पीलीभीत टाइगर रिजर्व: वर्ष 2016 से अब तक 34 लोगों को मार चुका है बाघ, सिर्फ निगरानी तक सीमित वन विभाग
पीलीभीत टाइगर रिजर्व बनने के बाद मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं वर्ष 2016 से शुरू हुईं। इस साल चार ग्रामीणों को अपनी जान गंवानी पड़ी। 2017 में मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में तेजी से बढ़ोतरी हुई। 2017 में एक साल में 16 लोग बाघ के हमलों का शिकार हुए।
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पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) का दर्जा मिलने के बाद मानव वन्यजीव संघर्ष में अब तक 34 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। नए साल के अभी आठ दिन ही बीते थे कि जंगल के बाहर न्यूरिया क्षेत्र में राजमिस्त्री को बाघ ने मार डाला। इससे पहले 2021 में दियोरिया के जंगल में बाइक सवार दो लोगों को बाघ ने मार डाला था। तीसरे साथी ने रात में पेड़ पर चढ़कर अपनी जान बचाई थी।
जनपद के जंगल को जून 2014 में टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला था। पीटीआर की स्थापना के बाद बाघों के जंगलों से बाहर न निकलने के लिए कोई काम नहीं किया गया। सीमित संसाधनों के दम पर पीटीआर के अधिकारी वन और वन्यजीवों की सुरक्षा में जुट गए। नतीजा यह हुआ कि बाघों की संख्या तेजी से बढ़ती गई और उनके रहने के लिए जंगल कम पड़ता गया।
पीटीआर बनने के बाद मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं वर्ष 2016 से शुरू हुईं। इस साल चार ग्रामीणों को अपनी जान गंवानी पड़ी। 2017 में मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में तेजी से बढ़ोतरी हुई। 2017 में एक साल में 16 लोग बाघ के हमलों का शिकार हुए। वर्ष 2018 में तीन और वर्ष 2019 में एक ग्रामीण की बाघ के हमले में मौत हुई। 2018-19 में महज चार घटनाएं होने पर विभाग ने माना बाघ के हमलों में खासी कमी आई है।
2020 में सात ग्रामीणों की गई जान
विशेषज्ञों ने यहां तक कहना शुरू कर दिया था कि बाघों का स्वभाव इंसानों के प्रति मित्रवत होने लगा है। इसके साथ ही बाघों के हमले रोकने के लिए विभाग ठोस कदम उठाना ही भूल गया। इसका खामियाजा वर्ष 2020 में आमजन को उठाना पड़ा। 2020 में सात ग्रामीणों की बाघ के हमलों में मौत हो गई। इसके बाद वर्ष 2021 में बाघ ने दियोरिया रेंज के जंगल में बाइक सवार को दो युवकों का शिकार कर दहशत फैला दी।
इसके बाद विभाग के साथ डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और डब्ल्यूटीआई की टीम गांव-गांव लोगों को जागरूक करने लगी। इससे लोग तो जागरूक हुए, लेकिन बाघों का आक्रामक रुख नहीं बदल सका। आबादी के क्षेत्र में घूम रहे बाघों के मामले में सिर्फ निगरानी पर अमल किया गया।
नतीजतन, रविवार को न्यूरिया के गांव टंडोला विजेसी निवासी गोकुल मलिक को बाघ ने शिकार कर लिया। ग्रामीणों का कहना है कि पीटीआर के अधिकारियों के पास महज एक ही जवाब रहता है निगरानी की जाएगी। उनके पास ऐसी कोई योजना नहीं, जिससे बाघ जंगल से बाहर नहीं आ सकें या ग्रामीणों को बाघ के हमलों से बचाया जा सके।
वर्ष 2016 से अबतक
तिथि मृतक निवासीवर्ष 2016
30 जून - मेघनाथ - नदहा
23 अक्तूबर - बेनीराम- मरौरी
28 अक्तूबर- बाबूराम- पिपरिया
11 दिसंबर -अहमद खा- डगा
वर्ष 2017
16 जनवरी -राजीव- पिपरिया
05 फरवरी - धनीराम- कुंवरपुर
07 फरवरी - नन्हेंलाल- पिपरिया
11 फरवरी - गंगाराम- कलीनगर
16 फरवरी - कलावती- मेवातपुर
05 मार्च -ब्रहमस्वरूप- रम्पुरा
31 मार्च - श्याम बिहारी- जमुनिया
9 मई- ताराचंद्र- अनवरगंज
18 जून- केवल प्रसाद- मरौरी
20 जून- ननकी- सैदुल्लागंज
07 अगस्त- तसलीम- डांग
08 अगस्त -शमशुल- सरैदा
10 अगस्त- कुवंरसैन- बेहरी
18 अगस्त- रामचंद्र- पीलीभीत
01 अक्तूबर - बबलू- खरगापुर
28 दिसंबर - कैलाशो- पिपरिया
वर्ष 2018
16 जनवरी- मथुरा प्रसाद- निजामपुर तह
05 मार्च - गिरजा देवी- चांदूपुर
26 सितंबर -लक्षमण प्रसाद - सिमरिया
वर्ष 2019
11 अप्रैल - हेमंत खैराती - गोयल कॉलोनी
वर्ष 2020
01 फरवरी - फूलचंद - बैजूनगर
05 फरवरी - रुपलाल - विधिनपुर
21 मार्च - रमोनी देवी - माला कॉलोनी
30 मार्च - कृष्णा राय - माला कॉलोनी
03 अप्रैल - निंदर सिंह - रिछौला
03 अप्रैल - डोरीलाल- ढेरम मंडरिया
08 मई - शिवेंदु - गोयल कॉलोनी
वर्ष 2021
11 जुलाई - सोनू - दियोरिया
11 जुलाई - कंधई - दियोरिया
वर्ष 2022
08 जनवरी - गोकुल मलिक - टंडोला विजेसी