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कश्ती की तरह होता है कलाकार
बरेली
Updated Sun, 25 Jan 2015 10:51 PM IST
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नाट्यकर्मी पद्मश्री डा. नीलम मान सिंह चौधरी का कहना है कि नाटक का कलाकार एक कश्ती की तरह की तरह होता है जो वक्त रूपी हवा के साथ चले या फिर विपरीत दिशा में चले वक्त की हवा को नकार नहीं सकता।
डा. नीलम यहां दया दृष्टि के थियेटर फेस्ट में द लाइसेंस नाटक लेकर आई हुई हैं। विंडरमेयर में हुई बातचीत में उन्होंने कहा कि दर्शक क्या चाहते हैं यह मालूम नहीं। कलाकार तो वह करता है जो उसके अंदर से निकलता है। जब हम काम करते हैं तो रिश्ता कहानी से बनता है। एक्टर का रिश्ता टैक्ट्स के साथ बनता है। दर्शक तब आते हैं जब शो होता है। तब दर्शक से एक रिश्ता बनता है। नाट्य कला पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि नाटक को लेकर एक धागा नहीं खींच सकते। इसका एक बड़ा दायरा है। हर नाटक अपनी आजादी लिए होता है। यह हदों की बंदिश से बाहर की कला है। एक और सवाल पर उन्होंने कहा कि थियेटर अब मुश्किल होता जा रहा है। इसके इकनामिक्स बदलने लगे हैं। एक्टर भी थकने लगे हैं। इकट्ठा रखना मुश्किल हो गया है। कलाकारों के सामने सबसे बड़ी जरूरत पैसा है। यह जरूरत सिर्फ नाटक से पूरी नहीं हो सकती।
एनएसडी से पास आउट डा नीलम इब्राहिम अलकाजी और पीवी कारंथ जैसे दिग्गज नाट्यकर्मियों के साथ काम कर चुकी हैं। वह अब तक वेस्टर्न, अफ्रीकन, फ्रेंच, स्पेनिश प्ले कर चुकीं हैं। इसके अलावा यूएसए, यूके, जापान, फ्रांस, इंग्लैंड, जर्मनी, सिंगापुर, दुबई, पाकिस्तान, आस्ट्रेलिया, लंदन आदि में नाटकों का शो कर चुकी हैं।
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डा. नीलम यहां दया दृष्टि के थियेटर फेस्ट में द लाइसेंस नाटक लेकर आई हुई हैं। विंडरमेयर में हुई बातचीत में उन्होंने कहा कि दर्शक क्या चाहते हैं यह मालूम नहीं। कलाकार तो वह करता है जो उसके अंदर से निकलता है। जब हम काम करते हैं तो रिश्ता कहानी से बनता है। एक्टर का रिश्ता टैक्ट्स के साथ बनता है। दर्शक तब आते हैं जब शो होता है। तब दर्शक से एक रिश्ता बनता है। नाट्य कला पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि नाटक को लेकर एक धागा नहीं खींच सकते। इसका एक बड़ा दायरा है। हर नाटक अपनी आजादी लिए होता है। यह हदों की बंदिश से बाहर की कला है। एक और सवाल पर उन्होंने कहा कि थियेटर अब मुश्किल होता जा रहा है। इसके इकनामिक्स बदलने लगे हैं। एक्टर भी थकने लगे हैं। इकट्ठा रखना मुश्किल हो गया है। कलाकारों के सामने सबसे बड़ी जरूरत पैसा है। यह जरूरत सिर्फ नाटक से पूरी नहीं हो सकती।
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एनएसडी से पास आउट डा नीलम इब्राहिम अलकाजी और पीवी कारंथ जैसे दिग्गज नाट्यकर्मियों के साथ काम कर चुकी हैं। वह अब तक वेस्टर्न, अफ्रीकन, फ्रेंच, स्पेनिश प्ले कर चुकीं हैं। इसके अलावा यूएसए, यूके, जापान, फ्रांस, इंग्लैंड, जर्मनी, सिंगापुर, दुबई, पाकिस्तान, आस्ट्रेलिया, लंदन आदि में नाटकों का शो कर चुकी हैं।
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