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संकरी गलियों के स्टंटबाज हैं ये ई- रिक्शा वाले
बरेली
Updated Wed, 12 Jul 2017 01:42 AM IST
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शहरी जाम से परेशान हैं। हाईवे और शहर की प्रमुख सड़कों पर विकास के नाम पर जाम लगा है तो गलियों में आड़े तिरछे घुसते ई रिक्शा ने लोगों का चलना मुहाल किया है। शहर में चार हरिया वालों के तो दिन ही बुरे हैं, मगर दो पहिया वाले भी कम दुखी नहीं हैं। दस मिनट की दूरी बीस से तीस मिनट में पूरी करने से अब ज्यादा वक्त सड़कों पर बिताना मजबूरी है। पैदल चलने वालों की शीमत आई है। कल बेतरतीब चलते ई-रिक्शा टक्कर मार देंगे, हर पल यही खौफ गली वालों को परेशान किए है।
रबड़ी टोला: जाम और शोर से लोग परेशान
रबड़ी टोला में जरी कारोबारियाें की दुकानें हैं। ई रिक्शा संख्या(यूपी 25 एनएन 0039) और (यूपी 25 एनएन 0066) इधर उधर से निकले तो बीच में फंस गए। पीछे आ रहे लोगाें को दिक्कत हुई। हार्न के शोर से गली वालों के साथ भीड़ में फंसे लोग भी झल्ला गए। व्यापारियों ने गलियों के किनारे पर लोहे का एंगल लगवाए ताकि भारी वाहन न आएं। मगर दूसरी गलियों से ये घुस जाते हैं।
काजी टोला:पतली गली में भरे ई-रिक्शा
सूफी टोला से निकलकर कटकुईयां और कांकरटोला जाने के लिए जिस गली से निकलेंगे, सभी में नीले और लाल ई रिक्शा सवारी बैठाए चल रहे होंगे। यहीं काजी टोला प्राथमिक विद्यालय की सामने 4 फिट की गली में तीन ऑटो और तीन ई रिक्शे फंस गए। नाली में ऑटो का पहिया घुस गया और फिर लगा लंबा जाम।
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बिहारीपुर: कुतुबखाना जाम तो गलियां भी जाम
बिहारीपुर ढाल की ओर से जाइए या फिर आर्य समाज वाली गली से। यहां बाइक के अलावा अन्य कोई वाहन नहीं जा सकता, लेकिन ई- रिक्शा आराम से आते और जाते हैं। मूलकपुर में रहने वाले सचिन रस्तोगी ने बताया कि बड़ा बाजार में जब जाम लगता है तो ई रिक्शा वाले गली में घुस जाते हैं।
कांकरटोला: आगे ई-रिक्शा, पीछे बाइक
ईंट पजाया चौराहे से कांकरटोला गली में सवारी बैठाकर आसानी से ई रिक्शा आते और जाते हैं। कांकरटोला में मोबाइल शाप चलाने वाले गुलफाम अंसारी बताते हैं कि इस गली से एक के पीछे एक ई रिक्शा दौड़ते हैं। इनके पीछे वाहन रेंगते हैं।
सुभाषनगर: यहां तो कभी रुकते ही नहीं ई-रिक्शा
सुभाषनगर पुलिया से आप तपेश्वरनाथ मंदिर की ओर जाइए या फिर मिठाई की दुकान से मुड़कर बदायूं रोड की ओर। दर्जनों ई रिक्शा चौबीस घंटे यहां से गुजरते मिल जाएंगे। खरीदार और यहां से निकलने वाले लोगाें के लिए ई रिक्शा खतरनाक साबित होते हैं।
शहर में ई- रिक्शा
नगर निगम से पंजीकृत- 690
आरटीओ में पंजीकृत- 550
अवैध ई रिक्शा- 800 से अधिक
- नगर निगम के ई रिक्शा बने मुसीबत
नगर निगम ने 690 ई- रिक्शा अपने यहां 250 रुपये में पंजीकृत किए हैं और इनका नवीनीकरण भी कर दिया जो एमवी एक्ट के तहत अवैध है। इनको एनएन यूपी 25 नंबर भी जारी है। रिक्शा चालकाें के पास डीएल भी नहीं है। इनसे कोई दुर्घटना हो जाए तो प्रभावित पक्ष को कोई मुआवजा तक नहीं मिलेगा। परिवहन विभाग ने एतराज भी किया, लेकिन निगम अफसरों ने रोक नहीं लगाई। कुछ रिक्शा का पंजीकरण ही नहीं है। जिले भर में तीन दर्जन से अधिक डीलर अवैध बिक्री कर रहे हैं। ट्रैफिक पुलिस और परिवहन इन पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। नए पुराने कलपुर्जों से बने अवैध रिक्शे 70 से 80 हजार में हैं। ये काफी कमजोर हैं। चेसिस नंबर वाले रिक्शे सवा लाख के हैं। इसके 9 डीलर हैं।
- ई रिक्शा चलाने के यह हैं नियम
बैटरी से चलने वाले ई रिक्शा मोटर व्हीकल एक्ट के तहत चेसिस नंबर वाले ई- रिक्शा ही शहर में चलने हैं। इनका पंजीकरण होना है। चालक के पास ड्राइविंग लाइसेंस होना जरूरी है। हर साल इसका फिटनेस चेक होगा।
- जुगाड़ की बैटरी चार्जिंग से लाखों का चूना
शहर ही नहीं पूरे जिले में सौ से ज्यादा स्थानों पर अवैध ई रिक्शा चार्जिंग सेंटर खुले हुए हैं। न तो कोई कनेक्शन हैं और न ही कोई सुरक्षा व्यवस्था। बैटरी औसतन सात घंटे में चार्ज हो जाती है। दो हजार वाट क्षमता की बैटरी चार्ज करने में कम से कम 100 रुपये का खर्चा आएगा, लेकिन कटिया लगाकर चार्जिंग सेंटर चलाने वाले 50 से 70 रुपये में बैटरी फुल कर देते हैं। सिकलापुर, बिहारीपुर, शाहदाना, पुराना शहर, नकटिया, सुभाषनगर, किला, इज्जतनगर, मढ़ीनाथ, कांकरटोला, स्वालेनगर, बाकरगंज में खुलेआम रिक्शा चार्ज होते मिल जाएंगे।
कोट
आरटीओ कार्यालय में केवल सिर्फ चेसिस वाले ई- रिक्शा का ही रजिस्ट्रेशन कर लाइसेंस दिए जाते हैं। नगर निगम के पंजीकरण मोटर व्हीकल एक्ट के दायरे में नहीं आते हैं। अवैध रिक्शों की रोकथाम करने में ट्रैफिक पुलिस और हमारा प्रवर्तन इकाई भी लचर है। वाणिज्य कर विभाग और प्रशासन को पत्र लिखकर इनकी बिक्री रोकने को कहा था।
आरआर सोनी, आरटीओ
कोट
नगर निगम और आरटीओ से ई रिक्शा के बारे में जानकारी मांगी गई थी। लेकिन अभी तक न तो सूची मिली है और न ही ई रिक्शा का रूट मिला है। ई रिक्शा को लेकर प्लानिंग की जा रही है। अवैध ई रिक्शों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
कमलेश बहादुर, एसपी ट्रैफिक
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रबड़ी टोला: जाम और शोर से लोग परेशान
रबड़ी टोला में जरी कारोबारियाें की दुकानें हैं। ई रिक्शा संख्या(यूपी 25 एनएन 0039) और (यूपी 25 एनएन 0066) इधर उधर से निकले तो बीच में फंस गए। पीछे आ रहे लोगाें को दिक्कत हुई। हार्न के शोर से गली वालों के साथ भीड़ में फंसे लोग भी झल्ला गए। व्यापारियों ने गलियों के किनारे पर लोहे का एंगल लगवाए ताकि भारी वाहन न आएं। मगर दूसरी गलियों से ये घुस जाते हैं।
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काजी टोला:पतली गली में भरे ई-रिक्शा
सूफी टोला से निकलकर कटकुईयां और कांकरटोला जाने के लिए जिस गली से निकलेंगे, सभी में नीले और लाल ई रिक्शा सवारी बैठाए चल रहे होंगे। यहीं काजी टोला प्राथमिक विद्यालय की सामने 4 फिट की गली में तीन ऑटो और तीन ई रिक्शे फंस गए। नाली में ऑटो का पहिया घुस गया और फिर लगा लंबा जाम।
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बिहारीपुर: कुतुबखाना जाम तो गलियां भी जाम
बिहारीपुर ढाल की ओर से जाइए या फिर आर्य समाज वाली गली से। यहां बाइक के अलावा अन्य कोई वाहन नहीं जा सकता, लेकिन ई- रिक्शा आराम से आते और जाते हैं। मूलकपुर में रहने वाले सचिन रस्तोगी ने बताया कि बड़ा बाजार में जब जाम लगता है तो ई रिक्शा वाले गली में घुस जाते हैं।
कांकरटोला: आगे ई-रिक्शा, पीछे बाइक
ईंट पजाया चौराहे से कांकरटोला गली में सवारी बैठाकर आसानी से ई रिक्शा आते और जाते हैं। कांकरटोला में मोबाइल शाप चलाने वाले गुलफाम अंसारी बताते हैं कि इस गली से एक के पीछे एक ई रिक्शा दौड़ते हैं। इनके पीछे वाहन रेंगते हैं।
सुभाषनगर: यहां तो कभी रुकते ही नहीं ई-रिक्शा
सुभाषनगर पुलिया से आप तपेश्वरनाथ मंदिर की ओर जाइए या फिर मिठाई की दुकान से मुड़कर बदायूं रोड की ओर। दर्जनों ई रिक्शा चौबीस घंटे यहां से गुजरते मिल जाएंगे। खरीदार और यहां से निकलने वाले लोगाें के लिए ई रिक्शा खतरनाक साबित होते हैं।
शहर में ई- रिक्शा
नगर निगम से पंजीकृत- 690
आरटीओ में पंजीकृत- 550
अवैध ई रिक्शा- 800 से अधिक
- नगर निगम के ई रिक्शा बने मुसीबत
नगर निगम ने 690 ई- रिक्शा अपने यहां 250 रुपये में पंजीकृत किए हैं और इनका नवीनीकरण भी कर दिया जो एमवी एक्ट के तहत अवैध है। इनको एनएन यूपी 25 नंबर भी जारी है। रिक्शा चालकाें के पास डीएल भी नहीं है। इनसे कोई दुर्घटना हो जाए तो प्रभावित पक्ष को कोई मुआवजा तक नहीं मिलेगा। परिवहन विभाग ने एतराज भी किया, लेकिन निगम अफसरों ने रोक नहीं लगाई। कुछ रिक्शा का पंजीकरण ही नहीं है। जिले भर में तीन दर्जन से अधिक डीलर अवैध बिक्री कर रहे हैं। ट्रैफिक पुलिस और परिवहन इन पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। नए पुराने कलपुर्जों से बने अवैध रिक्शे 70 से 80 हजार में हैं। ये काफी कमजोर हैं। चेसिस नंबर वाले रिक्शे सवा लाख के हैं। इसके 9 डीलर हैं।
- ई रिक्शा चलाने के यह हैं नियम
बैटरी से चलने वाले ई रिक्शा मोटर व्हीकल एक्ट के तहत चेसिस नंबर वाले ई- रिक्शा ही शहर में चलने हैं। इनका पंजीकरण होना है। चालक के पास ड्राइविंग लाइसेंस होना जरूरी है। हर साल इसका फिटनेस चेक होगा।
- जुगाड़ की बैटरी चार्जिंग से लाखों का चूना
शहर ही नहीं पूरे जिले में सौ से ज्यादा स्थानों पर अवैध ई रिक्शा चार्जिंग सेंटर खुले हुए हैं। न तो कोई कनेक्शन हैं और न ही कोई सुरक्षा व्यवस्था। बैटरी औसतन सात घंटे में चार्ज हो जाती है। दो हजार वाट क्षमता की बैटरी चार्ज करने में कम से कम 100 रुपये का खर्चा आएगा, लेकिन कटिया लगाकर चार्जिंग सेंटर चलाने वाले 50 से 70 रुपये में बैटरी फुल कर देते हैं। सिकलापुर, बिहारीपुर, शाहदाना, पुराना शहर, नकटिया, सुभाषनगर, किला, इज्जतनगर, मढ़ीनाथ, कांकरटोला, स्वालेनगर, बाकरगंज में खुलेआम रिक्शा चार्ज होते मिल जाएंगे।
कोट
आरटीओ कार्यालय में केवल सिर्फ चेसिस वाले ई- रिक्शा का ही रजिस्ट्रेशन कर लाइसेंस दिए जाते हैं। नगर निगम के पंजीकरण मोटर व्हीकल एक्ट के दायरे में नहीं आते हैं। अवैध रिक्शों की रोकथाम करने में ट्रैफिक पुलिस और हमारा प्रवर्तन इकाई भी लचर है। वाणिज्य कर विभाग और प्रशासन को पत्र लिखकर इनकी बिक्री रोकने को कहा था।
आरआर सोनी, आरटीओ
कोट
नगर निगम और आरटीओ से ई रिक्शा के बारे में जानकारी मांगी गई थी। लेकिन अभी तक न तो सूची मिली है और न ही ई रिक्शा का रूट मिला है। ई रिक्शा को लेकर प्लानिंग की जा रही है। अवैध ई रिक्शों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
कमलेश बहादुर, एसपी ट्रैफिक