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Bareilly News: अहमदाबाद, इंदौर को ऐसे पछाड़ेंगे... आबादी के बीच डलावघर, सड़क पर कूड़ा
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बरेली। गेटवे ऑफ कुमायूं, मेडिकल हब और देश व प्रदेश की राजधानी के बीच स्थित स्मार्ट सिटी बरेली में साफ-सफाई का हाल बुरा है। एक सिरे से दूसरे सिरे तक शहर के हर इलाके में कूड़ा सड़कों पर बिखरा दिखता है। डलावघर आबादी के बीच बने हैं। नगर निगम की गाड़ियां सूखा व गीला कूड़ा एक ही जगह इकट्ठा कर रही हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि स्वच्छता रैंकिंग में अपना शहर अहमदाबाद और इंदौर जैसे शहरों का मुकाबला कैसे करेगा?
नगर निगम के छोटे-बड़े वाहन डोर-टू-डोर कूड़ा एकत्रित करते हैं। कूड़े को वाहनों से सीधे एमआरएफ सेंटर भेजा जाना चाहिए, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा। सूखा और गीला कूड़ा एक साथ स्वरूपनगर चाहबाई, श्यामगंज, कुतुबखाना, चौपुला सहित अन्य स्थानों पर आबादी के बीच बनाए गए डलावघरों में इकट्ठा किया जा रहा है।
यही नहीं डोर-टू-डोर कूड़ा भी सिर्फ 60 प्रतिशत घरों से ही लिया जा रहा है। डलावघरों से यह कूड़ा बाकरगंज में इकट्ठा हो रहा है। पार्षद राजेश अग्रवाल का कहना है कि यही हाल रहा तो इस बार भी अपना शहर स्वच्छता की रैंकिंग में पीछे रह जाएगा।
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यह है हाल:
श्यामगंज: सब्जी मंडी के एक किनारे और श्यामगंज से गांधी उद्यान की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग के किनारे डलावघर है। यहां कूड़ा कई-कई दिन तक पड़ा रहता है। बीते दिनों सड़क तक ढेर इकट्ठा हो जाने की वजह से दिनभर जाम भी लगा रहा था।
चाहबाई: वार्ड संख्या 58 के चाहबाई स्वरूपनगर में आबादी के बीच स्थित डलावघर की वजह से बदबू फैल रही है। वार्ड के नितिन सक्सेना ने कहा कि डलावघर यहां से हटाने के लिए कई बार मांग की गई, अब तक सुनवाई नहीं हुई है।
चौपुला के करीब बगिया शिव मंदिर: डलावघर के बगल में मंदिर और सामने अस्पताल है। मुख्य मार्ग से हजारों लोग हर रोज मुंह पर रुमाल रखकर निकलते हैं। नगर निगम ने डलावघर की जगह पर पोर्टा केबिन रखवाया लेकिन उसे चालू नहीं कराया।
कटरा चांद खां: मौर्या मंदिर के निकट ही डलावघर है। सामने दुकानें हैं। कारोबारियों से लेकर ग्राहकों तक को आने जाने में असुविधा होती है। शिकायत करने पर हर बार आश्वासन की घुट्टी देकर अधिकारी घर भेज देते हैं।
लोगों की बात
नगर निगम की गाड़ी हो या आम आदमी, डलावघरों में कूड़ा फेंकने वालों से जुर्माना लिया जाना चाहिए। - प्रशांत गुप्ता, चौपुला
तमाम लोग ऐसे हैं जो डोर-टू-डोर सर्विस को कूड़ा नहीं देते, डलावघरों में कूड़ा फेंक रहे हैं। इन पर सख्ती होनी चाहिए। - अमित प्रताप सिंह, बगिया शिव मंदिर
आने जाने में हर किसी को दिक्कत होती है। अधिकारी देखकर लौट जाते हैं। डलावघर जहां के तहां हैं। -हरीश चंद्र, चाहबाई
अमर उजाला ब्यूरो
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नगर निगम के छोटे-बड़े वाहन डोर-टू-डोर कूड़ा एकत्रित करते हैं। कूड़े को वाहनों से सीधे एमआरएफ सेंटर भेजा जाना चाहिए, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा। सूखा और गीला कूड़ा एक साथ स्वरूपनगर चाहबाई, श्यामगंज, कुतुबखाना, चौपुला सहित अन्य स्थानों पर आबादी के बीच बनाए गए डलावघरों में इकट्ठा किया जा रहा है।
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यही नहीं डोर-टू-डोर कूड़ा भी सिर्फ 60 प्रतिशत घरों से ही लिया जा रहा है। डलावघरों से यह कूड़ा बाकरगंज में इकट्ठा हो रहा है। पार्षद राजेश अग्रवाल का कहना है कि यही हाल रहा तो इस बार भी अपना शहर स्वच्छता की रैंकिंग में पीछे रह जाएगा।
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यह है हाल:
श्यामगंज: सब्जी मंडी के एक किनारे और श्यामगंज से गांधी उद्यान की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग के किनारे डलावघर है। यहां कूड़ा कई-कई दिन तक पड़ा रहता है। बीते दिनों सड़क तक ढेर इकट्ठा हो जाने की वजह से दिनभर जाम भी लगा रहा था।
चाहबाई: वार्ड संख्या 58 के चाहबाई स्वरूपनगर में आबादी के बीच स्थित डलावघर की वजह से बदबू फैल रही है। वार्ड के नितिन सक्सेना ने कहा कि डलावघर यहां से हटाने के लिए कई बार मांग की गई, अब तक सुनवाई नहीं हुई है।
चौपुला के करीब बगिया शिव मंदिर: डलावघर के बगल में मंदिर और सामने अस्पताल है। मुख्य मार्ग से हजारों लोग हर रोज मुंह पर रुमाल रखकर निकलते हैं। नगर निगम ने डलावघर की जगह पर पोर्टा केबिन रखवाया लेकिन उसे चालू नहीं कराया।
कटरा चांद खां: मौर्या मंदिर के निकट ही डलावघर है। सामने दुकानें हैं। कारोबारियों से लेकर ग्राहकों तक को आने जाने में असुविधा होती है। शिकायत करने पर हर बार आश्वासन की घुट्टी देकर अधिकारी घर भेज देते हैं।
लोगों की बात
नगर निगम की गाड़ी हो या आम आदमी, डलावघरों में कूड़ा फेंकने वालों से जुर्माना लिया जाना चाहिए। - प्रशांत गुप्ता, चौपुला
तमाम लोग ऐसे हैं जो डोर-टू-डोर सर्विस को कूड़ा नहीं देते, डलावघरों में कूड़ा फेंक रहे हैं। इन पर सख्ती होनी चाहिए। - अमित प्रताप सिंह, बगिया शिव मंदिर
आने जाने में हर किसी को दिक्कत होती है। अधिकारी देखकर लौट जाते हैं। डलावघर जहां के तहां हैं। -हरीश चंद्र, चाहबाई
अमर उजाला ब्यूरो