Bareilly News: गमजदा माहौल में सुपुर्द-ए-खाक हुए शब्बू मियां, नम आंखों से अकीदतमंदों ने दी आखिरी विदाई
बरेली में विश्व प्रसिद्ध खानकाह-ए-नियाजिया के प्रबंधक सिब्तैन हसन नियाजी उर्फ शब्बू मियां को गमगीन माहौल में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। बुधवार को उनके जनाजे में जनसैलाब उमड़ा। लोगों ने नम आंखों से उनके अंतिम दीदार किए और अंतिम विदाई दी।
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बरेली में विश्व प्रसिद्ध खानकाह-ए-नियाजिया के मुंतजिम रहे सिब्तैन हसन नियाजी उर्फ शब्बू मियां को गमजदा माहौल में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। बड़ी तादाद में लोगों ने नाम आंखों से उन्हें आखिरी विदाई दी।
शब्बू मियां का मंगलवार देर शाम इंतकाल हो गया था। बुधवार को सुबह से ही दूर-दराज के शहरों से उनके चाहने वाले खानकाह पहुंचने लगे थे। दोपहर में गुस्ल के बाद उनके जनाजे को जैसे ही बाहर लाया गया, लोग रोने लगे। कलमे के साथ या हुसैन की सदाएं गूंज उठीं। भीड़ को संभालना मुश्किल हो रहा था। बमुश्किल जनाजे को खानकाह परिसर में लाया गया। सज्जादानशीन शाह मेहंदी मियां नियाजी ने दोपहर डेढ़ बजे जनाजे की नमाज अदा कराई।
मगफिरत की दुआ के बाद जब वहां से जनाजा कब्रिस्तान ले जाया जाने लगा तो लोग कंधा देने के लिए बेचैन हो उठे। जनाजे तक न पहुंच पाने की वजह से कुछ लोग उनके जनाजे की पलंग या चादर को माथे से लगाते दिखे। खानकाह सहित आसपास के मकानों की छतों पर महिलाएं भी उनके आखिरी दीदार के लिए एकत्र रहीं।
कई शहरों से आए लोग
खानकाह से थोड़ी दूर पर खानकाही कब्रिस्तान में दोपहर दो बजे शब्बू मियां के जनाजे को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। मगफिरत की दुआ करते हुए लोग अलविदा कहकर वापस हुए। सभी मजहब के लोगों ने जनाजे में शिरकत कर शब्बू मियां को खिराज-ए-अकीदत पेश की। अजमेर शरीफ, दिल्ली, मुंबई, मुरादाबाद, अलीगढ़, आगरा सहित तमाम खानकाहों और दरगाहों से भी लोग पहुंचे थे।
शब्बू मियां का परिचय
जन्म : 15 जून 1958।
वर्ष 1980 में खानकाह के मुंतजिम बने।
पूर्व सज्जादा हजरत शाह हसनी मियां के छोटे भाई और खलीफा थे।
मौजूदा सज्जादा शाह मेहंदी मियां के चाचा थे।
बरेली की नायाब शख्सियत शब्बू मियां सौहार्द और मोहब्बत की मिसाल थे। उन्होंने खानकाह-ए-नियाजिया के मुंतजिम की जिम्मेदारी संभालते हुए दीन-दुनिया के तमाम काम को अंजाम दिया। माना जाता है कि वह इंसानियत के अलमबरदार रहे और सूफी विचारधारा के संदेश को आगे बढ़ाते हुए हर एक को गले लगाया। वह सभी मिलने वालों का दिल जीत लेते थे।
धर्म, संप्रदाय, जाति-बिरादरी, ऊंच-नीच और सियासी मतभेद से ऊपर उठ कर उन्होंने हर एक को अपनाया और सब के लिए दरवाजे खुले रखे। हर परेशान हाल की मदत के लिए हमेशा खड़े रहते थे। उन्हें देश-विदेश में होने वाली बड़ी-बड़ी सूफी कॉन्फ्रेंस में उन्हें आमंत्रित किया जाता था।
उनके भाई जाहिद मियां नियाजी ने बताया कि शब्बू मियां पूर्व सज्जादा हजरत शाह हसनी मियां नियाजी के खलीफा रहे और 45 साल तक खानकाह के निजाम को बखूबी संभाला। आईएमसी प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खां ने भी दुख का इजहार किया। समाजवादी पार्टी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर दुख जताया है।