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किलकारी पर भारी बेपरवाही: बरेली के महिला अस्पताल में दो मृत बच्चे जन्मे, एक अन्य की प्रसव के बाद मौत

Mon, 04 Dec 2023 03:13 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Mon, 04 Dec 2023 03:13 PM IST
सार

महिला अस्पताल से मिली जानकारी के मुताबिक शनिवार देर रात एंबुलेंस से गर्भवती भर्ती होने पहुंची थीं। तीनों की हालत गंभीर थीं। दो के गर्भ में शिशु की मौत हो चुकी थी, तीसरी महिला के शिशु ने जन्म के बाद दम तोड़ दिया। 

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Three newborns died after delivery in women hospital Bareilly
महिला जिला अस्पताल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बरेली में गर्भधारण के बाद नियमित जांच, टीकाकरण और पौष्टिक आहार की अनदेखी गर्भस्थ शिशु की जान पर भारी पड़ रही है। शनिवार रात में चार प्रसव हुए। इनमें से दो गर्भवतियों ने मृत शिशु को जन्म दिया। एक शिशु ने जन्म के तुरंत बाद दम तोड़ दिया। अस्पताल परिसर में यह प्रकरण चर्चा में रहा। सीएमएस डॉ. त्रिभुवन प्रसाद ने बताया कि गर्भवतियों की नियमित जांच व देखभाल होती तो यह स्थिति नहीं आती।

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महिला अस्पताल से मिली जानकारी के मुताबिक शनिवार देर रात एंबुलेंस से गर्भवती भर्ती होने पहुंची थीं। तीनों की हालत गंभीर थीं। एक गर्भवती को तत्काल ऑपरेशन थिएटर में शिफ्ट करना पड़ा। डॉ. शशि के मुताबिक तीनों गर्भवती एनीमिक थीं। उनका हीमोग्लोबिन 5-7 के बीच था। एक गर्भवती का सिजेरियन और दो का सामान्य प्रसव कराया गया। सिजेरियन से जन्मा बच्चा कुछ देर तक जीवित रहा। फिर सांसें, रक्तचाप, हृदय गति धीरे-धीरे कम होने लगी। आधे घंटे बाद उसकी मौत हो गई।
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फरीदपुर, करगैना, अलीगंज के रहे मामले
अस्पताल के रिकॉर्ड के मुताबिक शनिवार रात फरीदपुर की 21 वर्षीय गर्भवती रीना और अलीगंज के रफियाबाद की 21 वर्षीय गर्भवती सुनीता गंभीर हालत में प्रसव के लिए पहुंचीं। डॉक्टरों के मुताबिक दोनों के गर्भ में शिशु की मौत हो चुकी थी। करगैना की गर्भवती पूनम ने बेटे को जन्म दिया। त्वचा कई जगह से फटी थी। एनीमिक होने से खून चढ़ाने की जरूरत पड़ी। थोड़ी देर बाद बच्चे की सांसें थम गईं। चौथा बच्चा 16 वर्षीय किशोरी ने जन्मा। डॉक्टर के मुताबिक वह रात 12:45 बजे प्रसव के लिए पहुंची थीं। सामान्य प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ्य हैं।

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आठ माह में दम तोड़ चुके हैं 192 नवजात
महिला अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल से 30 नवंबर तक जिले में 192 नवजात दम तोड़ चुके हैं। इसमें गर्भस्थ शिशुओं की तादाद 43 है। वहीं, कम वजन, जटिलता के साथ जन्मे, सिजेरियन के लिए तैयार होने में देरी की वजह से जन्मे बच्चे एसएनसीयू में भर्ती होते हैं, पर इन्हें बचा पाना मुश्किल होता है। हायर सेंटर होने से यहां बदायूं, पीलीभीत, शाहजहांपुर से भी रेफर केस पहुंचते हैं।

होती है निशुल्क जांच, मुफ्त मिलती है दवा
सीएमएस के मुताबिक गर्भधारण से प्रसव तक गर्भवतियों की चिकित्सा सेवा निशुल्क है। जननी सुरक्षा योजना, मातृ वंदना योजना के जरिये आर्थिक मदद मिलती है। आशा कार्यकर्ता गर्भवती और परिजन को समय-समय पर जरूरी सुझाव देतीं हैं। उन्होंने गर्भवतियों की नियमित जांच, टीकाकरण के साथ ही, पौष्टिक आहार के सेवन का सुझाव दिया है।

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