{"_id":"68c4928d9f34c7d6860bd7f2","slug":"there-is-no-correct-answer-to-rti-authority-filed-a-report-to-break-the-morale-bareilly-news-c-4-vns1074-724325-2025-09-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bareilly News: आरटीआई का सही जवाब नहीं, मनोबल तोड़ने के लिए प्राधिकरण ने दी तहरीर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bareilly News: आरटीआई का सही जवाब नहीं, मनोबल तोड़ने के लिए प्राधिकरण ने दी तहरीर
विज्ञापन
बरेली। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत आम आदमी को जो अधिकार मिला, बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) उसका खुले तौर पर हनन कर रहा है। करीब 1.47 करोड़ रुपये के बंदरबांट से संबंधित सूचना मांगने पर बीडीए ने आरटीआई एक्टिविस्ट के खिलाफ कार्रवाई के लिए बिथरी चैनपुर थाने में तहरीर दी है।
कानूनी कार्रवाई में उलझाकर बीडीए उनका मनोबल तोड़ने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, पलटवार करते हुए एक्टिविस्ट ने भी तहरीर दी है। लाल फाटक निवासी आरटीआई एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष विनोद कुमार जोशी के मुताबिक, उन्हें जानकारी मिली थी कि बीडीए ने सुमित अग्रवाल नाम के व्यक्ति को करीब डेढ़ करोड़ रुपये का भुगतान किया है।
विनोद ने सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 7(1) के तहत प्राधिकरण से सुमित अग्रवाल व उनके काम के बारे में विस्तृत जानकारी मांग ली।
विनोद का कहना है कि उन्होंने स्पष्ट लिखा था कि मांगी गई बिंदुवार सूचना अधिकतम 25 दिनों में मुहैया कर दी जाए, अन्यथा वह इसे सार्वजनिक करने के लिए स्वतंत्र हैं। यह भी लिखा था कि आरटीआई की धारा 7(9) के तहत सूचना को उसी प्रारूप में उपलब्ध कराया जाए, जिसमें उसे मांगा गया है। ब्यूरो
विज्ञापन
विज्ञापन
कानूनी कार्रवाई में उलझाकर बीडीए उनका मनोबल तोड़ने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, पलटवार करते हुए एक्टिविस्ट ने भी तहरीर दी है। लाल फाटक निवासी आरटीआई एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष विनोद कुमार जोशी के मुताबिक, उन्हें जानकारी मिली थी कि बीडीए ने सुमित अग्रवाल नाम के व्यक्ति को करीब डेढ़ करोड़ रुपये का भुगतान किया है।
विज्ञापन
विनोद ने सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 7(1) के तहत प्राधिकरण से सुमित अग्रवाल व उनके काम के बारे में विस्तृत जानकारी मांग ली।
विनोद का कहना है कि उन्होंने स्पष्ट लिखा था कि मांगी गई बिंदुवार सूचना अधिकतम 25 दिनों में मुहैया कर दी जाए, अन्यथा वह इसे सार्वजनिक करने के लिए स्वतंत्र हैं। यह भी लिखा था कि आरटीआई की धारा 7(9) के तहत सूचना को उसी प्रारूप में उपलब्ध कराया जाए, जिसमें उसे मांगा गया है। ब्यूरो
विज्ञापन