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Bareilly News: स्वरोजगार का अधूरा ख्वाब, कर्जदार होकर भर रहीं ब्याज

Tue, 20 May 2025 01:18 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 20 May 2025 01:18 AM IST
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The unfulfilled dream of self-employment, being in debt and paying interest
बरेली। स्वरोजगार का ख्वाब संजोए महिलाएं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जुड़ीं। मिशन ने उनसे 2.5 लाख झंडे बनवाए, पर भुगतान नहीं किया। मिशन पर महिलाओं के 51 लाख रुपये बकाया हैं। झंडे के लिए कपड़ा, सिलाई, कटिंग व छपाई आदि का भुगतान महिलाओं ने खुद किया था। इससे वे आत्मनिर्भर के बजाय कर्जदार बन गईं। अब 10 माह से ब्याज भर रहीं हैं। भुगतान करने के बजाय अफसर पत्राचार में उलझे हुए हैं।
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अगस्त 2024 में हर घर तिरंगा अभियान में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से झंडे बनवाए गए थे। जिले के 65 स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने 2.55 लाख झंडे बनाकर अधिकारियों को सौंप दिया। अफसरों ने सप्ताहभर में भुगतान का आश्वासन दिया था। 20 रुपये प्रति झंडे की दर से महिलाओं को 51 लाख रुपये मिलने हैं। इस काम के लिए शासन ने सात अगस्त 2024 को ही जिले को 97 लाख रुपये उपलब्ध करा दिए थे। यह रकम एकता क्लस्टर लेवल फाउंडेशन के खाते में डंप हैं। इसकी निकासी पर रोक लगी है। महिलाएं बताती हैं कि भुगतान अटकने से समूह के अन्य कार्य भी बंद हैं।
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800 रुपये महीने दे रहे हैं ब्याज
मोहनपुर के बाला जी स्वयं सहायता समूह की भावना ने बताया कि ब्लॉक कार्यालय से सिर्फ आश्वासन मिल रहा है। उन्होंने अपने और गांव के ही दूसरे समूह के साथ मिलकर चार हजार झंडे बनाए थे। इसमें 40 हजार रुपये खर्च हुए थे। अब हर माह आठ सौ रुपये ब्याज भर रहीं हैं।
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कोषाधिकारी की आपत्ति के बाद चल रहा पत्राचार

उपायुक्त स्वत: रोजगार योगेंद्र लाल भारती ने बताया कि जल्दबाजी में समूहों से झंडे की आपूर्ति के संबंध में शासन से अनुमति नहीं ली जा सकी थी। इसी पर कोषाधिकारी ने आपत्ति लगाई है। अब शासन से मार्गदर्शन मांगा है। शासन से कोई जवाब नहीं मिलने से अफसर चिट्ठी पर चिट्ठी लिखे जा रहे हैं, पर महिलाओं का भुगतान नहीं हो पा रहा है। संवाद
कब-कब लिए गए पत्र
- 20 फरवरी 2025 को सीडीओ ने मिशन निदेशक को पत्र लिखा।
- तीन मार्च 2025 को डीएम ने मिशन निदेशक को पत्र लिखा।
- 21 अप्रैल 2025 को फिर सीडीओ ने मिशन निदेशक को पत्र भेजा।
- 5 मई 2025 को डीएम ने अपर मुख्य सचिव (ग्राम्य विकास) को पत्र लिखा।
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