारी है। इसकी वजह से व्यवस्थाएं डगमगाई हैं। सीटी स्कैन, एमआरआई जांचें नहीं होतीं।
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दोपहर ढाई बजे टीम बदायूं रोड पर पटेल विहार में संचालित आदित्य हॉस्पिटल एंड ट्रामा सेंटर पहुंची। यहां ट्रामा यानी गंभीर दुर्घटनाग्रस्त मरीजों के इलाज, सभी प्रकार की सर्जरी, प्रसव, दूरबीन विधि से किडनी, पेट के ऑपरेशन, कूल्हा, घुटना प्रत्यारोपण समेत अन्य कई इलाज का जिक्र बोर्ड पर किया गया है। मैनेजर अजय कुमार ने बताया कि एक्सरे के अलावा अन्य कोई रेडियोलॉजी जांच नहीं होती। अस्पताल में गायनेकोलॉजिस्ट नहीं हैं पर सामान्य, सिजेरियन प्रसव होते हैं। पैनल के कुछ डॉक्टर ऑन काॅल मरीजों को देखने आते हैं। कम खर्च में बढि़या इलाज होता है।
लाल फाटक पुल के पास संचालित आर्या हॉस्पिटल, ट्रामा सेंटर में अपराह्न साढ़े तीन बजे मरीजों की कतार लगी मिली। पैनल में दर्ज कुछ डॉक्टर मौजूद थे तो कुछ ऑन कॉल ही देखने पहुंचते हैं। प्रसव होते हैं पर स्टाफ ने आयुष्मान कार्ड से इलाज की सुविधा नहीं होने की जानकारी दी। रेडियोलॉजी संबंधी जांचें भी नहीं होतीं। संचालिका डॉ. मीनाक्षी राजपूत ने बताया कि ट्रामा संबंधी एक्सीडेंटल, हेड इंजरी के मरीजों के लिए डॉक्टर आते हैं। अल्ट्रासाउंड, एमआरआई, सीटी स्कैन नहीं हाेता। सामान्य व सिजेरियन प्रसव होते हैं।
अमर उजाला में बुधवार को प्रकाशित निजी अस्पतालों में इलाज की व्यवस्था संबंधी पड़ताल की खबर का संज्ञान लेकर स्वास्थ्य विभाग ने चारों पंजीकृत अस्पतालों को नोटिस भेजा है। संचालकों से अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं, डॉक्टरों के पैनल आदि की रिपोर्ट मांगी है। दावों के सापेक्ष अगर सुविधाएं नहीं हैं तो उसे दुरुस्त कराकर अवगत कराने के लिए कहा है। अमर उजाला की टीम ने अहसास अस्पताल, मेडिविजन, सुभांश सेवा हॉस्पिटल, श्री पोशाकीलाल अस्पताल का जायजा लिया था।
ट्रामा सेंटर के मानक
- चार ऑपरेशन थियेटर होने चाहिए। न्यूरो, हड्डी व पेट के लिए अलग-अलग ऑपरेशन थियेटर होने चाहिए।
- आईसीयू की सुविधा। एमआरआई, सीटी स्कैन व अन्य रेडियोलॉजी जांचों की सुविधा।
- ब्लड बैंक, पैथोलॉजी की सुविधा, आठ-आठ घंटे के रोस्टर पर विशेषज्ञों की तैनाती।
- सिर से पैर तक की सर्जरी के लिए एक ही छत के नीचे सभी सुविधाएं।
- न्यूरो सर्जन, आर्थोपेडिक सर्जन समेत अन्य सर्जन 24 घंटे ट्रामा सेंटर में मौजूद रहें।
- ट्रामा मरीजों के लिए अलग व्यवस्था हो। सामान्य मरीज यहां नहीं देखे जाते हैं।
- अग्निशमन समेत अन्य संबंधित विभागों की एनओसी, प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ।
वर्जन
अगर अस्पताल में इमरजेंसी है। वहां न्यूरो सर्जन, ऑर्थो सर्जन, एनेस्थेटिक, अन्य विशेषज्ञ चिकित्सक और प्रशिक्षित स्टाफ हैं तो उसे ट्रामा सेंटर कहा जा सकता है। अगर यह मानक पूरे नहीं हैं तो उन्हें दिखवाया जाएगा। - डॉ. लईक अहमद अंसारी, एसीएमओ, नोडल अधिकारी, निजी अस्पताल