अबकी बार छोटा रहेगा रावण के पुतले का कद
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अब तक किसी ने नहीं ली है दशहरा मेले की परमीशन
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रस्म अदायगी के तौर पर महज 5 से 10 फिट ऊंचे ही पुतले फूंके जाएंगे
बरेली। शहर में इस बार भव्य रावण, कुंभकरण-मेघनाद का पुतला फुंकते देखने को नहीं मिलेगा। कोरोना संक्रमण को देखते हुए प्रशासन ने कहीं भी दशहरा मेला आयोजन की अनुमति नहीं दी है। खुद मेला कमेटी के आयोजकों ने कोरोना गाइड लाइन को देखकर हाथ खड़े कर लिए हैं। परंपरा निभाने के तौर पर माना जा रहा था कि कुछेक जगह दशहरा पर रावण का पुतला दहन संभव है, लेकिन वहां भी इस बार काफी छोटे कद के ही पुतले फूंके जाएंगे।
शासन ने इस बार त्योहारों के लिए गाइड लाइन तय कर दी है, जिसमें साफ है कि किसी भी धार्मिक आयोजन में 100-200 से ज्यादा लोग शामिल नहीं होंगे। यही कारण है कि शहर में हर साल होने वाली रामलीलाएं इस बार नहीं हो रही हैं। महज चौधरी तालाब के पास ही रामलीला हो रही है। यहां बता दें कि 25 अक्तूबर को दशहरा है। ऐेसे में लोग पसोपेश में हैं कि दशहरा मेला लगेगा या नहीं। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि बगैर अनुमति कोई आयोजन नहीं होगा न ही किसी भी प्रकार से भीड़ ही जुटने दी जाएगी।
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अधिकारियों का कहना है कि किसी भी आयोजन पर रोक नहीं है, लेकिन उसके लिए अनुमति आवश्यक होगी। साथ ही कोरोना की गाइड लाइन का भी पालन करना और कराना सुनिश्चित करना होगा, जिसे देखते हुए अधिकांश जगह पर कमेटी के लोगों ने रामलीला मंचन न कराने का फैसला लिया।
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यहां बता दें कि शहर में जोगी नवादा, सुभाष नगर, चौधरी तालाब, ब्रह्मपुरी आदि जगहों पर सालों से रामलीला होती आ रही हैं। यहां पर दशहरे वाले दिन मेला भी लगता है। रावण के 40 से 50 फिट ऊंचे पुतले तक जलाए जाते हैं। बड़ी संख्या में भीड़ जुटती है, लेकिन इस बार ऐसा कुछ भी नहीं होगा। केवल परंपरा का निर्वाह करते हुए आयोजक रावण का प्रतीकात्मक पुतला भी फूंक सकेंगे, जिनकी लंबाई महज 5 से 15 फिट तक होने की संभावना है।
कोरोना संक्रमण को देखते हुए धार्मिक आयोजनों के लिए शासन ने पहले से ही गाइड लाइन जारी कर रखी है, जिसके मुताबिक किसी को भी धार्मिक आयोजन करने की मनाही नहीं है, लेकिन जिसे आयोजन करना या कराना है वह कोरोना की गाइडलाइन का पालन करे। इसके लिए भी अनुमति आवश्यक होगी। अब तक दशहरा मेला लगाने के लिए किसी ने अनुमति नहीं मांगी है। - महेंद्र कुमार, एडीएम सिटी
जोगीनवादा की रामलीला 72 साल पुरानी है। वहां रावण, कुंभकरण, मेघनाद के 51-51 फिट के पुतले हर साल फूंके जाते थे। इस बार कोरोना के कारण रामलीला नहीं हो रही है। दशहरा वाले दिन 5 से 10 फिट ऊंचे पुतले फूंके जाएंगे, जिसमें कमेटी के लोग शामिल होंगे।
- गिरधारी साहू, मेला प्रभारी, जोगीनवादा रामलीला कमेटी
इस बार महज 10 फिट के तीन प्रतीकात्मक पुतले फूंके जाएंगे। चूंकि रामलीला ही नहीं हो रही है इसलिए मेला भी नहीं लगेगा। कमेटी के लोग आपस में ही इकट्ठा होकर पुतला दहन कर दशहरे की रस्म अदा करेंगे।
- प्रदीप अग्रवाल, मेला प्रभारी, सुभाषनगर रामलीला कमेटी
चौधरी तालाब मोहल्ले में होने वाली रामलीला में भी 50 से 55 फिट ऊंचे रावण, कुंभकरण व मेघनाद के पुतले फूंके जाते हैं, लेकिन इस बार रामलीला प्रतीकात्मक ढंग से हो रही है। कोरोना गाइड लाइन को ध्यान में रखते हुए महज 8 से 10 फिट ऊंचे ही पुतले फूंके जाएंगे।- धीरेंद्र शुक्ला, उपमंत्री, चौधरी तालाब मोहल्ला रामलीला कमेटी
रस्म अदायगी के तौर पर महज 5 से 10 फिट ऊंचे ही पुतले फूंके जाएंगे बरेली। शहर में इस बार भव्य रावण, कुंभकरण-मेघनाद का पुतला फुंकते देखने को नहीं मिलेगा। कोरोना संक्रमण को देखते हुए प्रशासन ने कहीं भी दशहरा मेला आयोजन की अनुमति नहीं दी है। खुद मेला कमेटी के आयोजकों ने कोरोना गाइड लाइन को देखकर हाथ खड़े कर लिए हैं। परंपरा निभाने के तौर पर माना जा रहा था कि कुछेक जगह दशहरा पर रावण का पुतला दहन संभव है, लेकिन वहां भी इस बार काफी छोटे कद के ही पुतले फूंके जाएंगे।
शासन ने इस बार त्योहारों के लिए गाइड लाइन तय कर दी है, जिसमें साफ है कि किसी भी धार्मिक आयोजन में 100-200 से ज्यादा लोग शामिल नहीं होंगे। यही कारण है कि शहर में हर साल होने वाली रामलीलाएं इस बार नहीं हो रही हैं। महज चौधरी तालाब के पास ही रामलीला हो रही है। यहां बता दें कि 25 अक्तूबर को दशहरा है। ऐेसे में लोग पसोपेश में हैं कि दशहरा मेला लगेगा या नहीं। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि बगैर अनुमति कोई आयोजन नहीं होगा न ही किसी भी प्रकार से भीड़ ही जुटने दी जाएगी।
अधिकारियों का कहना है कि किसी भी आयोजन पर रोक नहीं है, लेकिन उसके लिए अनुमति आवश्यक होगी। साथ ही कोरोना की गाइड लाइन का भी पालन करना और कराना सुनिश्चित करना होगा, जिसे देखते हुए अधिकांश जगह पर कमेटी के लोगों ने रामलीला मंचन न कराने का फैसला लिया।
यहां बता दें कि शहर में जोगी नवादा, सुभाष नगर, चौधरी तालाब, ब्रह्मपुरी आदि जगहों पर सालों से रामलीला होती आ रही हैं। यहां पर दशहरे वाले दिन मेला भी लगता है। रावण के 40 से 50 फिट ऊंचे पुतले तक जलाए जाते हैं। बड़ी संख्या में भीड़ जुटती है, लेकिन इस बार ऐसा कुछ भी नहीं होगा। केवल परंपरा का निर्वाह करते हुए आयोजक रावण का प्रतीकात्मक पुतला भी फूंक सकेंगे, जिनकी लंबाई महज 5 से 15 फिट तक होने की संभावना है।
कोरोना संक्रमण को देखते हुए धार्मिक आयोजनों के लिए शासन ने पहले से ही गाइड लाइन जारी कर रखी है, जिसके मुताबिक किसी को भी धार्मिक आयोजन करने की मनाही नहीं है, लेकिन जिसे आयोजन करना या कराना है वह कोरोना की गाइडलाइन का पालन करे। इसके लिए भी अनुमति आवश्यक होगी। अब तक दशहरा मेला लगाने के लिए किसी ने अनुमति नहीं मांगी है। - महेंद्र कुमार, एडीएम सिटी
जोगीनवादा की रामलीला 72 साल पुरानी है। वहां रावण, कुंभकरण, मेघनाद के 51-51 फिट के पुतले हर साल फूंके जाते थे। इस बार कोरोना के कारण रामलीला नहीं हो रही है। दशहरा वाले दिन 5 से 10 फिट ऊंचे पुतले फूंके जाएंगे, जिसमें कमेटी के लोग शामिल होंगे।
- गिरधारी साहू, मेला प्रभारी, जोगीनवादा रामलीला कमेटी
इस बार महज 10 फिट के तीन प्रतीकात्मक पुतले फूंके जाएंगे। चूंकि रामलीला ही नहीं हो रही है इसलिए मेला भी नहीं लगेगा। कमेटी के लोग आपस में ही इकट्ठा होकर पुतला दहन कर दशहरे की रस्म अदा करेंगे।
- प्रदीप अग्रवाल, मेला प्रभारी, सुभाषनगर रामलीला कमेटी
चौधरी तालाब मोहल्ले में होने वाली रामलीला में भी 50 से 55 फिट ऊंचे रावण, कुंभकरण व मेघनाद के पुतले फूंके जाते हैं, लेकिन इस बार रामलीला प्रतीकात्मक ढंग से हो रही है। कोरोना गाइड लाइन को ध्यान में रखते हुए महज 8 से 10 फिट ऊंचे ही पुतले फूंके जाएंगे।- धीरेंद्र शुक्ला, उपमंत्री, चौधरी तालाब मोहल्ला रामलीला कमेटी