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टीकमदास चांदवानी पर पत्नी, बेटे और दो बेटियों की हत्या का दोष सिद्ध
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पीलीभीत। टीकमदास चांदवानी ने 24 अगस्त 1984 को पत्नी, बेटे और दो बेटियों की हत्या और उनकी हत्या के लिए साजिश का दोष अदालत में सिद्ध हो गया है। अदालत ने अपने आदेश में लिखा है कि अभियुक्त टीकमदास चांदवानी अनुपस्थित है। इसलिए उसके विरुद्ध गैरजमानती वांरट के आदेश हुए। अभियुक्त को गिरफ्तार कर दंड के बिंदु पर सुने जाने जाने के लिए पेश किया जाए।
मोहल्ला तखान निवासी टीकमदास चांदवानी ने 41 वर्षीय पत्नी पुष्पा, 22 वर्षीय पुत्र प्रभुदास, 19 वर्षीय पुत्री पुष्पा और सात वर्षीय पुत्री रानी की भाड़े के हत्यारों को बुलाकर हत्या कराई थी। गला रेतकर नृशंस हत्या की गई थी। पुलिस ने इस पर तीन अलग-अलग आरोप पत्र दाखिल किए। आरोप पत्र में ही टीकमदास चांदवानी को आरोपी बनाया गया। वह जेल गया था और जमानत पर बाहर आ गया। जब इस केस में सजा का फैसला सुनाया गया तो टीकमदास चांदवानी अदालत में हाजिर नहीं था। इसलिए उसके बारे में सजा नहीं सुनाई गई लेकिन अदालत ने उस पर दोष सिद्ध माना है। सजा उसकी मौजूदगी में सुनाई जाएगी ताकि दंड के बिंदु पर वह कुछ चाहे तो अदालत को बता सके। बाकी तीन दोषियों हीरालाल, सुरेश सिंह और रमेश सिंह को जेल भेज दिया गया। सरकारी अधिवक्ता मनोज मिश्रा ने कहा कि दोषियों को सजा हुई और न्याय की जीत हुई है।
यह थे हत्यारे
पीलीभीत नगर निवासी डॉ. असरार साकिब, बरेली जिला के थाना बिसारतगंज निवासी रईस मियां, इसी थाना क्षेत्र के मुशरफपुर निवासी हीरालाल, ग्राम चौबारी थाना कैंट बरेली निवासी सुरेश सिंह और रमेश सिंह, थाना भुता के बेबुलबसंतपुर निवासी सुखपाल सिंह और मुकदमे के वादी टीकमदास चांदवानी को हत्या और हत्या की साजिश का दोषी पाकर पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। इसमें डा. असरार साकिब, रईस मियां, सुखपाल की मौत हो चुकी है।
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34 साल बाद सेशन कोर्ट में शुरू हुई सुनवाई
दोषियों ने सजा से बचने के बहुत किए जतन पर बच न पाए
पीलीभीत। चौहरे हत्याकांड में सजा से बचने के लिए आरोपियों ने लाख जतन किए पर अंत में हार गए। बार-बार मुकदमे की प्रक्रिया को स्थगित कराने की कोशिश की। वर्षों तक मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन रहा। सेशन ट्रायल में आते-आते 34 वर्ष वर्ष लग गए।
पत्नी और बच्चों की हत्या में शामिल टीकमदास चांदवानी ने पुलिस को गुमराह करने के लिए अज्ञात के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी लेकिन विवेचना में राज खुल गया। पता लगा कि बिसारतगंज बरेली और कैंट थाना क्षेत्र चौबारी गांव से भाड़े के हत्यारों को बुलाकर टीकमदास चांदवानी ने पत्नी, बेटे, दो बेटियों की गला रेतकर हत्या कराई थी। पुलिस ने टीकमदास चांदवानी समेत सात लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।
वर्ष 2019 में सेशन ट्रायल शुरू हुआ लेकिन तब तक तीन अभियुक्त डॉ. असरार साकिब, रईस मियां उर्फ मोहम्मद हनीफ, सुखपाल दम तोड़ गए। इसलिए इन तीनों पर कार्रवाई नहीं हुई। सेशन कोर्ट ने 31 जनवरी 2019 को टीकमदास चांदवानी, हीरालाल, सुरेश सिंह और रमेश सिंह के खिलाफ आरोप बनाए। मार्च 2020 से कोरोना की पाबंदियों की वजह से परीक्षण लंबित रहा पर जब ट्रायल शुरू हुआ तो अदालत ने जल्दी-जल्दी तारीखें लगाईं और साक्ष्यों और गवाहों का परीक्षण किया।
आरोप तय होने के बाद गवाहों को तलब किया गया। तीन वर्ष चार महीने तक अलग-अलग तिथियों पर सुनवाई हुई। इस दौरान अभियोजन पक्ष से नौ गवाह पेश हुए। बचाव पक्ष से मात्र एक गवाह पेश हुईं। लंबी सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की बहस हुई। विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट राजीव सिंह ने 11 अप्रैल को अदालत में 21 पेज का विस्तृत फैसला सुनाया। सरकारी वकील के रूप में मनोज कुमार मिश्रा ने बहस की।
फोटो नंबर--49-50
मैंने देखा था मौत का मंजर, अदालत का फैसला आया तो मिली राहत
मेरे पिता जी की दुकान टीकमदास चांदवानी के घर के पास थी। मैं उस समय 24 वर्ष था और एमए कर रहा था। जब मोहल्ला फीलखाना स्थित अपने घर से कॉलेज के लिए निकला तब तक पूरे शहर में हत्या का शोर मच गया था। मैं कॉलेज छोड़कर सीधे घटना स्थल पहुंचा। मैंने अपनी आंखों से मौत का मंजर देखा था, जिसमें हर आंख नम थी। विकलांग बेटे और सात वर्ष की मासूम तक को काटा गया था। बाद में पता लगा कि सुपारी किलर बुलाए गए थे। वर्षों तक जब भी उधर से गुजरते थे तब हत्याकांड की याद आती थी। अब दोषियों को सजा मिली तो मैं यही कहूंगा कि अदालत ने न्याय किया है।
मोहम्मद अनवार अहमद खां, वरिष्ठ अधिवक्ता
न्यायपालिका ने भरोसा कायम रखा, अपराधी बच नहीं पाए
भले ही वक्त लगा और आरोपियों ने अपने बचाव के लिए बार-बार खुद को निर्दोष बताने की कोशिश की। अदालत ने न्याय करके लोगों के सामने न्यायपालिका के प्रति भरोसा कायम रखा है। मैं न्यायपालिका को सैल्यूट करता हूं। मुझे घटना आज भी याद है। मेरे साथ इंटरमीडिएट तक टीकमदास चांदवानी का बेटा पढ़ा था। मेरे पिता की आढ़त घटना स्थल के निकट गल्ला मंडी में थी। जब मुझे पता लगा कि मेरे साथ पढ़ने वाले प्रभु दास की हत्या हो गई है तो मैं दौड़ा-दौड़ा मोहल्ला तखान पहुंचा। हालात देख मैं भी स्तब्ध रह गया। जब बाद में पता लगा कि टीकमदास चांदवानी ने ही बेटे और बेटियों के साथ अपनी पत्नी की हत्या कराई है। तभी से फैसले की प्रतीक्षा थी। अब फैसला सुना तो लगा कि अपराधी कितना भी प्रयास करे। न्यायपालिका से बच नहीं सकते।
पंकज अग्रवाल, व्यापारी
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मोहल्ला तखान निवासी टीकमदास चांदवानी ने 41 वर्षीय पत्नी पुष्पा, 22 वर्षीय पुत्र प्रभुदास, 19 वर्षीय पुत्री पुष्पा और सात वर्षीय पुत्री रानी की भाड़े के हत्यारों को बुलाकर हत्या कराई थी। गला रेतकर नृशंस हत्या की गई थी। पुलिस ने इस पर तीन अलग-अलग आरोप पत्र दाखिल किए। आरोप पत्र में ही टीकमदास चांदवानी को आरोपी बनाया गया। वह जेल गया था और जमानत पर बाहर आ गया। जब इस केस में सजा का फैसला सुनाया गया तो टीकमदास चांदवानी अदालत में हाजिर नहीं था। इसलिए उसके बारे में सजा नहीं सुनाई गई लेकिन अदालत ने उस पर दोष सिद्ध माना है। सजा उसकी मौजूदगी में सुनाई जाएगी ताकि दंड के बिंदु पर वह कुछ चाहे तो अदालत को बता सके। बाकी तीन दोषियों हीरालाल, सुरेश सिंह और रमेश सिंह को जेल भेज दिया गया। सरकारी अधिवक्ता मनोज मिश्रा ने कहा कि दोषियों को सजा हुई और न्याय की जीत हुई है।
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यह थे हत्यारे
पीलीभीत नगर निवासी डॉ. असरार साकिब, बरेली जिला के थाना बिसारतगंज निवासी रईस मियां, इसी थाना क्षेत्र के मुशरफपुर निवासी हीरालाल, ग्राम चौबारी थाना कैंट बरेली निवासी सुरेश सिंह और रमेश सिंह, थाना भुता के बेबुलबसंतपुर निवासी सुखपाल सिंह और मुकदमे के वादी टीकमदास चांदवानी को हत्या और हत्या की साजिश का दोषी पाकर पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। इसमें डा. असरार साकिब, रईस मियां, सुखपाल की मौत हो चुकी है।
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34 साल बाद सेशन कोर्ट में शुरू हुई सुनवाई
दोषियों ने सजा से बचने के बहुत किए जतन पर बच न पाए
पीलीभीत। चौहरे हत्याकांड में सजा से बचने के लिए आरोपियों ने लाख जतन किए पर अंत में हार गए। बार-बार मुकदमे की प्रक्रिया को स्थगित कराने की कोशिश की। वर्षों तक मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन रहा। सेशन ट्रायल में आते-आते 34 वर्ष वर्ष लग गए।
पत्नी और बच्चों की हत्या में शामिल टीकमदास चांदवानी ने पुलिस को गुमराह करने के लिए अज्ञात के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी लेकिन विवेचना में राज खुल गया। पता लगा कि बिसारतगंज बरेली और कैंट थाना क्षेत्र चौबारी गांव से भाड़े के हत्यारों को बुलाकर टीकमदास चांदवानी ने पत्नी, बेटे, दो बेटियों की गला रेतकर हत्या कराई थी। पुलिस ने टीकमदास चांदवानी समेत सात लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।
वर्ष 2019 में सेशन ट्रायल शुरू हुआ लेकिन तब तक तीन अभियुक्त डॉ. असरार साकिब, रईस मियां उर्फ मोहम्मद हनीफ, सुखपाल दम तोड़ गए। इसलिए इन तीनों पर कार्रवाई नहीं हुई। सेशन कोर्ट ने 31 जनवरी 2019 को टीकमदास चांदवानी, हीरालाल, सुरेश सिंह और रमेश सिंह के खिलाफ आरोप बनाए। मार्च 2020 से कोरोना की पाबंदियों की वजह से परीक्षण लंबित रहा पर जब ट्रायल शुरू हुआ तो अदालत ने जल्दी-जल्दी तारीखें लगाईं और साक्ष्यों और गवाहों का परीक्षण किया।
आरोप तय होने के बाद गवाहों को तलब किया गया। तीन वर्ष चार महीने तक अलग-अलग तिथियों पर सुनवाई हुई। इस दौरान अभियोजन पक्ष से नौ गवाह पेश हुए। बचाव पक्ष से मात्र एक गवाह पेश हुईं। लंबी सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की बहस हुई। विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट राजीव सिंह ने 11 अप्रैल को अदालत में 21 पेज का विस्तृत फैसला सुनाया। सरकारी वकील के रूप में मनोज कुमार मिश्रा ने बहस की।
फोटो नंबर--49-50
मैंने देखा था मौत का मंजर, अदालत का फैसला आया तो मिली राहत
मेरे पिता जी की दुकान टीकमदास चांदवानी के घर के पास थी। मैं उस समय 24 वर्ष था और एमए कर रहा था। जब मोहल्ला फीलखाना स्थित अपने घर से कॉलेज के लिए निकला तब तक पूरे शहर में हत्या का शोर मच गया था। मैं कॉलेज छोड़कर सीधे घटना स्थल पहुंचा। मैंने अपनी आंखों से मौत का मंजर देखा था, जिसमें हर आंख नम थी। विकलांग बेटे और सात वर्ष की मासूम तक को काटा गया था। बाद में पता लगा कि सुपारी किलर बुलाए गए थे। वर्षों तक जब भी उधर से गुजरते थे तब हत्याकांड की याद आती थी। अब दोषियों को सजा मिली तो मैं यही कहूंगा कि अदालत ने न्याय किया है।
मोहम्मद अनवार अहमद खां, वरिष्ठ अधिवक्ता
न्यायपालिका ने भरोसा कायम रखा, अपराधी बच नहीं पाए
भले ही वक्त लगा और आरोपियों ने अपने बचाव के लिए बार-बार खुद को निर्दोष बताने की कोशिश की। अदालत ने न्याय करके लोगों के सामने न्यायपालिका के प्रति भरोसा कायम रखा है। मैं न्यायपालिका को सैल्यूट करता हूं। मुझे घटना आज भी याद है। मेरे साथ इंटरमीडिएट तक टीकमदास चांदवानी का बेटा पढ़ा था। मेरे पिता की आढ़त घटना स्थल के निकट गल्ला मंडी में थी। जब मुझे पता लगा कि मेरे साथ पढ़ने वाले प्रभु दास की हत्या हो गई है तो मैं दौड़ा-दौड़ा मोहल्ला तखान पहुंचा। हालात देख मैं भी स्तब्ध रह गया। जब बाद में पता लगा कि टीकमदास चांदवानी ने ही बेटे और बेटियों के साथ अपनी पत्नी की हत्या कराई है। तभी से फैसले की प्रतीक्षा थी। अब फैसला सुना तो लगा कि अपराधी कितना भी प्रयास करे। न्यायपालिका से बच नहीं सकते।
पंकज अग्रवाल, व्यापारी