Bareilly: सकलैन मियां के आखिरी दीदार को उमड़े हजारों मुरीद, रविवार सुबह 10 बजे होगी नमाज-ए-जनाजा
हजरत शाह शराफत मियां की दरगाह के सज्जादानशीन मोहम्मद सकलैन मियां का शुक्रवार को इंतकाल हो गया। वह 70 वर्ष के थे। उनके इंतकाल की खबर मिलते ही देश-विदेश में मौजूद उनके मुरीदों में गम की लहर दौड़ गई।
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बरेली में दरगाह शाह शराफत मियां के सज्जादानशीन सकलैन मियां के इंतकाल की सूचना मिलने के बाद उनके मुरीदों के आने का सिलसिला जारी है। उनके आस्ताने ककराला और बदायूं से बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचे हैं। इसके अलावा विभिन्न राज्यों से भी हजारों लोग हजरत सकलैन मियां के आखिरी दीदार करने आए हैं। इसके मद्देनजर पुलिस ने आंशिक तौर पर ट्रैफिक डायवर्जन किया गया है।
हजरत सकलैन मियां हजरत शाह शराफत मियां की दरगाह के सज्जादानशीन थे। शुक्रवार शाम साढ़े छह बजे अचानक उनकी तबीयत खराब हुई तो उन्हें चौपुला स्थित निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। रात में ही तमाम लोग बदायूं से दरगाह शाह शराफत मियां पहुंचने लगे थे। सकलैन मियां के पार्थिव शरीर को दरगाह परिसर में आखिरी दीदार के लिए रखा गया है।
रविवार को होगी नमाज-ए-जनाजा
खानकाह शराफतिया बरेली के सज्जादानशीन पीरो मुर्शिद हजरत शाह मुहम्मद सकलैन मियां की नमाज-ए-जनाजा रविवार को इस्लामिया इंटर कॉलेज के मैदान में सुबह 10 बजे अदा की जाएगी। उन्हें दरगाह शराफत मियां के परिसर में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। उनके आखरी दीदार के लिए शुक्रवार की रात से ही अकीदतमंदों और मुरीदीन का लगातार तांता लगा हुआ है। देश के विभिन्न राज्यों से तमाम मुरीदीन लगातार बरेली पहुंच रहे हैं।
कुतुबखाना के पास पुल निर्माण की वजह से पहले ही भीड़भाड़ का माहौल रहता है। अब यहां स्थित दरगाह शाह शराफत मियां के सज्जादानशीन सकलैन मियां के आखिरी दीदार को उनके मुरीद उमड़ पड़े हैं। शहर समेत बदायूं और आसपास के शहरों से तमाम मुरीद मियां के आखिरी दीदार को दरगाह पहुंचे हैं। इसकी वजह से कुतुबखाना और उसके आसपास के इलाकों में भीड़ व जाम की स्थिति है।
सकलैन मियां के इंतकाल होने की खबर मिलते ही उनके पैतृक निवास ककराला के लोग स्तब्ध रह गए। जिसने भी खबर सुनी वो बरेली के लिए रवाना हो गया। शाह सकलैन मियां केवल ककराला ही नहीं, बल्कि बरेली समेत महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तराखंड में भी खासे लोकप्रिय थे। उनके मुरीद हर जगह हैं। सकलैन मियां राजनीति में सक्रिय नहीं थे, लेकिन बड़े-बड़े नेता उनका आशीर्वाद पाने के लिए लालायित रहते थे।