{"_id":"643326ad43c6517ee70f0468","slug":"torn-mattresses-in-the-district-hospital-animals-roaming-the-premises-bareilly-news-c-4-bly1005-121993-2023-04-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bareilly News: जिला अस्पताल में फटे गद्दे, परिसर में घूम रहे जानवर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bareilly News: जिला अस्पताल में फटे गद्दे, परिसर में घूम रहे जानवर
विज्ञापन
बरेली। इलाज का पता नहीं, लेकिन जिला अस्पताल में संक्रमण फैलने के पूरे इंतजाम हैं। परिसर में घूमते कुत्ते और अन्य छुट्टा पशु मरीजों-तीमारदारों के लिए खतरे का सबब बन सकते हैं। वार्ड और शौचालयों में गंदगी, फटे गद्दे, गंदी चादरें और इधर-उधर बिखरा बायोमेडिकल कचरा भी संक्रमण को दावत दे रहा है। अमर उजाला की टीम ने रविवार को अस्पताल में सुविधाओं की हकीकत जानने का प्रयास किया तो यही हकीकत सामने आई।
रविवार को ओपीडी बंद थी, बाहर तीन कुत्ते आपस में गुत्थमगुत्था हो रहे थे। इमरजेंसी के प्रवेश द्वार पर छह पिल्ले घूम रहे थे। इमरजेंसी की पहली मंजिल पर बने मेल वार्ड में बिछे गद्दे फटे हुए थे। शौचालय के अंदर बने चार हिस्सों में से एक को सफाई कर्मचारियों ने स्टोर बना लिया है। शेष तीन गंदगी से पटे मिले। इमरजेंसी के बाहर बने बायोमेडिकल वेस्ट डिस्पोजल कक्ष के पीछे कचरा बिखरा हुआ था। वहां एक गाय भी बैठी हुई थी। आसपास गंदगी व पीछे की ओर झाड़ियों के पास जलभराव था।
फटे गद्दे पर लेट रहे तीमारदार
दोपहर 11:30 बजे टीम अस्पताल परिसर में बने रैन बसेरे में पहुंची। यहां दुर्गंध बाहर तक आ रही थी। बाहर बना शौचालय टूटा हुआ था। अंदर के स्नानागार और शौचालय बजबजा रहे थे। हॉल में चार मरीजों के परिजन फटे गद्दे पर लेेटे और बैठे थे। उन्होंने बताया कि सफाई करने कोई नहीं आता। वे खुद ही झाडू लगा लेते हैं। किचन की सफाई न होने से फर्श पर गंदगी चिपक गई थी।
विज्ञापन
अफसर की सफाई
नहीं सुन रहा निगम, तीमारदार फैलाते हैं गंदगी
प्रभारी सीएमएस डॉ. मेघ सिंह ने बताया कि अस्पताल में पशुओं को पकड़ने के लिए कई बार नगर निगम से कहा गया, लेकिन वे ध्यान नहीं दे रहे। स्टाफ उनको भगाता है तो वे लौट आते हैं। गद्दे फटे होने की जानकारी पर उन्हें बदलवाने की बात कही। वार्ड, रैन बसेरा के शौचालय की सुबह सफाई कराने की बात कही। उन्होंने कहा कि मरीज और तीमारदार ही गंदगी करते है।
पुराने भवन में पेयजल का संकट
जिला अस्पताल के पुराने भवन में सर्जरी के बाद भर्ती होने वाले मरीजों के तीमारदार पानी के लिए भटक रहे थे। पेयजल के लिए लगी टोटियां सूखी थीं। मौजूद स्टाफ का कहना था कि जल्द ही फर्श बना है। आवाजाही से खराब न हो, इसलिए पानी की आपूर्ति बंद की गई है। विकल्प के तौर पर निकास द्वार के पास हैंडपंप है। तीमारदारों ने परिसर की जर्जर सड़क को दुरुस्त कराने की मांग की।
जांच रिपोर्ट का इंतजार भारी
पेट में दर्द का इलाज कराने के लिए भर्ती हुआ था। इलाज से राहत है। शनिवार को जांच के लिए सैंपल लिया था, अब तक रिपोर्ट नहीं आई है, इसलिए छुट्टी नहीं हो पा रही है। - जयपाल सिंह, बदायूं
-
पेट के इलाज के लिए करीब 12 दिन पहले भर्ती हुआ था। अस्पताल में इलाज, स्टाफ का व्यवहार और मिलने वाला खाना भी बेहतर है। शौचालय गंदा होने से परेशानी होती है। - नसीब खान, अलीगंज
सांस संबंधी तकलीफ होने पर इलाज के लिए भर्ती हुए आठ दिन बीत गए हैं। पहले से काफी राहत है। दो दिन बीत गए पर अब तक एक्सरे और जांच रिपोर्ट नहीं मिली है। - मसीद अहमद, पुराना शहर
मुंह से अचानक खून निकलने पर इलाज के लिए शनिवार को भर्ती हुआ था। जांच के लिए सैंपल लिया था पर अब तक रिपोर्ट नहीं मिली पर तकलीफ से राहत है। - अरबाज, सीबीगंज
विज्ञापन
रविवार को ओपीडी बंद थी, बाहर तीन कुत्ते आपस में गुत्थमगुत्था हो रहे थे। इमरजेंसी के प्रवेश द्वार पर छह पिल्ले घूम रहे थे। इमरजेंसी की पहली मंजिल पर बने मेल वार्ड में बिछे गद्दे फटे हुए थे। शौचालय के अंदर बने चार हिस्सों में से एक को सफाई कर्मचारियों ने स्टोर बना लिया है। शेष तीन गंदगी से पटे मिले। इमरजेंसी के बाहर बने बायोमेडिकल वेस्ट डिस्पोजल कक्ष के पीछे कचरा बिखरा हुआ था। वहां एक गाय भी बैठी हुई थी। आसपास गंदगी व पीछे की ओर झाड़ियों के पास जलभराव था।
विज्ञापन
फटे गद्दे पर लेट रहे तीमारदार
दोपहर 11:30 बजे टीम अस्पताल परिसर में बने रैन बसेरे में पहुंची। यहां दुर्गंध बाहर तक आ रही थी। बाहर बना शौचालय टूटा हुआ था। अंदर के स्नानागार और शौचालय बजबजा रहे थे। हॉल में चार मरीजों के परिजन फटे गद्दे पर लेेटे और बैठे थे। उन्होंने बताया कि सफाई करने कोई नहीं आता। वे खुद ही झाडू लगा लेते हैं। किचन की सफाई न होने से फर्श पर गंदगी चिपक गई थी।
विज्ञापन
अफसर की सफाई
नहीं सुन रहा निगम, तीमारदार फैलाते हैं गंदगी
प्रभारी सीएमएस डॉ. मेघ सिंह ने बताया कि अस्पताल में पशुओं को पकड़ने के लिए कई बार नगर निगम से कहा गया, लेकिन वे ध्यान नहीं दे रहे। स्टाफ उनको भगाता है तो वे लौट आते हैं। गद्दे फटे होने की जानकारी पर उन्हें बदलवाने की बात कही। वार्ड, रैन बसेरा के शौचालय की सुबह सफाई कराने की बात कही। उन्होंने कहा कि मरीज और तीमारदार ही गंदगी करते है।
पुराने भवन में पेयजल का संकट
जिला अस्पताल के पुराने भवन में सर्जरी के बाद भर्ती होने वाले मरीजों के तीमारदार पानी के लिए भटक रहे थे। पेयजल के लिए लगी टोटियां सूखी थीं। मौजूद स्टाफ का कहना था कि जल्द ही फर्श बना है। आवाजाही से खराब न हो, इसलिए पानी की आपूर्ति बंद की गई है। विकल्प के तौर पर निकास द्वार के पास हैंडपंप है। तीमारदारों ने परिसर की जर्जर सड़क को दुरुस्त कराने की मांग की।
जांच रिपोर्ट का इंतजार भारी
पेट में दर्द का इलाज कराने के लिए भर्ती हुआ था। इलाज से राहत है। शनिवार को जांच के लिए सैंपल लिया था, अब तक रिपोर्ट नहीं आई है, इसलिए छुट्टी नहीं हो पा रही है। - जयपाल सिंह, बदायूं
-
पेट के इलाज के लिए करीब 12 दिन पहले भर्ती हुआ था। अस्पताल में इलाज, स्टाफ का व्यवहार और मिलने वाला खाना भी बेहतर है। शौचालय गंदा होने से परेशानी होती है। - नसीब खान, अलीगंज
सांस संबंधी तकलीफ होने पर इलाज के लिए भर्ती हुए आठ दिन बीत गए हैं। पहले से काफी राहत है। दो दिन बीत गए पर अब तक एक्सरे और जांच रिपोर्ट नहीं मिली है। - मसीद अहमद, पुराना शहर
मुंह से अचानक खून निकलने पर इलाज के लिए शनिवार को भर्ती हुआ था। जांच के लिए सैंपल लिया था पर अब तक रिपोर्ट नहीं मिली पर तकलीफ से राहत है। - अरबाज, सीबीगंज